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पूर्व कैबिनेट मंत्री की हैसियत आय का सबूत नहीं, मुआवजे के लिए कमाई साबित करनी होगी: इलाहाबाद HC

पूर्व कैबिनेट मंत्री की सड़क दुर्घटना में मौत के मुआवजा मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि सामाजिक या राजनीतिक हैसियत आय का प्रमाण नहीं हो सकती। अदालत ने स्पष्ट किया कि मुआवजे के लिए आय रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्यों से साबित करनी होगी।

Sonali17 सित. 2026, 03:59 PM IST
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पूर्व कैबिनेट मंत्री की हैसियत आय का सबूत नहीं, मुआवजे के लिए कमाई साबित करनी होगी: इलाहाबाद HC

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मोटर दुर्घटना मुआवजे के एक मामले में महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि मृतक की सामाजिक या पेशेवर हैसियत के आधार पर उसकी आय तय नहीं की जा सकती। अदालत ने स्पष्ट किया कि मुआवजे की गणना के लिए आय को रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्यों से साबित करना जरूरी है। केवल इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल किया जाना अपने आप में उसमें दर्ज आय को निर्णायक रूप से साबित नहीं करता।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला नंद लाल सिंह पटेल की सड़क दुर्घटना में मौत से जुड़ा है। 15 मई 1999 को इलाहाबाद-रायबरेली रोड पर मलाकिया गांव के पास वह जिस टाटा सूमो में यात्रा कर रहे थे, उसे एक ट्रक ने टक्कर मार दी थी। दुर्घटना में उनकी मौके पर ही मौत हो गई। मृतक की उम्र करीब 48 वर्ष थी और वह वकालत करते थे। वह एक राजनीतिक दल से जुड़े थे और उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री भी रह चुके थे। मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण ने उनकी सालाना आय 90,000 रुपये मानते हुए मुआवजे की गणना की थी। अधिकरण ने व्यक्तिगत खर्च के लिए एक-तिहाई राशि घटाई और 13 का गुणक लागू करते हुए कुल 7,84,500 रुपये का मुआवजा निर्धारित किया था। इसमें अंतिम संस्कार के लिए 2,000 रुपये और संपत्ति के नुकसान के लिए 2,500 रुपये भी शामिल थे।

परिजनों ने ज्यादा मुआवजे की मांग की

मृतक के परिजनों ने हाईकोर्ट में अपील करते हुए कहा कि उनकी वास्तविक आय अधिक थी। उनका दावा था कि इनकम टैक्स रिटर्न में सालाना आय 1.60 लाख रुपये दिखाई गई थी, लेकिन इसे सही तरीके से स्वीकार नहीं किया गया। परिजनों ने भविष्य की संभावनाओं के लिए अतिरिक्त राशि, आश्रितों की संख्या को देखते हुए व्यक्तिगत खर्च में कम कटौती और अन्य मदों में भी अधिक मुआवजे की मांग की। बीमा कंपनी ने इसका विरोध करते हुए कहा कि दावा की गई आय और इनकम टैक्स रिटर्न को पर्याप्त साक्ष्य के जरिए साबित नहीं किया गया था।

हाईकोर्ट ने क्या कहा?

जस्टिस अनिल कुमार-X ने कहा कि किसी व्यक्ति की सामाजिक या पेशेवर प्रतिष्ठा को उसकी आय का प्रमाण नहीं माना जा सकता। अदालत ने कहा कि केवल इस आधार पर आय नहीं मानी जा सकती कि मृतक वकील था, राजनीतिक दल से जुड़ा था या पूर्व कैबिनेट मंत्री रह चुका था।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि इनकम टैक्स रिटर्न निश्चित रूप से प्रासंगिक साक्ष्य है, लेकिन उसे अन्य साक्ष्यों के समर्थन के बिना हर मामले में आय का निर्णायक प्रमाण नहीं माना जा सकता। हाईकोर्ट ने कहा कि मोटर दुर्घटना मुआवजा मामलों में भी साक्ष्यों के मूल्यांकन के सामान्य सिद्धांतों को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अनुमान को प्रमाण का स्थान नहीं दिया जा सकता।

भविष्य की आय पर भी अदालत की टिप्पणी

अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के प्रनय सेठी फैसले का हवाला देते हुए कहा कि भविष्य की संभावनाओं के लिए अतिरिक्त राशि उसी आय पर लागू होती है जो पहले साक्ष्यों के आधार पर निर्धारित की गई हो। यदि मूल आय ही पर्याप्त रूप से साबित नहीं हुई है, तो भविष्य की संभावनाओं के आधार पर उस आय को बढ़ाया नहीं जा सकता। हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि वर्ष 1999 की दुर्घटना होने के कारण अधिकरण ने उस समय लागू दूसरी अनुसूची के आधार पर गणना की थी। बाद में आए सरला वर्मा के सिद्धांतों के आधार पर इस पुराने मामले की गणना को केवल इसी आधार पर दोबारा नहीं खोला जा सकता। अदालत ने अंततः माना कि मुआवजा इतना कम नहीं था कि उसमें हस्तक्षेप या अतिरिक्त वृद्धि की आवश्यकता हो। इस तरह परिजनों की मुआवजा बढ़ाने की मांग स्वीकार नहीं की गई।