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मां पर धर्म परिवर्तन का आरोप, पिता ने लगाई हाईकोर्ट में गुहार; 7 साल के बेटे और 4 साल की बेटी को 25 सितंबर को पेश करने का आदेश
मां पर बच्चों का धर्म परिवर्तन कराने की योजना का आरोप लगाते हुए पिता ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हाईकोर्ट ने 7 साल के बेटे और 4 साल की बेटी को 25 सितंबर को अदालत के सामने पेश करने का आदेश दिया है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दो नाबालिग बच्चों की कस्टडी से जुड़े मामले में राज्य और निजी पक्षकारों को दोनों बच्चों को अदालत के समक्ष पेश करने का निर्देश दिया है। बच्चों के पिता ने आरोप लगाया है कि अलग रह रही उनकी पत्नी इस्लाम धर्म अपनाने और दोनों बच्चों का भी धर्म परिवर्तन कराने की योजना बना रही है। हालांकि, हाईकोर्ट ने फिलहाल इन आरोपों की सत्यता पर कोई निष्कर्ष नहीं दिया है। अदालत ने मामले को 25 सितंबर 2026 को अगली सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है। मामला दो नाबालिग बच्चों से जुड़ा है, जिनमें एक 7 साल का बेटा और 4 साल की बेटी है। बच्चों के पिता अर्पित अग्रवाल ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दाखिल कर दावा किया कि दोनों बच्चे वर्तमान में उनकी अलग रह रही पत्नी पुलकिता अग्रवाल के पास हैं।
पिता ने क्या आरोप लगाए?
याचिका में पिता की ओर से अदालत को बताया गया कि उनकी पत्नी कथित तौर पर एक मुस्लिम व्यक्ति के संपर्क में हैं और वह इस्लाम धर्म अपनाने की इच्छा रखती हैं। याचिकाकर्ता का यह भी आरोप है कि उनकी पत्नी दोनों नाबालिग बच्चों का भी धर्म परिवर्तन कराने की योजना बना रही हैं। पिता ने यह भी आरोप लगाया कि इस संबंध में पुलिस को शिकायत करने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। रिकॉर्ड के अनुसार, उन्होंने जनवरी 2026 में लखनऊ के एक पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी। इसमें भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 115(2) और 352 के साथ उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम, 2021 की धारा 3 और 5(1) के तहत आरोप लगाए गए थे। याचिकाकर्ता ने अदालत को यह भी बताया कि बच्चों की मां को उनके माता-पिता और भाई का समर्थन प्राप्त है। इन लोगों को भी मामले में पक्षकार बनाया गया है।
हाईकोर्ट ने क्या आदेश दिया?
जस्टिस संदीप जैन की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया। अदालत ने राज्य और निजी प्रतिवादियों को निर्देश दिया कि दोनों बच्चों को 25 सितंबर 2026 को अदालत के सामने पेश किया जाए। हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि निर्धारित तारीख पर बच्चों को अदालत के सामने पेश नहीं किया जाता है, तो संबंधित अधिकारियों को व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करना होगा। हलफनामे में उन्हें यह बताना होगा कि बच्चों को पेश करने के लिए उन्होंने क्या प्रयास किए और बच्चे अदालत के सामने क्यों पेश नहीं किए जा सके।
आरोपों की अभी जांच बाकी
इस मामले में यह महत्वपूर्ण है कि हाईकोर्ट ने फिलहाल पिता की ओर से लगाए गए धर्म परिवर्तन संबंधी आरोपों को सही नहीं माना है। अदालत का मौजूदा आदेश मुख्य रूप से बच्चों को अदालत के सामने प्रस्तुत करने और मामले की आगे सुनवाई से संबंधित है। अब 25 सितंबर की सुनवाई में बच्चों की अदालत के सामने पेशी के बाद मामले में आगे की स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है। अदालत के समक्ष बच्चों की कस्टडी और उनके हित से जुड़े पहलुओं पर भी आगे विचार हो सकता है। मामले को हाईकोर्ट ने 25 सितंबर 2026 को नए मामले के रूप में सूचीबद्ध किया है।
