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गोरखपुर में बिश्नोई गैंग के कथित असलहा नेटवर्क का खुलासा, 31 आरोपी नामजद

गोरखपुर में उत्तर प्रदेश STF की कार्रवाई के बाद कथित अंतरराज्यीय अवैध हथियार नेटवर्क की जांच का दायरा बढ़ गया है। STF ने पांच संदिग्धों को गिरफ्तार किया है, जबकि जांच में कुल 31 आरोपियों के नाम सामने आने की बात कही गई है। इनमें 26 आरोपी अभी फरार बताए जा रहे हैं। पुलिस के अनुसार, नेटवर्क के तार पूर्वी उत्तर प्रदेश से लेकर मध्य प्रदेश, हरियाणा और अन्य राज्यों तक जुड़े होने की जांच की जा रही है। एजेंसी ने पिछले कुछ वर्षों में करीब 100 से 150 अवैध पिस्टल की सप्लाई किए जाने का दावा किया है। बिश्नोई गैंग से कथित संपर्क और सोशल मीडिया के इस्तेमाल के एंगल की भी जांच चल रही है।

sd17 सित. 2026, 04:10 PM IST
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गोरखपुर में बिश्नोई गैंग के कथित असलहा नेटवर्क का खुलासा, 31 आरोपी नामजद

पांच गिरफ्तारियों के बाद खुली नेटवर्क की परतें

        गोरखपुर में STF की कार्रवाई के बाद सामने आए इस मामले में पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के मुताबिक इनके पास से अवैध हथियार और कारतूस बरामद किए गए हैं। पूछताछ के बाद जांच एजेंसी ने नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान करने का दावा किया है। STF के अनुसार, इस मामले में कुल 31 लोगों को आरोपी बनाया गया है। इनमें पांच गिरफ्तार हो चुके हैं, जबकि 26 अन्य की तलाश जारी है। जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन लोगों के बीच हथियारों की सप्लाई, स्थानीय खरीदारों और दूसरे राज्यों में मौजूद कथित सप्लायरों के बीच किस तरह संपर्क था। पुलिस का दावा है कि पिछले करीब तीन वर्षों में इस नेटवर्क के जरिए पूर्वी उत्तर प्रदेश में 100 से 150 अवैध पिस्टल पहुंचाई गईं। हालांकि यह आंकड़ा फिलहाल जांच एजेंसी के दावे पर आधारित है और इसकी पूरी पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

शशांक पांडेय को अहम कड़ी मान रही STF

पूरे मामले में पश्चिमी चंपारण, बिहार के रहने वाले शशांक पांडेय की तलाश STF के लिए अहम हो गई है। पुलिस के मुताबिक शशांक गोरखपुर के सिंघड़िया इलाके में किराये के कमरे में रहता था और स्थानीय स्तर पर अवैध हथियारों से जुड़े लोगों के संपर्क में था। STF का आरोप है कि शशांक ने स्थानीय लोगों को लॉरेंस बिश्नोई और अनमोल बिश्नोई से जुड़े कथित नेटवर्क से जोड़ने में भूमिका निभाई। पुलिस के अनुसार, गोरखपुर और आसपास के जिलों में इस नेटवर्क को बढ़ाने में भी उसकी भूमिका की जांच की जा रही है। शशांक का नाम इससे पहले भी आपराधिक जांच में सामने आ चुका है। पुलिस के मुताबिक पंजाब में हथियारों की सप्लाई से जुड़े एक मामले में वह जेल जा चुका है। वर्तमान मामले में गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर STF ने उसके कथित संपर्क गोल्डी बराड़ और रोहित गोदारा से होने की जानकारी मिलने का दावा किया है। हालांकि इन संपर्कों की प्रकृति और इस पूरे नेटवर्क में शशांक की वास्तविक भूमिका अभी जांच का विषय है।

श्रेयांश यादव से पुराने संबंध की भी जांच

STF की जांच में गिरफ्तार आरोपी श्रेयांश यादव और शशांक पांडेय के पुराने संबंधों की बात सामने आई है। पुलिस के अनुसार, शशांक ने कथित तौर पर श्रेयांश को हथियारों की तस्करी से जुड़े नेटवर्क से जोड़ा और उसे इस गतिविधि में आगे बढ़ाया। जांच एजेंसी श्रेयांश को मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र तक फैले कथित हथियार नेटवर्क से जोड़कर देख रही है। पुलिस के मुताबिक श्रेयांश पहले भी मध्य प्रदेश के बड़वानी और मुंबई में हथियारों की तस्करी से जुड़े मामलों में जेल जा चुका है। महाराष्ट्र में उसके पास से साथियों के साथ सात पिस्टल और 21 कारतूस बरामद किए जाने की जानकारी भी जांच में सामने आई है। अब STF यह पता लगाने में जुटी है कि महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में उसके कथित संपर्क गोरखपुर के नेटवर्क से किस तरह जुड़े थे।

मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, हरियाणा और राजस्थान तक जांच

