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पेंशन सखी: घर-घर पहुंचेगी रिटायरमेंट सुरक्षा

ग्रामीण भारत में पेंशन और रिटायरमेंट प्लानिंग को बढ़ावा देने के लिए ग्रामीण विकास विभाग और पेंशन फंड नियामक एवं विकास प्राधिकरण (PFRDA) ने साझेदारी की है। ‘पेंशन सखियों’ के जरिए गांवों में लोगों को पेंशन योजनाओं की जानकारी, नामांकन और पेंशन से जुड़ी सेवाओं में सहायता दी जाएगी। इस पहल में स्वयं सहायता समूहों और DAY-NRLM के सामुदायिक नेटवर्क का इस्तेमाल किया जाएगा।

Neha Sharma15 सित. 2026, 05:06 PM IST
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पेंशन सखी: घर-घर पहुंचेगी रिटायरमेंट सुरक्षा

नई दिल्ली: ग्रामीण भारत में पेंशन और रिटायरमेंट प्लानिंग की जानकारी को घर-घर तक पहुंचाने के लिए ग्रामीण विकास विभाग (DoRD) और पेंशन फंड नियामक एवं विकास प्राधिकरण (PFRDA) ने एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस साझेदारी के तहत ग्रामीण इलाकों में ‘पेंशन सखियों’ का नेटवर्क विकसित किया जाएगा, जो लोगों को पेंशन योजनाओं की जानकारी देने के साथ नामांकन और पेंशन से जुड़ी सेवाओं में सहायता करेंगी। इस पहल का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को रिटायरमेंट के लिए समय रहते वित्तीय योजना बनाने और औपचारिक पेंशन व्यवस्था से जुड़ने के लिए जागरूक करना है। सरकार खास तौर पर उन ग्रामीण परिवारों तक पहुंच बढ़ाना चाहती है, जहां पेंशन और रिटायरमेंट प्लानिंग से जुड़ी जानकारी तथा वित्तीय सलाह की पहुंच अभी सीमित है।


DAY-NRLM के नेटवर्क का होगा इस्तेमाल

‘पेंशन सखी’ पहल को दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) के मौजूदा सामुदायिक नेटवर्क के जरिए आगे बढ़ाया जाएगा। इसमें बैंकिंग कॉरेस्पोंडेंट (BC) सखियों और प्रशिक्षित कम्युनिटी रिसोर्स पर्सन की मदद ली जाएगी। ये स्थानीय स्तर पर ग्रामीण परिवारों के साथ पहले से काम कर रहे नेटवर्क का हिस्सा हैं। पेंशन सखियां स्वयं सहायता समूहों (SHGs) से जुड़े सदस्यों, ग्रामीण महिलाओं, लखपति दीदियों और अन्य ग्रामीण परिवारों को पेंशन तथा रिटायरमेंट प्लानिंग के बारे में जानकारी देंगी। जरूरत के अनुसार वे लोगों को पेंशन योजनाओं में नामांकन की प्रक्रिया समझाने और संबंधित सेवाओं तक पहुंच बनाने में भी मदद करेंगी।


महिलाओं और स्वयं सहायता समूहों पर विशेष फोकस

इस पहल में महिला नेतृत्व वाले स्वयं सहायता समूहों के व्यापक नेटवर्क को महत्वपूर्ण आधार बनाया गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में SHG नेटवर्क पहले से ही महिलाओं को बचत, बैंकिंग और आजीविका से जोड़ने में भूमिका निभाता है। अब इसी सामुदायिक ढांचे का इस्तेमाल लंबी अवधि की वित्तीय सुरक्षा और पेंशन जागरूकता बढ़ाने के लिए किया जाएगा। ग्रामीण विकास विभाग के सचिव रोहित कंसल ने कहा कि स्वयं सहायता समूहों से जुड़े ग्रामीण परिवारों की बचत की आदतें, आजीविका चक्र और जोखिम अलग-अलग होते हैं। ऐसे में सामाजिक सुरक्षा को ग्रामीण परिवारों की दीर्घकालिक आर्थिक मजबूती का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाना जरूरी है। उन्होंने पेंशन और वित्तीय साक्षरता से जुड़ी जानकारी में ईमानदारी, पारदर्शिता और भरोसे पर जोर दिया है।


पेंशन योजनाओं और NPS की जानकारी बढ़ेगी

पेंशन सखियों के जरिए ग्रामीण लोगों को उपलब्ध पेंशन विकल्पों और रिटायरमेंट प्लानिंग के महत्व के बारे में समझाया जाएगा। इससे राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) जैसे औपचारिक पेंशन उत्पादों के प्रति जागरूकता बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है। सरकार का लक्ष्य केवल लोगों को किसी योजना में नामांकित करना नहीं है, बल्कि उन्हें पेंशन से जुड़े विकल्पों और लंबी अवधि की वित्तीय योजना को समझने में सक्षम बनाना भी है। इससे ग्रामीण परिवार अपने भविष्य की आय और रिटायरमेंट के बाद की जरूरतों के लिए बेहतर तैयारी कर सकेंगे।


डिजिटल सिस्टम से होगी निगरानी

पहल के तहत डिजिटल डैशबोर्ड और मोबाइल एवं वेब आधारित समाधानों का इस्तेमाल भी किया जाएगा। इससे पेंशन जागरूकता, पहुंच और नामांकन से जुड़ी प्रगति पर नजर रखने में मदद मिलेगी। ग्रामीण स्तर पर उपलब्ध जानकारी के आधार पर उन क्षेत्रों की पहचान की जा सकेगी, जहां पेंशन कवरेज और जागरूकता को और बढ़ाने की जरूरत है।


ग्रामीण वित्तीय समावेशन को मिलेगा नया आयाम

ग्रामीण परिवारों के लिए वित्तीय समावेशन अब केवल बैंक खाता खोलने तक सीमित नहीं है। नियमित बचत, बीमा, पेंशन और रिटायरमेंट प्लानिंग भी आर्थिक सुरक्षा के महत्वपूर्ण हिस्से हैं। खासकर अनियमित आय वाले परिवारों के लिए भविष्य की वित्तीय जरूरतों को लेकर समय पर जानकारी और सही मार्गदर्शन महत्वपूर्ण हो सकता है। पेंशन सखी मॉडल के जरिए सरकार मौजूदा ग्रामीण महिला नेटवर्क को पेंशन जागरूकता से जोड़ रही है। इसका उद्देश्य ग्रामीण भारत में पेंशन की पहुंच को जमीनी स्तर तक ले जाना और अधिक परिवारों को दीर्घकालिक सामाजिक एवं वित्तीय सुरक्षा के दायरे में लाना है।