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दिल्ली के छात्रों के लिए बड़ी खुशखबरी, 10 हजार छात्रों के लिए बनेंगे नए हॉस्टल

दिल्ली सरकार राजधानी में पढ़ने वाले करीब 10 हजार छात्रों के लिए नए हॉस्टल बनाने की तैयारी कर रही है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के मुताबिक, हॉस्टल में लड़के और लड़कियां दोनों रह सकेंगे और दिल्ली के किसी भी विश्वविद्यालय या कॉलेज में पढ़ने वाले छात्रों को सुविधा देने की योजना है। सरकार ने जगहों की पहचान शुरू कर दी है और हॉस्टल की नीति तैयार की जा रही है। सुरक्षा, किफायती आवास और जरूरी सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

Neha Sharma15 सित. 2026, 05:08 PM IST
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दिल्ली के छात्रों के लिए बड़ी खुशखबरी, 10 हजार छात्रों के लिए बनेंगे नए हॉस्टल

नई दिल्ली: दिल्ली सरकार ने राजधानी में पढ़ने वाले छात्रों के लिए बड़ी हॉस्टल योजना की घोषणा की है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि सरकार करीब 10 हजार छात्रों के लिए सुरक्षित, सस्ती और जरूरी सुविधाओं से लैस हॉस्टल तैयार करने की दिशा में काम कर रही है। इन हॉस्टलों में लड़के और लड़कियां दोनों रह सकेंगे। सरकार के मुताबिक, दिल्ली की किसी भी यूनिवर्सिटी या कॉलेज में पढ़ने वाले छात्र इन हॉस्टल सुविधाओं का लाभ लेने के पात्र होंगे। परियोजना के लिए जगहों की पहचान और संबंधित विभागों के बीच विचार-विमर्श की प्रक्रिया चल रही है, जबकि हॉस्टल के संचालन और पात्रता से जुड़ी नीति तैयार की जा रही है।


सुरक्षित और किफायती आवास पर जोर

मुख्यमंत्री ने कहा है कि हॉस्टल योजना में छात्रों की सुरक्षा, किफायती आवास और जरूरी सुविधाओं को प्राथमिकता दी जाएगी। इसका उद्देश्य ऐसे छात्रों को बेहतर आवास उपलब्ध कराना है, जो पढ़ाई के लिए दिल्ली आते हैं और उन्हें महंगे निजी पीजी, किराए के कमरों या अन्य असुरक्षित आवास विकल्पों पर निर्भर रहना पड़ता है। यह घोषणा ऐसे समय हुई है जब दिल्ली में छात्रों के आवास और उनकी सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। हाल ही में सत्य निकेतन में छात्र आवास की इमारत गिरने की घटना में सात लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद छात्र हॉस्टल और पीजी की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार और प्रशासन पर भी ध्यान देने का दबाव बढ़ा है।


दिल्ली में छात्र आवास की कमी बड़ी चुनौती

राजधानी में उच्च शिक्षा के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में छात्र आते हैं। हालांकि, संस्थागत हॉस्टल की सीमित उपलब्धता के कारण बड़ी संख्या में छात्रों को निजी पीजी, किराए के कमरे या साझा आवास का सहारा लेना पड़ता है। दिल्ली विश्वविद्यालय से जुड़े आंकड़ों पर हालिया रिपोर्टों में भी हॉस्टल की कमी सामने आई है। विश्वविद्यालय से संबद्ध 77 कॉलेजों में से केवल करीब 20 कॉलेजों में हॉस्टल होने और कुल क्षमता लगभग 7 हजार बिस्तरों की होने की जानकारी सामने आई है। दिल्ली विश्वविद्यालय ने भी हॉस्टल क्षमता बढ़ाने की दिशा में कदम उठाए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, विश्वविद्यालय और उसके कॉलेजों में हॉस्टल क्षमता बढ़ाकर कुल 12,754 सीटों तक ले जाने की योजना है।


हॉस्टल के साथ पीजी व्यवस्था पर भी सख्ती

सरकार की 10 हजार छात्रों के लिए हॉस्टल बनाने की योजना के साथ-साथ राजधानी में निजी पीजी आवासों को लेकर भी नियम सख्त करने की दिशा में काम चल रहा है। प्रस्तावित व्यवस्था में पीजी संचालकों के लिए लाइसेंस, पुलिस सत्यापन और भवन की संरचनात्मक एवं अग्नि सुरक्षा से जुड़े प्रमाणपत्र जरूरी किए जाने की बात सामने आई है। इसके अलावा, छात्रों की शिकायतों और पीजी की स्थिति की निगरानी के लिए केंद्रीकृत डिजिटल व्यवस्था बनाने का प्रस्ताव भी सामने आया है। इसका उद्देश्य छात्रों को सुरक्षित आवास उपलब्ध कराने के साथ-साथ असुरक्षित या नियमों का पालन नहीं करने वाले आवासों पर निगरानी बढ़ाना है।


योजना से हजारों छात्रों को राहत की उम्मीद

सरकार की प्रस्तावित हॉस्टल योजना से दिल्ली में पढ़ने वाले हजारों छात्रों को सस्ती और अपेक्षाकृत सुरक्षित आवास सुविधा मिलने की उम्मीद है। खासतौर पर दूसरे राज्यों और शहरों से आने वाले छात्रों के लिए यह योजना महत्वपूर्ण हो सकती है। फिलहाल सरकार हॉस्टल की जगह, डिजाइन, संचालन, पात्रता और शुल्क से जुड़ी विस्तृत नीति तैयार करने की प्रक्रिया में है। इन बिंदुओं के स्पष्ट होने के बाद योजना का वास्तविक स्वरूप सामने आएगा। सरकार का जोर फिलहाल ऐसी छात्र आवास व्यवस्था तैयार करने पर है, जिसमें सुरक्षा के साथ किफायती और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।