law-order
Goondas Act को उत्पीड़न का हथियार न बनाएं अफसर, अवैध आदेश पर देना होगा हर्जाना; इलाहाबाद HC सख्त
उत्तर प्रदेश में Goondas Act के इस्तेमाल पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि सिर्फ दो आपराधिक मामलों के आधार पर किसी व्यक्ति को ‘Goonda’ नहीं माना जा सकता और अधिकारियों के मनमाने आदेश पर दंडात्मक हर्जाना लगाया जा सकता है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को ₹50,000 हर्जाना भी दिया।

उत्तर प्रदेश में Goondas Act के इस्तेमाल को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि अधिकारियों को कानून के तहत मिली शक्तियों का मनमाने और अवैध तरीके से इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। हाईकोर्ट ने कहा कि यदि नौकरशाही इसी तरह मनमाने आदेश जारी करती रही तो संबंधित अधिकारियों पर दंडात्मक हर्जाना लगाया जा सकता है। जस्टिस संदीप जैन की एकल पीठ ने यह टिप्पणी अभिषेक त्यागी की याचिका पर सुनवाई करते हुए की। त्यागी ने अपने खिलाफ उत्तर प्रदेश नियंत्रण गुंडा अधिनियम, 1970 (UP Control of Goondas Act) के तहत शुरू की गई कार्रवाई को चुनौती दी थी। कोर्ट ने उनकी याचिका मंजूर करते हुए गाजियाबाद के अपर पुलिस आयुक्त और मेरठ मंडल के आयुक्त द्वारा पारित आदेशों को रद्द कर दिया।
सिर्फ दो मामलों के आधार पर ‘Goonda’ बताना गलत
मामले के अनुसार, त्यागी के खिलाफ दो आपराधिक मामलों के आधार पर Goondas Act के तहत कार्रवाई शुरू की गई थी। गाजियाबाद के अपर पुलिस आयुक्त ने 18 सितंबर 2025 के आदेश के जरिए उन्हें अपने स्थायी पते पर रहने और छह महीने तक हर महीने के दूसरे और चौथे शनिवार को संबंधित पुलिस थाने में हाजिरी लगाने का निर्देश दिया था। त्यागी ने इस आदेश के खिलाफ अपील की, लेकिन मेरठ मंडल के आयुक्त ने 10 दिसंबर 2025 को उनकी अपील खारिज कर दी। इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट का रुख किया। याचिकाकर्ता की दलील थी कि केवल दो आपराधिक मामलों के आधार पर उन्हें ‘Goonda’ नहीं माना जा सकता। वहीं, राज्य सरकार की ओर से दलील दी गई कि दोनों मामले यह दिखाने के लिए पर्याप्त हैं कि त्यागी आदतन अपराध करने वाले व्यक्ति हैं और उनके खिलाफ Goondas Act के तहत कार्रवाई उचित थी।
‘Habitually’ का मतलब लगातार और बार-बार अपराध
हाईकोर्ट ने Goondas Act के तहत ‘habitually’ यानी ‘आदतन’ शब्द के अर्थ को लेकर अपने पहले के कई फैसलों का हवाला दिया। कोर्ट ने कहा कि किसी व्यक्ति को आदतन अपराधी मानने के लिए उसके खिलाफ बार-बार और लगातार समान प्रकृति के कृत्यों का सिलसिला होना जरूरी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अलग-अलग और असंबंधित घटनाओं के आधार पर किसी व्यक्ति के खिलाफ यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि वह आदतन अपराध करता है। हाईकोर्ट ने हाल के एक फैसले का भी उल्लेख किया, जिसमें कहा गया था कि केवल एक या दो घटनाएं किसी व्यक्ति को कानून के तहत आदतन अपराधी मानने के लिए पर्याप्त नहीं हैं।
अधिकारियों को हर्जाने की चेतावनी
अदालत ने कहा कि उसने अब तक Goondas Act के तहत मनमाने आदेश पारित करने वाले अधिकारियों पर हर्जाना लगाने से परहेज किया है, लेकिन अब नौकरशाही को स्पष्ट संदेश देने का समय आ गया है। कोर्ट ने चेतावनी दी कि यदि अधिकारी कानून में मिली शक्तियों का अवैध और मनमाना इस्तेमाल जारी रखते हैं तो उन्हें दंडात्मक हर्जाने का सामना करना पड़ सकता है। हाईकोर्ट ने त्यागी को ₹50,000 का हर्जाना देने का आदेश दिया। साथ ही कोर्ट ने राज्य सरकार को संबंधित अधिकारियों के वेतन से इस राशि की वसूली करने की स्वतंत्रता भी दी। इस फैसले के जरिए हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि Goondas Act के तहत कार्रवाई करते समय केवल आपराधिक मामलों की संख्या पर्याप्त नहीं है। किसी व्यक्ति को ‘आदतन अपराधी’ बताने के लिए कानून में निर्धारित मानकों और न्यायिक फैसलों का पालन करना जरूरी है।
