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174 एकड़ सरकारी जमीन पर उठे सवाल, कल्याण के 6 गांवों में SIT जांच शुरू

कल्याण तहसील के छह गांवों में करीब 174 एकड़ 22 गुंठा सरकारी चरागाह जमीन से जुड़े मामले की जांच के लिए विशेष जांच टीम (SIT) बनाई गई है। टीम जमीन के पुराने रिकॉर्ड, 7/12 में हुए बदलाव और बाद में हुए जमीन से जुड़े लेन-देन की पड़ताल करेगी। SIT को 30 दिनों में अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपनी है।

Neha Sharma17 सित. 2026, 03:58 PM IST
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174 एकड़ सरकारी जमीन पर उठे सवाल, कल्याण के 6 गांवों में SIT जांच शुरू

कल्याण: महाराष्ट्र सरकार ने कल्याण तहसील के छह गांवों में करीब 174 एकड़ 22 गुंठा सरकारी चरागाह की जमीन से जुड़े मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल यानी SIT गठित किया है। चरागाह की जमीन यानी ऐसी सरकारी जमीन जिसे गांव के पशुओं के चरने और सामुदायिक इस्तेमाल के लिए रखा जाता है। इस मामले में जमीन के रिकॉर्ड में बदलाव और बाद में हुए जमीन से जुड़े लेन-देन की जांच की जाएगी।


जांच के दायरे में मांगांव, कोले, काटई, घरिवली, सांडप और उसरघर गांव शामिल हैं। SIT यह पता लगाएगी कि इन गांवों की सरकारी जमीन के रिकॉर्ड में नाम और जमीन की श्रेणी में बदलाव किस आधार पर किए गए और क्या पूरी प्रक्रिया सरकारी नियमों के अनुसार हुई थी। जांच के दौरान 7/12 जमीन रिकॉर्ड, पुराने सरकारी दस्तावेज, जमीन के इस्तेमाल में हुए बदलाव और जमीन से जुड़े आदेशों की जांच की जाएगी। इसके अलावा जमीन को सरकारी नियमों के तहत एक श्रेणी से दूसरी श्रेणी में बदलने की प्रक्रिया भी देखी जाएगी।


छह गांवों की जमीन जांच के दायरे में

मांगांव में सर्वे नंबर 71, 75 और 76 की करीब 21 एकड़ 5 गुंठा जमीन जांच में शामिल है। कोले गांव में सर्वे नंबर 76/2 और 77 की करीब 33 एकड़ 24 गुंठा जमीन की जांच होगी। काटई में सर्वे नंबर 99 की करीब 4 एकड़ 30 गुंठा और घरिवली में सर्वे नंबर 43, 42/1, 46 और 55 की करीब 27 एकड़ 16 गुंठा जमीन जांच के दायरे में है। सांडप और उसरघर की संबंधित जमीन के रिकॉर्ड भी SIT देखेगी।


जमीन के रिकॉर्ड में बदलाव की जांच

SIT यह जांच करेगी कि संबंधित जमीन के 7/12 रिकॉर्ड में नाम या दूसरी जानकारी कब और किस आधार पर बदली गई। इसके साथ तहसीलदार और उपविभागीय अधिकारियों की ओर से जमीन से जुड़े मामलों में जारी किए गए आदेशों की भी जांच होगी। जांच में यह भी देखा जाएगा कि जमीन की सरकारी श्रेणी में बदलाव नियमों के अनुसार किया गया था या नहीं। जमीन से जुड़े सरकारी भुगतान और अन्य देनदारियों का भी रिकॉर्ड देखा जाएगा।


डेवलपर्स और अन्य संस्थाओं से जुड़े लेन-देन की जांच

सरकार ने जमीन से जुड़े बाद के लेन-देन की भी जांच के निर्देश दिए हैं। SIT यह देखेगी कि संबंधित जमीन का इस्तेमाल या हस्तांतरण बाद में डेवलपर्स या अन्य संस्थाओं के साथ किस तरह हुआ और इसके लिए जरूरी सरकारी अनुमति ली गई थी या नहीं। जांच में यह भी देखा जाएगा कि जमीन से जुड़े सभी लेन-देन महाराष्ट्र के जमीन संबंधी कानूनों और सरकारी नियमों के मुताबिक हुए थे या नहीं।


SIT में कई बड़े अधिकारी शामिल

SIT की अध्यक्षता कोंकण संभागीय आयुक्त करेंगे। समिति में ठाणे जिलाधिकारी, कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका आयुक्त, ठाणे जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी, MMRDA के प्रतिनिधि, भूमि रिकॉर्ड विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और पंजीयन विभाग के अधिकारी शामिल हैं। ठाणे के अतिरिक्त जिलाधिकारी को समिति का सदस्य सचिव बनाया गया है।


30 दिन में सरकार को देनी होगी रिपोर्ट

सरकार ने SIT को संबंधित जमीन के सभी रिकॉर्ड और दस्तावेजों की जांच कर 30 दिन के भीतर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि जमीन के रिकॉर्ड और उससे जुड़े बदलाव नियमों के अनुसार किए गए थे या नहीं। यदि जांच में नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो संबंधित लोगों या अधिकारियों के खिलाफ आगे की कार्रवाई की सिफारिश की जा सकती है। फिलहाल यह मामला जांच के स्तर पर है और SIT की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट होगी।