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RBI की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा, निजी कंपनियों की बिक्री 19.4% बढ़ी
मुंबई: भारतीय रिजर्व बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में सूचीबद्ध निजी गैर-वित्तीय कंपनियों की बिक्री वृद्धि बढ़कर 19.4% हो गई। मैन्युफैक्चरिंग, आईटी और गैर-आईटी सेवा क्षेत्रों में भी मजबूत प्रदर्शन दर्ज किया गया।

मुंबई: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही यानी अप्रैल-जून 2026 के दौरान निजी गैर-वित्तीय कंपनियों के प्रदर्शन के आंकड़े जारी किए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक सूचीबद्ध निजी कंपनियों की बिक्री वृद्धि 19.4 प्रतिशत रही, जो पिछली तिमाही के 13.9 प्रतिशत से काफी अधिक है। RBI ने यह आंकड़े 3,247 सूचीबद्ध गैर-सरकारी गैर-वित्तीय कंपनियों के तिमाही वित्तीय परिणामों के आधार पर जारी किए हैं। आंकड़ों से संकेत मिलता है कि वित्त वर्ष की शुरुआत में निजी कॉरपोरेट क्षेत्र की कारोबारी गतिविधियों में मजबूती आई है।
विनिर्माण क्षेत्र ने इस वृद्धि में अहम भूमिका निभाई। 1,827 सूचीबद्ध निजी विनिर्माण कंपनियों की बिक्री में सालाना आधार पर 21.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि पिछली तिमाही में यह 14.5 प्रतिशत थी। ऑटोमोबाइल, पेट्रोलियम और इलेक्ट्रिकल मशीनरी उद्योगों का प्रदर्शन बेहतर रहा। आईटी कंपनियों की बिक्री वृद्धि भी बढ़ी। इस क्षेत्र में बिक्री सालाना आधार पर 14.8 प्रतिशत बढ़ी, जबकि पिछली तिमाही में वृद्धि 9.9 प्रतिशत थी। गैर-आईटी सेवा कंपनियों की बिक्री में 19.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जिसमें व्यापार क्षेत्र का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
कंपनियों के मुनाफे में भी सुधार देखने को मिला। विनिर्माण कंपनियों के परिचालन लाभ में 21.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई। आईटी कंपनियों के परिचालन लाभ में 19.9 प्रतिशत और गैर-आईटी सेवा कंपनियों में 12.7 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। हालांकि कंपनियों की लागत पर दबाव भी बना हुआ है। विनिर्माण कंपनियों के कच्चे माल पर खर्च में सालाना आधार पर 27.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इसके बावजूद बिक्री के मुकाबले कच्चे माल की लागत का अनुपात पिछली तिमाही के मुकाबले थोड़ा कम रहा।
RBI के आंकड़ों से कुल मिलाकर संकेत मिलता है कि अप्रैल-जून तिमाही में भारत के निजी कॉरपोरेट क्षेत्र की बिक्री और परिचालन लाभ दोनों में सुधार हुआ है। हालांकि कच्चे माल की लागत और वैश्विक सप्लाई चेन से जुड़े जोखिम कंपनियों के लिए अभी भी चुनौती बने हुए हैं।
