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“पहली शादी से अनजान दूसरी पत्नी पर नहीं चलेगा बायगेमी और क्रूरता का केस: मद्रास HC”
मद्रास हाईकोर्ट ने कहा कि अगर दूसरी पत्नी को पति की पहली शादी के बारे में जानकारी नहीं थी, तो उसे बायगेमी (Bigamy) के मामले में आरोपी नहीं बनाया जा सकता। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसी स्थिति में दूसरी पत्नी के खिलाफ पति के रिश्तेदार के तौर पर क्रूरता का मामला भी नहीं चलाया जा सकता।

मद्रास हाई कोर्ट ने दूसरी शादी और क्रूरता से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि यदि किसी महिला को शादी के समय अपने पति की पहली शादी के बारे में जानकारी नहीं थी, तो उसे केवल दूसरी पत्नी होने के आधार पर बिगैमी का आरोपी नहीं बनाया जा सकता। अदालत ने यह भी कहा कि ऐसी महिला पति की ‘Relative’ की कानूनी परिभाषा में नहीं आती, इसलिए उसके खिलाफ BNS की धारा 85 के तहत क्रूरता का मामला भी नहीं चलाया जा सकता। जस्टिस एन. रमेश ने एक महिला की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। महिला के खिलाफ All Women Police Station में BNS की धाराओं 82, 85, 49, 296(b) और 351(2) के तहत मामला दर्ज किया गया था। शिकायत पति की पहली पत्नी की ओर से की गई थी।
पहली शादी की जानकारी छिपाने का आरोप
याचिकाकर्ता महिला का कहना था कि शादी के समय उसे इस बात की जानकारी नहीं थी कि उसका पति पहले से विवाहित है। उसके अनुसार पति ने अपनी पहली शादी की जानकारी उससे छिपाई थी। इसलिए वह किसी अपराध में जानबूझकर शामिल नहीं थी, बल्कि स्वयं भी पति के धोखे का शिकार हुई थी। अदालत ने कहा कि BNS की धारा 82 के तहत बिगैमी का अपराध उस व्यक्ति पर लागू होता है, जो अपने जीवनसाथी के जीवित रहते हुए दूसरी शादी करता है। कानून में ऐसी स्थिति में पूर्व विवाह को छिपाने पर अतिरिक्त सजा का भी प्रावधान है।
दूसरी पत्नी को बिगैमी का आरोपी नहीं बनाया जा सकता
हाई कोर्ट ने धारा 82 के प्रावधानों की भाषा पर गौर करते हुए कहा कि अपराध का मुख्य आरोपी वह व्यक्ति है, जिसकी पहले से शादी कायम है और वह दूसरी शादी करता है। यदि कोई अविवाहित महिला यह जानते बिना ऐसे व्यक्ति से शादी करती है कि उसकी पहले से शादी हो चुकी है, तो केवल इस आधार पर वह धारा 82 के तहत अपराधी नहीं बन जाती। अदालत ने कहा कि मौजूदा मामले में महिला ने स्पष्ट रूप से दावा किया है कि उसे पति की पहली शादी के बारे में जानकारी नहीं थी। इस स्थिति में उसे BNS की धारा 82(1) के तहत आरोपी नहीं माना जा सकता।
धारा 85 के तहत भी नहीं चलेगा क्रूरता का केस
अदालत ने BNS की धारा 85 पर भी महत्वपूर्ण टिप्पणी की। यह प्रावधान किसी महिला के पति या पति के ‘Relative’ द्वारा की गई क्रूरता से संबंधित है। कोर्ट ने कहा कि ‘Relative of husband’ की श्रेणी में वे व्यक्ति आते हैं, जो पति से रक्त संबंध, विवाह या गोद लेने के माध्यम से जुड़े हों। दूसरी पत्नी इस कानूनी परिभाषा में नहीं आती। हाई कोर्ट ने कहा कि जब दूसरी पत्नी को पति की पहली शादी की जानकारी ही नहीं थी, तो वह भी उसी व्यक्ति के धोखे का शिकार हुई। ऐसे में उसे पति के रिश्तेदार के रूप में मानकर BNS की धारा 85 के तहत क्रूरता के मामले में आरोपी नहीं बनाया जा सकता।
2017 के फैसले का भी संदर्भ
मद्रास हाई कोर्ट ने इस मुद्दे पर कलकत्ता हाई कोर्ट के Sagari Hembram बनाम State of West Bengal मामले के 2024 के फैसले का भी उल्लेख किया। उस मामले में भी दूसरी पत्नी के खिलाफ IPC की धारा 498A और बिगैमी सहित अन्य धाराओं की कार्यवाही को रद्द किया गया था। मद्रास हाई कोर्ट ने कहा कि उस फैसले में अपनाया गया सिद्धांत BNS की धारा 85 पर भी समान रूप से लागू होता है।
अग्रिम जमानत देने के पक्ष में कोर्ट
अदालत ने माना कि महिला के खिलाफ धारा 82(1) के तहत अपराध का मामला नहीं बनता। धारा 82(2) के संबंध में महिला का यह दावा कि उसे पहली शादी की जानकारी नहीं थी, जांच का विषय हो सकता है। हालांकि, इस आधार पर उसकी हिरासत में पूछताछ आवश्यक नहीं है। इन परिस्थितियों को देखते हुए हाई कोर्ट ने महिला को अग्रिम जमानत देने के लिए मामला उपयुक्त पाया। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल इस वजह से कि कोई महिला ऐसे पुरुष से दूसरी शादी करती है जिसकी पहली शादी कायम है, उसे स्वतः बिगैमी या पति की क्रूरता से संबंधित अपराध में आरोपी नहीं बनाया जा सकता, खासकर तब जब उसे पहली शादी की जानकारी ही न हो।
