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TV9 के मैनेजिंग डायरेक्टर्स को बॉम्बे HC से बड़ी राहत, मुंबई पुलिस अधिकारी मानहानि केस में जारी Process रद्द
TV9 न्यूज चैनल के मैनेजिंग डायरेक्टर्स रवि वेलिचेटी और नरसिम्हा मंगिपुड़ी को बॉम्बे हाईकोर्ट ने बड़ी राहत दी है। मुंबई पुलिस अधिकारी की ओर से दायर मानहानि मामले में मजिस्ट्रेट द्वारा जारी प्रोसेस को हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया। जस्टिस रंजितसिंह भोंसले ने कहा कि शिकायत में नए आरोपियों के नाम जोड़ने के बाद शिकायतकर्ता का दोबारा सत्यापन बयान दर्ज करना जरूरी था। साथ ही, केवल कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर होने के आधार पर बिना किसी विशिष्ट आरोप के प्रथम दृष्टया मामला नहीं बनाया जा सकता।

मुंबई।
बॉम्बे हाईकोर्ट ने TV9 न्यूज चैनल के मैनेजिंग डायरेक्टर्स रवि वेलिचेटी और नरसिम्हा मंगिपुड़ी के खिलाफ मुंबई पुलिस अधिकारी द्वारा दायर मानहानि शिकायत में जारी किए गए प्रोसेस को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि शिकायत में नए आरोपियों के नाम जोड़े जाने के बाद मजिस्ट्रेट द्वारा शिकायतकर्ता का दोबारा सत्यापन बयान दर्ज किया जाना जरूरी था। जस्टिस रंजितसिंह भोंसले ने 11 सितंबर 2026 के आदेश में यह टिप्पणी करते हुए दोनों निदेशकों के खिलाफ जारी प्रोसेस को रद्द कर दिया और मजिस्ट्रेट कोर्ट को कानून के अनुसार मामले को उस चरण से आगे बढ़ाने का निर्देश दिया, जहां शिकायतकर्ता का बयान दर्ज और सत्यापित किया जाना था।
क्या था पूरा मामला?
शिकायतकर्ता पुलिस अधिकारी राजेश सावने के अनुसार, 24 अगस्त 2013 को वह पेट्रोलिंग ड्यूटी पर थे। इस दौरान उन्होंने बस स्टॉप के पास अपने बहनोई को देखा। अधिकारी के अनुसार, जब उन्होंने उनसे सवाल किया तो वह नाराज हो गए और पहले ऊंची आवाज में बात करने लगे तथा बाद में कथित तौर पर उनके साथ मारपीट की।
इस घटना का वीडियो TV9 न्यूज चैनल पर 14 और 15 दिसंबर 2013 को ‘Mumbai Khakiwalachi Dhuli’ यानी ‘मुंबई के खाकीवाले की धुलाई’ शीर्षक के तहत प्रसारित किया गया था। पुलिस अधिकारी ने आरोप लगाया कि चैनल ने घटना की खबर पक्षपातपूर्ण तरीके से प्रसारित की और उनका नाम व प्रतिष्ठा खराब करने के इरादे से खबर चलाई। उनका कहना था कि चैनल ने यह पता लगाने की कोशिश नहीं की कि घटना के पीछे वास्तविक कारण क्या था और पूरे मामले की सच्चाई क्या थी। इसके बाद उन्होंने मजिस्ट्रेट के समक्ष मानहानि की शिकायत दाखिल की और उनका बयान भी सत्यापित किया गया।
बाद में जोड़े गए TV9 के दोनों MD के नाम
मामले में बाद में शिकायतकर्ता ने अपनी शिकायत में संशोधन के लिए आवेदन किया और TV9 के मैनेजिंग डायरेक्टर्स रवि वेलिचेटी और नरसिम्हा मंगिपुड़ी के नाम आरोपियों के रूप में जोड़ने की मांग की। मजिस्ट्रेट ने यह आवेदन स्वीकार कर लिया और 11 अप्रैल 2017 को दोनों निदेशकों के खिलाफ प्रोसेस जारी कर दिया। इसके बाद दोनों निदेशकों ने बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया और प्रोसेस जारी करने के आदेश को चुनौती दी।
नए आरोपियों के जुड़ने के बाद दोबारा सत्यापन नहीं हुआ
हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान पाया कि शिकायत में दोनों निदेशकों के नाम जोड़े जाने के बाद मजिस्ट्रेट कोर्ट ने शिकायतकर्ता का दोबारा सत्यापन बयान दर्ज नहीं किया। जस्टिस भोंसले ने कहा कि CrPC की धारा 200 के तहत शिकायतकर्ता के बयान का सत्यापन केवल औपचारिकता नहीं है। अब BNSS में इसका संबंधित प्रावधान धारा 223 है। इसका उद्देश्य शिकायत में लगाए गए आरोपों के आधार पर मामले के वास्तविक और सही तथ्यों को समझना तथा यह तय करना है कि आरोपी के खिलाफ प्रथम दृष्टया मामला बनता है या नहीं। कोर्ट ने कहा कि जब शिकायत में नए आरोपियों को जोड़ा गया, तब मजिस्ट्रेट के लिए जरूरी था कि वह शिकायतकर्ता का दोबारा बयान दर्ज करता और नए आरोपियों के खिलाफ प्रथम दृष्टया तथ्यों की जांच करता।
सिर्फ कंपनी के MD होने से कैसे बनेगा केस?
हाईकोर्ट ने यह भी महत्वपूर्ण टिप्पणी की कि शिकायत में दोनों मैनेजिंग डायरेक्टर्स के खिलाफ कोई अलग आरोप या विशिष्ट भूमिका नहीं बताई गई थी। शिकायत में केवल उनके नाम आरोपी नंबर 1 और 2 के रूप में जोड़ दिए गए थे। अदालत ने कहा कि सिर्फ इस आधार पर कि दोनों आरोपी कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर्स थे, उनके खिलाफ प्रथम दृष्टया मामला कैसे बनता है, यह समझना मुश्किल है। शिकायत में उनके खिलाफ कोई विशिष्ट averment नहीं था कि उन्होंने कथित मानहानिकारक प्रसारण में व्यक्तिगत रूप से क्या भूमिका निभाई। इसी आधार पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने दोनों मैनेजिंग डायरेक्टर्स के खिलाफ प्रोसेस जारी करने वाला मजिस्ट्रेट का आदेश रद्द कर दिया। हालांकि, मामला पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। हाईकोर्ट ने मजिस्ट्रेट कोर्ट को शिकायतकर्ता का बयान दर्ज और सत्यापित करने के चरण से कानून के अनुसार आगे की कार्यवाही करने का निर्देश दिया है। यानी कोर्ट ने शिकायत को अंतिम रूप से खारिज नहीं किया, बल्कि नए आरोपियों के खिलाफ प्रक्रिया में हुई कानूनी कमी को देखते हुए प्रोसेस का आदेश रद्द किया है।
