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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर कथित आपत्तिजनक ईमेल भेजने के मामले में ढाई साल से जेल में बंद व्यक्ति को इलाहाबाद हाईकोर्ट से जमानत

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी वाला ईमेल भेजने के मामले में करीब ढाई साल से जेल में बंद मुबारक अली को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। जस्टिस कृष्ण पहल की पीठ ने मामले में जमानत मंजूर करते हुए मुकदमे की धीमी प्रगति और लंबी हिरासत को भी ध्यान में रखा।

Sonali17 सित. 2026, 03:58 PM IST
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर कथित आपत्तिजनक ईमेल भेजने के मामले में ढाई साल से जेल में बंद व्यक्ति को इलाहाबाद हाईकोर्ट से जमानत

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी वाला ईमेल भेजने के मामले में करीब ढाई साल से जेल में बंद मुबारक अली को जमानत दे दी है। जस्टिस कृष्ण पहल की पीठ ने जमानत याचिका मंजूर करते हुए मामले में चल रहे मुकदमे की धीमी गति को भी ध्यान में रखा। मुबारक अली के खिलाफ वर्ष 2024 में भारतीय दंड संहिता की धाराओं 153ए, 295ए, 505(2), 504, 419, 420, 467, 468, 471 और 120-बी के साथ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66 के तहत मामला दर्ज किया गया था। आरोप था कि उसने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के बारे में कथित आपत्तिजनक टिप्पणी वाला ईमेल भेजा था।

पुलिस मामले को लेकर क्या आरोप है?

अभियोजन के अनुसार, मुबारक अली ने पुलिस शिकायतकर्ता जन्नतुनिशा से जुड़े एक मामले को निपटाने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी वाला ईमेल भेजा था। आरोपी की ओर से इन आरोपों से इनकार करते हुए कहा गया कि उसे मामले में झूठा फंसाया गया है।

बचाव पक्ष ने अदालत को बताया कि आरोपी की आपराधिक पृष्ठभूमि में केवल एक अन्य मामला है। यह भी दलील दी गई कि मुबारक अली 20 मार्च 2024 से जेल में बंद है और मुकदमे की सुनवाई बेहद धीमी गति से आगे बढ़ रही है।

ढाई साल से जेल में, गवाहों की सुनवाई धीमी

जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पहले मुकदमे की वर्तमान स्थिति की रिपोर्ट भी तलब की थी। अदालत के समक्ष पेश स्थिति के अनुसार, 23 जुलाई 2026 तक मामले में केवल चार गवाहों के बयान दर्ज किए जा सके थे। वहीं, आरोपपत्र में कुल 26 गवाहों के शेष होने की जानकारी सामने आई। इस तरह मुकदमे में अभी बड़ी संख्या में गवाहों की गवाही और अन्य न्यायिक प्रक्रिया बाकी है। आरोपी की ओर से इसी आधार पर अदालत से जमानत देने का अनुरोध किया गया। बचाव पक्ष ने कहा कि आरोपी लंबे समय से जेल में है, जबकि मुकदमे के जल्द समाप्त होने की संभावना नहीं दिख रही है।

राज्य ने जमानत का किया विरोध

उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से जमानत याचिका का विरोध किया गया। राज्य ने मामले की गंभीरता और आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों का हवाला देते हुए जमानत नहीं देने का अनुरोध किया। हालांकि, हाईकोर्ट ने मामले की परिस्थितियों, आरोपी की हिरासत की अवधि और मुकदमे की प्रगति को ध्यान में रखते हुए जमानत याचिका स्वीकार कर ली। अदालत का यह आदेश मुकदमे के अंतिम परिणाम पर कोई निष्कर्ष नहीं है। जमानत दिए जाने का अर्थ यह नहीं है कि आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोप गलत साबित हो गए हैं। मामले में आरोपों की सत्यता का अंतिम निर्धारण ट्रायल कोर्ट में साक्ष्यों और सुनवाई के आधार पर किया जाएगा।