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15 साल पुराने भायंदर जमीन विवाद में नया मोड़

भायंदर ईस्ट के नवघर इलाके की करीब 2,810 वर्ग मीटर जमीन से जुड़े 15 साल पुराने विवाद में नया घटनाक्रम सामने आया है। बीजेपी विधायक नरेंद्र मेहता ने विवादित जमीन का कब्जा छोड़ने और उससे जुड़ी निर्माण अनुमति सरेंडर करने की बात कही है। जमीन के स्वामित्व को लेकर असगर अली वोरा और दूसरे पक्ष के दावे अलग-अलग हैं।

Neha Sharma17 सित. 2026, 03:57 PM IST
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15 साल पुराने भायंदर जमीन विवाद में नया मोड़

भायंदर: महाराष्ट्र के मीरा-भायंदर इलाके में करीब 15 साल पुराने जमीन विवाद में नया मोड़ आया है। 81 वर्षीय असगर अली वोरा की ओर से विवादित जमीन पर कब्जे का आरोप लगाए जाने के बाद बीजेपी विधायक नरेंद्र मेहता ने विवादित भूखंड का कब्जा छोड़ने और उस पर मिली निर्माण अनुमति वापस करने की बात कही है। दोनों पक्षों के बीच समझौते की बात भी सामने आई है।


मामला भायंदर ईस्ट के नवघर इलाके की करीब 2,810 वर्ग मीटर जमीन से जुड़ा है। असगर अली वोरा का कहना है कि उन्होंने यह जमीन वर्ष 1989 में खरीदी थी और इसे कभी बेचा या ट्रांसफर नहीं किया। उनके अनुसार, वर्ष 2011 में जमीन से जुड़े दस्तावेजों और कब्जे को लेकर विवाद शुरू हुआ। उन्होंने इस मामले को लेकर लंबे समय तक विभिन्न सरकारी विभागों के सामने शिकायतें कीं।


8 सितंबर को प्रधानमंत्री से मिले थे असगर अली वोरा

असगर अली वोरा ने 8 सितंबर 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर भायंदर की जमीन से जुड़े विवाद को उनके सामने रखा था। वोरा और प्रधानमंत्री मोदी ने गुजरात के वडनगर स्थित बीएन स्कूल में साथ पढ़ाई की थी। वोरा ने प्रधानमंत्री से मामले में हस्तक्षेप और जांच की मांग की थी।


वोरा का आरोप है कि 2011 में उनकी जमीन से जुड़े दस्तावेजों में कथित गड़बड़ी हुई और जमीन के कुछ हिस्सों पर बिल्डर कंपनियों का कब्जा दिखाया गया। उन्होंने इस मामले में जांच की मांग भी की है। ये आरोप संबंधित पक्षों के दावों और चल रही कानूनी-प्रशासनिक प्रक्रिया के अधीन हैं।


मंत्रालय में हुई बैठक

प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद राज्य स्तर पर मामले को लेकर अधिकारियों की बैठक हुई। रिपोर्टों के अनुसार, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्रीकर परदेशी की अध्यक्षता में मंत्रालय में हुई बैठक में असगर अली वोरा, नरेंद्र मेहता, मीरा-भायंदर नगर निगम के आयुक्त राधा विनोद शर्मा और टाउन प्लानर पुरुषोत्तम शिंदे मौजूद थे। बैठक के दौरान नरेंद्र मेहता ने टाउन प्लानिंग विभाग को पत्र देकर विवादित जमीन का कब्जा छोड़ने और प्लॉट के लिए मिली निर्माण अनुमति सरेंडर करने की बात कही। एक अलग पत्र में उन्होंने वोरा के खिलाफ पहले की गई पुलिस शिकायत वापस लेने की भी जानकारी दी।

 

जमीन खरीद को लेकर मेहता का दावा

रिपोर्टों के अनुसार, नरेंद्र मेहता ने अपने पत्र में कहा कि विवादित जमीन उन्होंने 2019 में मर्विन फर्नांडिस से खरीदी थी। दूसरी ओर, असगर अली वोरा का दावा है कि उन्होंने यह जमीन पहले ही 1989 में खरीदी थी और इसे कभी बेचा नहीं। इसी अलग-अलग दावे के कारण जमीन का स्वामित्व विवाद लंबे समय तक बना रहा।


निर्माण अनुमति भी लौटाने की बात

विवादित जमीन पर निर्माण को लेकर भी मामला सामने आया था। रिपोर्टों के मुताबिक, मेहता से जुड़ी Seven Eleven Constructions को जमीन पर निर्माण से संबंधित अनुमति मिली थी। अब मेहता ने उस निर्माण अनुमति को वापस करने की बात कही है। हालांकि, जमीन के स्वामित्व और पुराने दस्तावेजों से जुड़े सभी कानूनी पहलुओं को केवल इस घोषणा के आधार पर अंतिम रूप से निपटा हुआ मानना उचित नहीं होगा। उपलब्ध रिपोर्टों में प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रिया के आगे जारी रहने की जानकारी भी सामने आई है।

 

15 साल पुराने विवाद में नया घटनाक्रम

असगर अली वोरा लंबे समय से इस जमीन को लेकर शिकायतें करते रहे हैं। अब विवादित जमीन का कब्जा छोड़ने, निर्माण अनुमति वापस करने और पुलिस शिकायत वापस लेने की घोषणा के बाद मामले में नया घटनाक्रम सामने आया है। आगे जमीन के रिकॉर्ड, निर्माण अनुमति और संबंधित प्रशासनिक कार्रवाई के आधार पर विवाद की स्थिति स्पष्ट होगी।