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महाराष्ट्र का बड़ा Land Reform, Digital Land Bank हुआ लॉन्च

मुंबई: महाराष्ट्र सरकार ने सरकारी जमीन के प्रबंधन और आवंटन में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए Digital Land Bank शुरू किया है। इसमें सरकारी जमीन के भूखंड, उनके आवंटन और उपलब्ध जमीन की जानकारी को डिजिटल रूप से दर्ज किया जाएगा। सिस्टम को जमीन के मौजूदा रिकॉर्ड और मौके पर सत्यापन से जोड़ने की योजना है।

Neha Sharma16 सित. 2026, 01:18 PM IST
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महाराष्ट्र का बड़ा Land Reform, Digital Land Bank हुआ लॉन्च

मुंबई: महाराष्ट्र सरकार ने सरकारी जमीन के प्रबंधन और आवंटन में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए Digital Land Bank प्रणाली शुरू की है। यह व्यवस्था सरकारी जमीन के उपलब्ध भूखंडों, मौजूदा आवंटन और भविष्य में आवंटन के लिए उपलब्ध जमीन का एकीकृत डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करेगी। यह पहल हाल में सामने आए मुंढवा जमीन विवाद के बाद सरकारी जमीन के प्रबंधन में तकनीक और निगरानी मजबूत करने की दिशा में उठाया गया कदम है।


एक प्लेटफॉर्म पर मिलेगी सरकारी जमीन की जानकारी

Digital Land Bank में जिला कलेक्टरों के पास मौजूद सरकारी जमीन, अलग-अलग सरकारी विभागों और निगमों को आवंटित भूखंड तथा भविष्य की परियोजनाओं के लिए उपलब्ध जमीन की जानकारी दर्ज की जाएगी। इसका उद्देश्य किसी भी सरकारी विभाग या एजेंसी को जमीन आवंटित करने से पहले उस भूखंड की स्थिति, क्षेत्रफल, सर्वे नंबर और मौजूदा इस्तेमाल की जानकारी स्पष्ट रूप से उपलब्ध कराना है।


e-Ferfar से जोड़ा गया सिस्टम

नई व्यवस्था को महाराष्ट्र के e-Ferfar प्लेटफॉर्म से जोड़ा गया है। इसके जरिए जमीन के सर्वे नंबर, क्षेत्रफल और अन्य रिकॉर्ड डिजिटल रूप से उपलब्ध होंगे। जमीन की डिजिटल जानकारी को मौके पर किए गए भौतिक सत्यापन से भी मिलाया जाएगा। राजस्व विभाग के अधिकारियों के अनुसार, सरकारी जमीन की वास्तविक स्थिति की जांच के लिए Ground Truthing की व्यवस्था की गई है। इसमें गांव स्तर के राजस्व अधिकारी जमीन का मौके पर निरीक्षण करेंगे और इसके बाद तहसीलदार स्तर पर जानकारी का सत्यापन किया जाएगा।


सरकारी विभाग ऑनलाइन कर सकेंगे जमीन की मांग

Digital Land Bank के जरिए सरकारी विभाग, सरकारी निगम और स्वायत्त संस्थाएं अपनी परियोजनाओं के लिए जमीन की मांग ऑनलाइन दर्ज कर सकेंगी। इसके लिए Sub-Divisional Officers (SDO) को नोडल अधिकारी बनाया गया है। जमीन की मांग मिलने के बाद फील्ड निरीक्षण, तहसील स्तर पर सत्यापन और डिजिटल प्रक्रिया के जरिए आगे की कार्रवाई की जाएगी। इससे जमीन आवंटन की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाने का प्रयास किया गया है।


भविष्य के आवंटन और पर्यावरणीय जरूरतों में भी मदद

सरकार की इस व्यवस्था में केवल मौजूदा सरकारी जमीन का रिकॉर्ड ही नहीं रखा जाएगा, बल्कि भविष्य में परियोजनाओं के लिए उपलब्ध भूखंडों की भी पहचान की जाएगी। इसके अलावा Compensatory Afforestation यानी परियोजनाओं के कारण होने वाले वन नुकसान की भरपाई के लिए जरूरी जमीन की पहचान में भी डिजिटल डेटाबेस का इस्तेमाल किया जा सकेगा।


जमीन विवादों पर निगरानी मजबूत करने की कोशिश

Digital Land Bank का एक प्रमुख उद्देश्य सरकारी जमीन से जुड़े रिकॉर्ड को एक जगह लाकर पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना है। इससे जमीन के आवंटन, उपयोग में बदलाव और अन्य महत्वपूर्ण गतिविधियों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जा सकेगा।


हालांकि, इस व्यवस्था की प्रभावशीलता इस बात पर निर्भर करेगी कि जमीन के रिकॉर्ड कितनी नियमितता से अपडेट किए जाते हैं और मौके पर होने वाले सत्यापन को कितनी मजबूती से लागू किया जाता है। महाराष्ट्र सरकार पहले से ही जमीन के रिकॉर्ड को डिजिटल बनाने के लिए Mahabhumi और डिजिटल 7/12 जैसी सेवाएं चला रही है। राज्य के आधिकारिक भूमि अभिलेख पोर्टल के अनुसार, डिजिटल 7/12, 8A और प्रॉपर्टी कार्ड जैसी सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध हैं।