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अभिषेक उपाध्याय की तलाश में पूर्व दिल्ली मेयर के घर UP पुलिस की रेड? SC ने कहा- पहले दिल्ली पुलिस से मांगें FIR

पत्रकार अभिषेक उपाध्याय की तलाश में दिल्ली स्थित अपने आवास पर गाजियाबाद पुलिस की कथित छापेमारी के खिलाफ पूर्व दिल्ली मेयर फरहाद सूरी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सीधे FIR दर्ज करने का आदेश देने से इनकार कर दिया। CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने याचिकाकर्ता को BNSS के तहत उपलब्ध वैधानिक उपाय अपनाने की स्वतंत्रता दी। कोर्ट ने अंतरराज्यीय पुलिस छापेमारी को लेकर दिशानिर्देश जारी करने की मांग पर भी हस्तक्षेप नहीं किया।

Sonali15 सित. 2026, 05:06 PM IST
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अभिषेक उपाध्याय की तलाश में पूर्व दिल्ली मेयर के घर UP पुलिस की रेड? SC ने कहा- पहले दिल्ली पुलिस से मांगें FIR

नई दिल्ली।

 पत्रकार अभिषेक उपाध्याय की तलाश में दिल्ली स्थित अपने घर पर उत्तर प्रदेश पुलिस की कथित छापेमारी के खिलाफ पूर्व दिल्ली मेयर फरहाद सूरी को सुप्रीम कोर्ट से फिलहाल सीधे राहत नहीं मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने गाजियाबाद पुलिस के अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज कराने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता को पहले FIR दर्ज कराने के लिए उपलब्ध सामान्य वैधानिक उपायों का सहारा लेना चाहिए। अदालत ने संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत सीधे FIR दर्ज करने का निर्देश देने से इनकार कर दिया। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने फरहाद सूरी को BNSS के तहत उपलब्ध कानूनी उपाय अपनाने की स्वतंत्रता देते हुए याचिका का निपटारा कर दिया। कोर्ट ने अंतरराज्यीय पुलिस छापेमारी के लिए दिशानिर्देश जारी करने की वैकल्पिक मांग पर भी विचार करने से इनकार कर दिया।


क्या है पूरा मामला?

यह विवाद पत्रकार अभिषेक उपाध्याय के खिलाफ गाजियाबाद पुलिस द्वारा दर्ज FIR के बाद सामने आया। उपाध्याय ने अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे और कथित चोरी से जुड़े आरोपों पर रिपोर्टिंग की थी। इसके बाद गाजियाबाद के इंदिरापुरम थाने में उनके खिलाफ कथित रोड-रेज की घटना को लेकर FIR दर्ज की गई। उपाध्याय ने इस FIR को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी और आरोप लगाया था कि उन्हें उनकी पत्रकारिता और रिपोर्टिंग के कारण निशाना बनाया जा रहा है। 25 अगस्त 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण दिया था और पुलिस को FIR की कॉपी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने उन्हें उचित राहत के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट जाने की स्वतंत्रता भी दी थी।


पूर्व मेयर के घर पहुंची पुलिस टीम का आरोप

मामला तब और गंभीर हो गया जब पूर्व दिल्ली मेयर फरहाद सूरी ने आरोप लगाया कि गाजियाबाद पुलिस की एक बड़ी टीम दिल्ली स्थित उनके आवास पर पहुंची थी। आरोप है कि पुलिस टीम पत्रकार अभिषेक उपाध्याय की तलाश कर रही थी। सूरी के अनुसार, पुलिस टीम रात के समय उनके निजामुद्दीन ईस्ट स्थित आवास पर पहुंची थी। उन्होंने पुलिस अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज करने और मामले की स्वतंत्र जांच की मांग की थी। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, सूरी ने आरोप लगाया था कि पुलिस टीम के पास दिल्ली में कार्रवाई के लिए आवश्यक स्थानीय अनुमति या वारंट नहीं था। हालांकि, ये आरोप हैं और सुप्रीम कोर्ट ने इस स्तर पर इन आरोपों की सत्यता पर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है। अभिषेक उपाध्याय ने भी सुप्रीम कोर्ट में अतिरिक्त हलफनामा दाखिल कर इस कथित कार्रवाई का उल्लेख किया था। उन्होंने पुलिस टीम के दिल्ली आने की अनुमति, पुलिसकर्मियों और वाहनों की आवाजाही से जुड़े रिकॉर्ड, दिल्ली पुलिस के साथ हुई बातचीत तथा CCTV और अन्य इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड अदालत के सामने मंगाने की मांग की थी।


SC ने सीधे FIR का आदेश क्यों नहीं दिया?

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में अनुच्छेद 32 के तहत सीधे हस्तक्षेप करने के बजाय याचिकाकर्ता को कानून में उपलब्ध सामान्य प्रक्रिया अपनाने को कहा। कोर्ट ने स्पष्ट रूप से याचिकाकर्ता को BNSS के तहत FIR दर्ज कराने के लिए उपलब्ध वैधानिक उपाय अपनाने की स्वतंत्रता दी। इसका मतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस अधिकारियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों को खारिज नहीं किया है। बल्कि अदालत ने कहा कि FIR दर्ज कराने के लिए पहले संबंधित वैधानिक प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए। यदि उस प्रक्रिया के बाद भी उचित राहत नहीं मिलती है, तो कानून के अनुसार आगे के उपाय उपलब्ध रहेंगे।


अंतरराज्यीय पुलिस रेड पर भी दिशानिर्देश नहीं

फरहाद सूरी की याचिका में केवल FIR दर्ज कराने की मांग ही नहीं थी, बल्कि अंतरराज्यीय पुलिस छापेमारी को लेकर दिशानिर्देश जारी करने की मांग भी की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने इस वैकल्पिक प्रार्थना पर भी विचार करने से इनकार कर दिया। इस तरह अदालत ने फिलहाल इस मामले को व्यापक दिशानिर्देश जारी करने वाले मामले के रूप में आगे बढ़ाने के बजाय याचिकाकर्ता को मौजूदा वैधानिक उपायों का इस्तेमाल करने को कहा।


अभिषेक उपाध्याय को पहले ही मिल चुकी है गिरफ्तारी से राहत

गौरतलब है कि 25 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने पत्रकार अभिषेक उपाध्याय को गाजियाबाद रोड-रेज FIR के मामले में गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा दी थी। अदालत ने गाजियाबाद पुलिस को FIR की कॉपी उपलब्ध कराने और मामले से संबंधित अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया था। उपाध्याय ने आरोप लगाया था कि FIR उनके स्वतंत्र पत्रकारिता कार्य के कारण उन्हें परेशान करने के उद्देश्य से दर्ज की गई है। वहीं पुलिस की ओर से दर्ज FIR कथित रोड-रेज घटना से संबंधित है। इन आरोपों और FIR की वैधता पर अंतिम निर्णय संबंधित न्यायिक कार्यवाही में होना है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व दिल्ली मेयर फरहाद सूरी को सीधे FIR दर्ज कराने की राहत नहीं दी है, लेकिन उन्हें BNSS के तहत उपलब्ध वैधानिक उपाय अपनाने की स्वतंत्रता दे दी है। इस आदेश के बाद अब यह मामला संबंधित पुलिस और कानूनी प्रक्रिया के जरिए आगे बढ़ेगा।