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नोएडा में किसानों का हल्लाबोल, 10% आबादी भूखंड और ज्यादा मुआवजा मांगा
उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर में किसानों ने जमीन अधिग्रहण से जुड़े मुद्दों को लेकर नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना विकास प्राधिकरण के कार्यालयों पर प्रदर्शन किया। किसानों ने अधिग्रहित जमीन के बदले बढ़ा हुआ मुआवजा, 10% विकसित आबादी भूखंड और लंबित रोजगार से जुड़े मामलों के समाधान की मांग उठाई। किसान संगठनों के अनुसार, हजारों भूमि मालिकों के आबादी भूखंड से जुड़े मामले अभी लंबित हैं।

नोएडा: उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर में जमीन अधिग्रहण से जुड़े मुद्दों को लेकर किसानों ने सोमवार को नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना विकास प्राधिकरण के कार्यालयों के बाहर प्रदर्शन किया। भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के नेतृत्व में किसानों ने लंबे समय से लंबित मांगों को पूरा करने की मांग उठाई। इनमें अधिग्रहित जमीन के बदले बढ़ा हुआ मुआवजा, 10 प्रतिशत विकसित आबादी भूखंड और लंबित रोजगार जैसी मांगें प्रमुख रहीं। प्रदर्शन के दौरान भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत भी किसानों के साथ मौजूद रहे। रिपोर्ट के मुताबिक करीब 200 किसान ट्रैक्टरों के साथ पहले ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण कार्यालय पहुंचे। इसके बाद किसान यमुना प्राधिकरण और फिर नोएडा प्राधिकरण कार्यालय पहुंचे। किसानों ने तीनों प्राधिकरणों से अपनी मांगों पर ठोस कार्रवाई की मांग की।
12 हजार से ज्यादा किसानों के आबादी भूखंड लंबित होने का दावा
किसान संगठन का दावा है कि तीनों प्राधिकरणों के स्तर पर 12 हजार से ज्यादा भूमि मालिकों को आबादी भूखंड मिलने का इंतजार है। इनमें करीब 2,950 मामले नोएडा प्राधिकरण, लगभग 4,000 ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण और करीब 5,100 यमुना विकास प्राधिकरण से जुड़े बताए गए हैं। किसानों का कहना है कि जमीन अधिग्रहण के बाद उनके सामने आवास और भविष्य की आजीविका से जुड़े सवाल खड़े हुए हैं। ऐसे में विकसित आबादी भूखंड का आवंटन उनके लिए केवल जमीन का मुद्दा नहीं, बल्कि पुनर्वास और भविष्य की सुरक्षा से भी जुड़ा विषय है।
10% आबादी भूखंड की मांग क्यों?
किसानों की सबसे प्रमुख मांग अधिग्रहित जमीन के अनुपात में 10% विकसित आबादी भूमि देने की है। मौजूदा व्यवस्था में अलग-अलग प्राधिकरणों के स्तर पर यह अनुपात अलग बताया गया है। रिपोर्ट के अनुसार नोएडा प्राधिकरण 5%, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण 6% और यमुना प्राधिकरण 7% के बराबर विकसित भूखंड देने की व्यवस्था से जुड़ा है। किसान तीनों क्षेत्रों में समान रूप से 10% विकसित आबादी भूखंड की मांग कर रहे हैं। इस मांग का संदर्भ 2011 के इलाहाबाद हाई कोर्ट के Gajraj Singh एवं अन्य बनाम उत्तर प्रदेश सरकार मामले से भी जुड़ा है। रिपोर्ट के अनुसार अदालत ने उस मामले में पात्र याचिकाकर्ताओं को अधिग्रहित जमीन के 10% के बराबर विकसित आबादी भूखंड देने का निर्देश दिया था, जिसकी अधिकतम सीमा 2,500 वर्ग मीटर बताई गई थी। अदालत ने पात्र किसानों के लिए 64% अतिरिक्त मुआवजे का भी निर्देश दिया था।
मुआवजा बढ़ाने की मांग भी प्रमुख मुद्दा
किसानों ने केवल आबादी भूखंड की मांग नहीं उठाई, बल्कि अधिग्रहित जमीन के लिए अतिरिक्त और बढ़े हुए मुआवजे की मांग भी की है। किसानों का कहना है कि शहरी और औद्योगिक विस्तार के लिए उनकी जमीन का इस्तेमाल होने के बाद उन्हें जमीन के मौजूदा आर्थिक मूल्य और विकास से होने वाले लाभ को ध्यान में रखते हुए पर्याप्त मुआवजा मिलना चाहिए। नोएडा-ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में भूमि अधिग्रहण का मुद्दा लंबे समय से किसानों और विकास प्राधिकरणों के बीच विवाद का विषय रहा है। पिछले दिनों भी किसान संगठनों ने भूखंड, आबादी, मुआवजा, रोजगार और गांवों के विकास से जुड़ी मांगों को लेकर पंचायत और आंदोलन की तैयारी की थी।
रोजगार और गांवों के विकास की मांग
किसानों की मांगों में अधिग्रहण से प्रभावित परिवारों के लिए रोजगार का मुद्दा भी शामिल है। किसान संगठनों का कहना है कि जमीन जाने के बाद प्रभावित परिवारों को केवल एकमुश्त मुआवजा देने के बजाय उनके दीर्घकालिक आर्थिक हितों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। इसके साथ ही किसान गांवों के विकास, बुनियादी सुविधाओं और अधिग्रहण से जुड़े लंबित मामलों के समाधान की मांग भी उठा रहे हैं। उनका कहना है कि विकास परियोजनाओं के लिए जमीन लेने के बाद संबंधित गांवों में विकास कार्यों को भी प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
टेंट लगाने की अनुमति नहीं मिलने का दावा
प्रदर्शन के दौरान किसानों ने प्राधिकरण कार्यालयों के बाहर टेंट लगाने की कोशिश की, लेकिन उन्हें इसकी अनुमति नहीं मिली। इसके बाद किसानों ने बिना टेंट के ही प्रदर्शन जारी रखने का फैसला किया। राकेश टिकैत ने किसानों से लंबी लड़ाई के लिए तैयार रहने की अपील की और कहा कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, आंदोलन जारी रखा जाएगा।
तीनों प्राधिकरणों के सामने चुनौती
नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना क्षेत्र में तेजी से हो रहे शहरी और औद्योगिक विस्तार के बीच जमीन अधिग्रहण से जुड़े पुराने मामलों का समाधान प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। एक तरफ प्राधिकरणों के सामने विकास परियोजनाओं के लिए जमीन और बुनियादी ढांचे की जरूरत है, वहीं दूसरी तरफ प्रभावित किसानों की मुआवजा, आबादी भूखंड और रोजगार जैसी मांगें हैं। मौजूदा प्रदर्शन ने एक बार फिर इस पुराने विवाद को सामने ला दिया है। किसानों का कहना है कि वे आश्वासन के बजाय लंबित मामलों पर स्पष्ट निर्णय और जमीन पर कार्रवाई चाहते हैं। अब किसानों और संबंधित प्राधिकरणों के बीच आगे होने वाली बातचीत से यह तय होगा कि इन मांगों पर कोई समाधान निकलता है या आंदोलन और आगे बढ़ता है।
