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कर्नाटक में जमीन रजिस्ट्रेशन का डिजिटल सिस्टम फेल, हाई कोर्ट ने दिया समाधान
कर्नाटक हाई कोर्ट ने Kaveri-2.0 की तकनीकी खामी को लेकर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने कहा कि डिजिटल सिस्टम की समस्या के कारण वैध संपत्ति हस्तांतरण का अधिकार नहीं रोका जा सकता। अधिकारियों को दो महीने में सिस्टम सुधारने का निर्देश दिया गया है और तब तक जरूरत पड़ने पर संबंधित दस्तावेजों के मैनुअल रजिस्ट्रेशन की अनुमति दी गई है।

बेंगलुरु: कर्नाटक में जमीन और संपत्ति के ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के लिए इस्तेमाल होने वाले Kaveri-2.0 सिस्टम में तकनीकी समस्या सामने आई है। इस खामी के कारण कुछ perpetual leasehold यानी स्थायी लीजहोल्ड जमीन पर बने फ्लैटों की बिक्री और sale deed registration प्रभावित हो रही थी। मामले में कर्नाटक हाई कोर्ट ने अधिकारियों को सिस्टम की तकनीकी समस्या दूर करने का निर्देश दिया है। हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी ऑनलाइन सॉफ्टवेयर की तकनीकी सीमा के कारण ऐसा कानूनी अधिकार नहीं रोका जा सकता, जिसे कानून के तहत मान्यता प्राप्त है। अदालत ने अधिकारियों को Kaveri-2.0 में जरूरी बदलाव करने के लिए दो महीने का समय दिया है। यदि इस अवधि में तकनीकी समस्या दूर नहीं होती है तो संबंधित sale deeds को मैनुअल तरीके से रजिस्टर करने की अनुमति दी गई है।
क्या है Kaveri-2.0?
Kaveri-2.0 कर्नाटक का डिजिटल प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन सिस्टम है। इसका इस्तेमाल संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों के पंजीकरण और संबंधित प्रक्रियाओं को ऑनलाइन करने के लिए किया जाता है। सिस्टम का उद्देश्य संपत्ति लेनदेन को अधिक डिजिटल, पारदर्शी और सुविधाजनक बनाना है। हाल के दिनों में पोर्टल की तकनीकी खामियों के कारण संपत्ति लेनदेन में रुकावट की शिकायतें सामने आई हैं।
विवाद किस बात पर था?
मामला ऐसी जमीन से जुड़ा है जो perpetual leasehold व्यवस्था के तहत दी गई थी। इस तरह की जमीन पर लीजधारक को निर्धारित शर्तों के तहत संपत्ति रखने और कुछ परिस्थितियों में उसे हस्तांतरित करने का अधिकार हो सकता है। समस्या यह थी कि Kaveri-2.0 के डिजिटल रिकॉर्ड और सिस्टम मैपिंग में ऐसे leasehold holders को संपत्ति की बिक्री के लिए जरूरी तरीके से पहचानने में तकनीकी बाधा आ रही थी। इसके चलते sale deed को ऑनलाइन प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ाना मुश्किल हो रहा था।
हाई कोर्ट ने क्या कहा?
कर्नाटक हाई कोर्ट ने कहा कि तकनीकी खामी कानूनी रूप से मान्य leasehold अधिकार के हस्तांतरण में बाधा नहीं बन सकती। यानी यदि किसी व्यक्ति को कानून और संबंधित दस्तावेजों के तहत संपत्ति हस्तांतरित करने का अधिकार प्राप्त है, तो केवल ऑनलाइन सिस्टम की कमी के कारण उस अधिकार को रोका नहीं जा सकता। अदालत ने अधिकारियों को Kaveri-2.0 में आवश्यक तकनीकी बदलाव करने और रिकॉर्ड को सही तरीके से मैप करने का निर्देश दिया है। इसके लिए दो महीने की समयसीमा तय की गई है।
समय पर सिस्टम ठीक नहीं हुआ तो मैनुअल रजिस्ट्रेशन
अदालत ने प्रभावित संपत्ति मालिकों के लिए वैकल्पिक रास्ता भी खुला रखा है। यदि तय समय के भीतर Kaveri-2.0 में समस्या का समाधान नहीं किया जाता है, तो संबंधित sale deeds को मैनुअल तरीके से पंजीकृत किया जा सकता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि डिजिटल सिस्टम की तकनीकी समस्या के कारण वैध संपत्ति लेनदेन अनिश्चित समय तक अटका न रहे।
जमीन रजिस्ट्रेशन के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?
यह मामला केवल एक सॉफ्टवेयर की तकनीकी समस्या तक सीमित नहीं है। कर्नाटक में संपत्ति पंजीकरण की प्रक्रिया तेजी से डिजिटल हो रही है। ऐसे में जमीन के रिकॉर्ड, leasehold rights और ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन सिस्टम के बीच सही तालमेल जरूरी है। यदि डिजिटल रिकॉर्ड में किसी वैध अधिकार या संपत्ति की स्थिति सही तरीके से दर्ज नहीं होती है, तो इसका सीधा असर खरीद-बिक्री और sale deed registration पर पड़ सकता है। हाई कोर्ट का आदेश इसी वजह से महत्वपूर्ण है, क्योंकि अदालत ने डिजिटल व्यवस्था को कानूनी अधिकारों के अनुरूप काम करने की जरूरत पर जोर दिया है।
आगे क्या होगा?
अब संबंधित अधिकारियों को Kaveri-2.0 में आवश्यक बदलाव कर perpetual leasehold संपत्तियों के रिकॉर्ड और ट्रांसफर प्रक्रिया को सही तरीके से सिस्टम में शामिल करना होगा। अगर दो महीने में समस्या दूर नहीं होती है तो मैनुअल रजिस्ट्रेशन का विकल्प उपलब्ध रहेगा। इस फैसले से उन संपत्ति मालिकों को राहत मिलने की उम्मीद है जिनके वैध leasehold अधिकार केवल डिजिटल सिस्टम की तकनीकी समस्या के कारण बिक्री या रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया में अटक गए थे।
