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लद्दाख में जमीन का रिकॉर्ड होगा साफ, GPS और सैटेलाइट से होगी मैपिंग
लद्दाख के चांगथांग क्षेत्र में सरकारी, निजी, सामुदायिक और चराई वाली जमीन की गांव-वार मैपिंग की जाएगी। प्रशासन GPS, GIS और सैटेलाइट तकनीक की मदद से जमीन की सीमाएं और वास्तविक स्थिति दर्ज करेगा। साथ ही स्थानीय लोगों के जमीन और पारंपरिक इस्तेमाल से जुड़े दावों की भी जांच की जाएगी।

लद्दाख: चांगथांग हाई-एल्टीट्यूड कोल्ड डेजर्ट वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी में जमीन और स्थानीय लोगों के अधिकारों को लेकर प्रशासन ने एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया फिर शुरू की है। इसके तहत गांव-वार जमीन का पूरा रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा और निजी, सामुदायिक, सरकारी तथा चराई वाली जमीन की अलग-अलग पहचान और मैपिंग की जाएगी।
यह प्रक्रिया लद्दाख के वन, पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी विभाग के निर्देश के बाद शुरू हुई है। प्रशासन का उद्देश्य जमीन से जुड़े पुराने अधिकारों और स्थानीय लोगों के पारंपरिक इस्तेमाल को रिकॉर्ड में दर्ज करना है, साथ ही वन्यजीव संरक्षण और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े क्षेत्रों को भी स्पष्ट रूप से चिन्हित करना है।
गांव-वार तैयार होगा जमीन का रिकॉर्ड
प्रशासन ने न्योमा, दुरबुक, चुमाथांग और अनले तहसीलों के तहसीलदारों को संबंधित विभागों के साथ मिलकर गांव-वार जमीन का रिकॉर्ड तैयार करने का निर्देश दिया है। इस रिकॉर्ड में यह दर्ज किया जाएगा कि कौन-सी जमीन निजी है, कौन-सी सरकारी है, कौन-सी सामुदायिक इस्तेमाल में है और किन क्षेत्रों का इस्तेमाल पारंपरिक रूप से पशुओं की चराई के लिए होता रहा है। इसके लिए राजस्व, वन्यजीव, वन, पशुपालन और भेड़ पालन विभाग मिलकर काम करेंगे।
GPS और सैटेलाइट से होगी जमीन की पहचान
जमीन की सही स्थिति और सीमाओं को दर्ज करने के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। प्रशासन ने GPS, GIS मैपिंग यानी डिजिटल नक्शे के जरिए जमीन की स्थिति दर्ज करना, जियो-रेफरेंसिंग और सैटेलाइट तस्वीरों के इस्तेमाल के निर्देश दिए हैं। मौके पर जाकर जमीन की वास्तविक स्थिति का भी सत्यापन किया जाएगा।
इसके साथ वन्यजीव विभाग महत्वपूर्ण प्राकृतिक क्षेत्रों और वन्यजीवों के आने-जाने वाले रास्तों की भी वैज्ञानिक मैपिंग करेगा।
स्थानीय लोगों से मांगे जाएंगे जमीन से जुड़े दावे
प्रशासन गांवों और दूरदराज की बस्तियों में सार्वजनिक सूचना जारी करेगा। इसके जरिए स्थानीय लोगों और समुदायों को जमीन के मालिकाना हक, पारंपरिक इस्तेमाल और चराई के अधिकार से जुड़े अपने दावे प्रस्तुत करने का मौका दिया जाएगा। दावों की जांच के बाद संबंधित लोगों को अपना पक्ष रखने का अवसर भी दिया जाएगा। अंतिम निर्णय जारी करने से पहले प्रशासन संबंधित रिकॉर्ड और उपलब्ध सबूतों की जांच करेगा।
रक्षा और रणनीतिक क्षेत्रों की भी होगी मैपिंग
चांगथांग क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने सैन्य प्रतिष्ठानों और रणनीतिक महत्व वाले क्षेत्रों की भी स्थान आधारित मैपिंग और मौके पर जांच के निर्देश दिए हैं। यह काम पुलिस और रक्षा अधिकारियों के समन्वय से किया जाएगा और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े नियमों का पालन किया जाएगा।
नई अवैध कब्जेदारी को मान्यता नहीं
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इस प्रक्रिया का उद्देश्य पुराने जमीन अधिकारों और दावों की जांच करना है। इससे बाद में किए गए किसी नए अवैध कब्जे या बिना अनुमति निर्माण को वैधता नहीं मिलेगी।
हर 15 दिन में देनी होगी प्रगति रिपोर्ट
अधिकारियों को इस प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। संबंधित फील्ड अधिकारियों को हर 15 दिन में प्रगति रिपोर्ट देने को कहा गया है, ताकि जमीन के दावों और रिकॉर्ड की जांच में अनावश्यक देरी न हो।
लद्दाख प्रशासन की यह प्रक्रिया इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि चांगथांग क्षेत्र में पारंपरिक चराई, स्थानीय बस्तियां, सरकारी जमीन, प्राकृतिक क्षेत्र और रणनीतिक प्रतिष्ठान एक ही व्यापक क्षेत्र में मौजूद हैं। अब गांव-वार मैपिंग और रिकॉर्ड की जांच के जरिए इन जमीनों की स्थिति और स्थानीय अधिकारों को अधिक स्पष्ट रूप से दर्ज करने की कोशिश की जा रही है।
