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KDMC में फिर गरमाई सियासत, मोदी फोटो विवाद पर भाजपा ने विपक्ष में बैठने की दी चेतावनी

पुणे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर हटाने को लेकर शुरू हुआ विवाद अब कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका (KDMC) की राजनीति तक पहुंच गया है। भाजपा ने शिवसेना (शिंदे गुट) से KDMC के सत्तासमीकरण से मनसे को बाहर करने की मांग की है। मांग नहीं माने जाने पर भाजपा ने विपक्ष में बैठने की चेतावनी दी है। विवाद के चलते KDMC की महासभा भी स्थगित करनी पड़ी।

sd14 सित. 2026, 05:09 PM IST
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KDMC में फिर गरमाई सियासत, मोदी फोटो विवाद पर भाजपा ने विपक्ष में बैठने की दी चेतावनी

   

      कल्याण-डोंबिवली: पुणे के सरकारी तंत्रनिकेतन महाविद्यालय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर हटाए जाने के विवाद के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में शुरू हुआ टकराव अब कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका तक पहुंच गया है। KDMC में भाजपा, शिवसेना (शिंदे गुट) और मनसे के बीच पहले से मौजूद राजनीतिक समीकरण इस मुद्दे के बाद और तनावपूर्ण हो गए हैं। पुणे में मनसे नेता अमित ठाकरे के दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी की तस्वीर हटाए जाने को लेकर भाजपा ने कड़ा विरोध जताया था। इस मामले में मनसे कार्यकर्ताओं के खिलाफ पुलिस कार्रवाई भी हुई। मनसे की ओर से तस्वीर हटाने के फैसले का बचाव किया गया, जबकि भाजपा ने इसे प्रधानमंत्री के अपमान से जोड़कर विरोध किया।


        इस विवाद का असर KDMC में भी दिखाई दिया। भाजपा ने शिवसेना से मांग की कि मनसे को महानगरपालिका के सत्तासमीकरण से बाहर किया जाए। भाजपा ने स्पष्ट संकेत दिया कि अगर शिवसेना ने मनसे के साथ गठबंधन जारी रखा तो भाजपा सत्ता से अलग होकर विपक्ष में बैठने का फैसला कर सकती है।

इसी मुद्दे को लेकर KDMC की महासभा में भाजपा ने जोरदार विरोध किया। भाजपा गुटनेता शशिकांत कांबळे ने सभा स्थगित करने की मांग रखी, जिसे महापौर हर्षाली चौधरी ने स्वीकार कर लिया। इसके बाद महासभा को दिनभर के लिए स्थगित कर दिया गया। मनसे और कांग्रेस ने इस फैसले का विरोध करते हुए भाजपा पर राजनीतिक मुद्दे के कारण जनहित के काम प्रभावित करने का आरोप लगाया।

 

      मनसे ने भी भाजपा पर पलटवार किया। मनसे नगरसेवक प्रल्हाद म्हात्रे ने कहा कि मौजूदा महापौर को सत्ता में बनाए रखने में मनसे की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने भाजपा के रुख पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर भाजपा को गठबंधन पर इतनी आपत्ति है तो उसे सत्ता से बाहर होने का फैसला करना चाहिए।

इस पूरे घटनाक्रम ने KDMC में भाजपा, शिवसेना और मनसे के बीच सत्ता-समीकरण को लेकर नई राजनीतिक खींचतान पैदा कर दी है। भाजपा के स्थानीय नेतृत्व ने गठबंधन से बाहर निकलने के अंतिम फैसले को प्रदेश नेतृत्व पर छोड़ने की बात कही है। ऐसे में अब नजर इस बात पर है कि शिवसेना और भाजपा के बीच यह विवाद किस तरह सुलझता है और KDMC की मौजूदा सत्ता व्यवस्था पर इसका क्या असर पड़ता है।