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महाराष्ट्र में जमीन के रिकॉर्ड होंगे ज्यादा पक्के, दिसंबर तक नया कानून!

महाराष्ट्र सरकार दिसंबर 2026 तक Land Titling Act लाने की तैयारी कर रही है। प्रस्तावित कानून के जरिए जमीन और संपत्ति के मालिकाना हक का रिकॉर्ड ज्यादा स्पष्ट और व्यवस्थित करने पर जोर है। डिजिटल रिकॉर्ड, प्रॉपर्टी कार्ड और फ्लैट मालिकों के जमीन में हिस्से को दर्ज करने जैसी व्यवस्थाएं भी प्रस्तावित हैं।

Neha Sharma17 सित. 2026, 03:58 PM IST
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महाराष्ट्र में जमीन के रिकॉर्ड होंगे ज्यादा पक्के, दिसंबर तक नया कानून!

मुंबई: महाराष्ट्र सरकार दिसंबर 2026 तक नया Land Titling Act यानी जमीन के मालिकाना हक को स्पष्ट करने वाला कानून लाने की तैयारी कर रही है। सरकार का उद्देश्य जमीन के स्वामित्व को लेकर होने वाले विवादों को कम करना और जमीन के रिकॉर्ड को अधिक व्यवस्थित और भरोसेमंद बनाना है। प्रस्तावित व्यवस्था में जमीन के मालिकाना हक से जुड़े रिकॉर्ड को सरकार की ओर से नियमित रूप से अपडेट और व्यवस्थित रखने पर जोर दिया जाएगा।


अभी जमीन के मालिकाना हक की स्थिति क्या है?

महाराष्ट्र में जमीन से जुड़े रिकॉर्ड में 7/12 उतारा, प्रॉपर्टी कार्ड और दूसरे राजस्व दस्तावेज महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। लेकिन मौजूदा व्यवस्था में इन रिकॉर्ड को अक्सर जमीन के मालिकाना हक का प्रमाण माना जाता है, जबकि किसी संपत्ति पर अंतिम अधिकार को लेकर विवाद होने पर मामला अदालत तक पहुंच सकता है। प्रस्तावित Land Titling व्यवस्था में सरकार जमीन के मालिकाना हक का अधिक निश्चित रिकॉर्ड तैयार करने की दिशा में काम करेगी। इसका उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि किसी जमीन या संपत्ति का दर्ज मालिक कौन है और उससे जुड़े अधिकार क्या हैं।


जमीन के मालिकाना हक का रिकॉर्ड होगा ज्यादा स्पष्ट

नई व्यवस्था के तहत संपत्ति से जुड़ी जानकारी को एक व्यवस्थित रिकॉर्ड में रखने की योजना है। रिपोर्ट के मुताबिक इसमें संपत्ति का स्थान, मालिकाना हक, माप और मूल्य जैसी जानकारी शामिल की जा सकती है। इसके साथ ही प्रॉपर्टी कार्ड में QR Code जैसी तकनीक के इस्तेमाल की भी योजना बताई गई है। इससे जमीन और संपत्ति से जुड़े रिकॉर्ड को डिजिटल तरीके से देखने और सत्यापित करने की प्रक्रिया आसान बनाने का प्रयास होगा।


फ्लैट मालिकों के लिए भी महत्वपूर्ण बदलाव

प्रस्तावित व्यवस्था में केवल जमीन ही नहीं, बल्कि इमारतों और फ्लैट से जुड़े मालिकाना हक को भी रिकॉर्ड में स्पष्ट करने पर जोर है। रिपोर्ट के अनुसार Vertical Property Card की व्यवस्था के जरिए किसी इमारत में अलग-अलग फ्लैट मालिकों के जमीन में हिस्से को भी दर्ज करने की योजना है। इससे फ्लैट खरीदने वाले व्यक्ति के जमीन में हिस्से से जुड़े रिकॉर्ड को स्पष्ट करने में मदद मिल सकती है।


जमीन विवाद कम करने पर जोर

महाराष्ट्र में जमीन के मालिकाना हक, रिकॉर्ड में बदलाव, सीमा और पुराने दस्तावेजों को लेकर विवाद लंबे समय तक चल सकते हैं। ऐसे मामलों में राजस्व रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों की जांच महत्वपूर्ण हो जाती है। सरकार का प्रस्तावित कानून इसी तरह के विवादों को कम करने के उद्देश्य से जमीन के मालिकाना हक का अधिक निश्चित रिकॉर्ड तैयार करने की दिशा में कदम है। सरकार का लक्ष्य जमीन से जुड़े मुकदमों को काफी कम करना बताया गया है।


डिजिटल रिकॉर्ड और जमीन की माप पर भी जोर

Land Titling व्यवस्था को जमीन के रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण और सर्वे से भी जोड़ा जा रहा है। जमीन की सही माप, स्थान और मालिकाना हक से जुड़ी जानकारी को एक साथ व्यवस्थित करने से भविष्य में संपत्ति के लेन-देन और रिकॉर्ड की जांच में आसानी हो सकती है। इससे जमीन खरीदने-बेचने वालों, मकान और फ्लैट मालिकों तथा सरकारी विभागों के लिए रिकॉर्ड की जांच अधिक व्यवस्थित होने की उम्मीद है।


अभी कानून लागू नहीं हुआ है

महत्वपूर्ण बात यह है कि Land Titling Act अभी लागू कानून नहीं है। सरकार दिसंबर 2026 तक इसे लाने की तैयारी कर रही है। इसलिए प्रस्तावित व्यवस्था के अंतिम नियम, प्रक्रिया और नागरिकों पर लागू होने वाली सभी शर्तें कानून आने के बाद ही पूरी तरह स्पष्ट होंगी। अगर यह कानून लागू होता है, तो महाराष्ट्र में जमीन के मालिकाना हक और रिकॉर्ड व्यवस्था में बड़ा बदलाव हो सकता है। खासकर जमीन विवाद, प्रॉपर्टी रिकॉर्ड, फ्लैट मालिकों के अधिकार और डिजिटल भूमि रिकॉर्ड के क्षेत्र में इसका असर देखने को मिल सकता है।