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सत्याम वर्मा को इलाहाबाद HC से बड़ी राहत, नोएडा मजदूर प्रदर्शन के एक केस में मिली जमानत

नोएडा में अप्रैल 2026 में हुए मजदूर प्रदर्शन से जुड़े 11 आपराधिक मामलों का सामना कर रहे पत्रकार सत्याम वर्मा को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक मामले में बड़ी राहत दी है। जस्टिस कृष्ण पहल की पीठ ने उन्हें सह-आरोपी को पहले मिल चुकी जमानत के आधार पर पैरिटी के सिद्धांत पर जमानत दी। हालांकि, अन्य मामलों में हिरासत और NSA के तहत अलग से निरुद्ध होने के कारण वर्मा की तत्काल रिहाई नहीं होगी।

Sonali15 सित. 2026, 05:06 PM IST
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सत्याम वर्मा को इलाहाबाद HC से बड़ी राहत, नोएडा मजदूर प्रदर्शन के एक केस में मिली जमानत

प्रयागराज।

 नोएडा में अप्रैल 2026 में हुए मजदूर प्रदर्शन से जुड़े मामलों में गिरफ्तार पत्रकार सत्याम वर्मा को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट ने उन्हें प्रदर्शन से जुड़े एक आपराधिक मामले में जमानत दे दी है। अदालत ने यह राहत इसी मामले में सह-आरोपी को पहले दी गई जमानत के आधार पर ‘पैरिटी’ यानी समानता के सिद्धांत पर प्रदान की। जस्टिस कृष्ण पहल की पीठ ने केस क्राइम नंबर 164/2026 में सत्याम वर्मा को जमानत दी। यह FIR गौतम बुद्ध नगर के एक पुलिस थाने में दर्ज की गई थी। मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के साथ सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान से संबंधित कानून के प्रावधान भी लगाए गए हैं।


सह-आरोपी को 23 जून को मिली थी जमानत

इसी मामले में सह-आरोपी शिव कुमार उर्फ शिवा को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 23 जून 2026 को जमानत दी थी। शिव कुमार को जमानत देते समय अदालत ने विशेष रूप से यह तथ्य देखा था कि उसका नाम FIR में नहीं था और FIR एक भीड़ के खिलाफ दर्ज की गई थी। वह 14 अप्रैल 2026 से जेल में बंद था। सत्याम वर्मा की ओर से भी इसी आधार पर जमानत की मांग की गई। अदालत के समक्ष यह तर्क रखा गया कि जब इसी मामले में समान परिस्थितियों वाले सह-आरोपी को पहले ही जमानत मिल चुकी है, तो वर्मा को भी समानता के आधार पर राहत दी जानी चाहिए। हाईकोर्ट ने इसी आधार पर मौजूदा मामले में उन्हें जमानत प्रदान कर दी।


एक मामले में जमानत, लेकिन अभी जेल से बाहर नहीं आएंगे

हालांकि, हाईकोर्ट के इस आदेश के बावजूद सत्याम वर्मा की तत्काल जेल से रिहाई नहीं होगी। इसकी वजह यह है कि वह नोएडा मजदूर प्रदर्शन से जुड़े अन्य आपराधिक मामलों में भी हिरासत में हैं। बताया गया है कि उनके खिलाफ कुल 11 आपराधिक मामले दर्ज किए गए हैं। इसके अलावा उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत भी अलग से हिरासत में रखा गया है। ऐसे में एक मामले में जमानत मिलने के बावजूद अन्य मामलों और NSA हिरासत के चलते वह फिलहाल जेल में ही रहेंगे।


अदालत ने किस आधार पर दी राहत?

इस मामले में हाईकोर्ट का आदेश ‘पैरिटी’ के सिद्धांत पर आधारित है। सामान्य तौर पर यदि किसी मामले में समान भूमिका और परिस्थितियों वाले सह-आरोपी को पहले ही जमानत मिल चुकी है, तो अदालत दूसरे आरोपी की जमानत याचिका पर भी उस राहत को एक महत्वपूर्ण आधार के रूप में देख सकती है। सत्याम वर्मा के मामले में भी हाईकोर्ट ने इसी पूर्व आदेश को ध्यान में रखते हुए उन्हें संबंधित केस में जमानत दी है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि उनके खिलाफ दर्ज अन्य मामलों की कार्यवाही समाप्त हो गई है या उन मामलों में भी उन्हें स्वतः जमानत मिल गई है।


नोएडा मजदूर प्रदर्शन से जुड़े मामलों में कार्रवाई

अप्रैल 2026 में नोएडा में हुए मजदूरों के प्रदर्शन के बाद पुलिस ने कई आपराधिक मामले दर्ज किए थे। इन मामलों में प्रदर्शन, भीड़ से जुड़े आरोपों और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने सहित विभिन्न प्रावधान लगाए गए हैं। सत्याम वर्मा की गिरफ्तारी और उनके खिलाफ दर्ज मामलों को लेकर यह मामला पहले भी चर्चा में रहा है। अब इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदर्शन से जुड़े एक मामले में उन्हें सह-आरोपी के साथ समानता के आधार पर जमानत दी है। हालांकि, अन्य आपराधिक मामलों और NSA के तहत हिरासत के कारण इस आदेश का तत्काल परिणाम जेल से उनकी रिहाई के रूप में नहीं होगा।