मामले की जांच अब गोरखपुर और पूर्वांचल तक सीमित नहीं है। STF दूसरे राज्यों में मौजूद संभावित संपर्कों की भी पड़ताल कर रही है। रिपोर्टों में मध्य प्रदेश के बड़वानी, हरियाणा के सोनीपत और महाराष्ट्र के कुछ इलाकों का उल्लेख सामने आया है। जांच एजेंसी का फोकस हथियारों के कथित स्रोत से लेकर उन्हें पूर्वांचल में पहुंचाने वाले लोगों और स्थानीय खरीदारों तक पूरी कड़ी को समझने पर है। पुलिस करीब 10 से अधिक अन्य संदिग्धों की तलाश की बात भी कह रही है। वहीं मामले में कुल आरोपियों की संख्या को लेकर अलग-अलग रिपोर्टों में अलग आंकड़े सामने आए हैं, इसलिए जांच पूरी होने तक आधिकारिक सूची और भूमिका की पुष्टि महत्वपूर्ण होगी।

पहले बरामद हथियारों से भी जोड़ रही STF

STF अब उन अवैध हथियारों की भी जांच कर रही है जो पहले अलग-अलग मामलों में बरामद किए जा चुके हैं। पुलिस के मुताबिक गोरखपुर के कैंपियरगंज और संतकबीरनगर के खलीलाबाद में बरामद पिस्टलों के स्रोत की जांच में भी इसी नेटवर्क का एंगल सामने आया है। कैंपियरगंज के एक आर्म्स एक्ट मामले में महाराजगंज के फरेंदा फुलवरिया निवासी सिद्धार्थ के पास से बरामद पिस्टल को STF इसी नेटवर्क से जुड़ा हुआ मानकर जांच कर रही है। इसी तरह खलीलाबाद मामले में संतकबीरनगर के मेंहदावल निवासी चंद्रप्रकाश सिंह, सहजनवां के बघौरा निवासी ऋतिक सिंह और कुशीनगर के रामकोला निवासी अनुराग सिंह के पास से बरामद दो पिस्टलों के स्रोत की भी जांच की जा रही है। इन मामलों को जोड़कर STF यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या अलग-अलग जिलों में बरामद हथियारों के पीछे एक ही सप्लाई नेटवर्क था।

सोशल मीडिया के जरिए खरीदारों तक पहुंचने का दावा

जांच में सोशल मीडिया के इस्तेमाल का एंगल भी सामने आया है। STF के मुताबिक कथित नेटवर्क से जुड़े लोग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से संभावित खरीदारों तक पहुंचने की कोशिश करते थे। गिरफ्तार आरोपियों के मोबाइल फोन और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कितने लोगों से संपर्क किया गया और इन संपर्कों का अवैध हथियारों की सप्लाई से क्या संबंध था।

क्या वास्तव में बिश्नोई गैंग का संगठित नेटवर्क था?

इस पूरे मामले का सबसे बड़ा सवाल यही है कि गोरखपुर में सामने आया नेटवर्क वास्तव में बिश्नोई गैंग से जुड़ा संगठित नेटवर्क था या अपराधियों ने उसके नाम और प्रभाव का इस्तेमाल स्थानीय स्तर पर किया। फिलहाल पुलिस के पास आरोपियों के कथित संपर्क, हथियारों की बरामदगी और अलग-अलग मामलों के बीच संभावित संबंध को लेकर कई जांच बिंदु हैं। लेकिन इन कड़ियों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही हो सकेगी। STF यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित तौर पर दूसरे राज्यों से आने वाले हथियार गोरखपुर तक कैसे पहुंचते थे, स्थानीय स्तर पर किन लोगों से संपर्क किया जाता था और इन हथियारों का इस्तेमाल किन आपराधिक मामलों में हुआ।

आरोपियों पर किन धाराओं में मामला?

गोरखपुर STF इकाई के प्रभारी सत्यप्रकाश सिंह के मुताबिक गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ शस्त्र अधिनियम समेत आपराधिक साजिश, उकसावे और हथियारों की तस्करी से संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ, डिजिटल साक्ष्यों और पहले दर्ज आपराधिक मामलों को आपस में जोड़कर जांच आगे बढ़ा रही है।

जांच के सामने कई बड़े सवाल

इस मामले में अब जांच के केंद्र में कई सवाल हैं—क्या कथित तौर पर सप्लाई की गई 100 से 150 पिस्टलों की संख्या की पुष्टि हो पाएगी? दूसरे राज्यों में मौजूद कथित सप्लायर और गोरखपुर के लोगों के बीच क्या संबंध था? सोशल मीडिया के जरिए कितने लोगों से संपर्क किया गया? पहले बरामद हथियारों का इस नेटवर्क से कितना सीधा संबंध है? और सबसे अहम, बिश्नोई गैंग से बताए जा रहे संपर्कों का वास्तविक स्वरूप क्या था? इन सवालों के जवाब मिलने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि गोरखपुर में सामने आया मामला स्थानीय स्तर के अवैध हथियार कारोबार तक सीमित था या इसके पीछे किसी बड़े आपराधिक नेटवर्क की संगठित गतिविधि थी। फिलहाल STF की कार्रवाई पांच गिरफ्तारियों से आगे बढ़ चुकी है और जांच का दायरा कई राज्यों तक पहुंच गया है। फरार आरोपियों की गिरफ्तारी और डिजिटल व वित्तीय साक्ष्यों की जांच से इस पूरे नेटवर्क की वास्तविक तस्वीर सामने आने की उम्मीद है।

नोट: बिश्नोई गैंग से कथित संबंध, हथियारों की सप्लाई और आरोपियों की भूमिकाएं फिलहाल पुलिस/STF की जांच और दावों पर आधारित हैं। अदालत में आरोप सिद्ध होना बाकी है।