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राइड के लिए ज्यादा पैसे देने का दबाव? रैपिडो पर CCPA ने लगाया ₹10 लाख जुर्माना
रैपिडो के ऐप पर राइड बुक करते समय ग्राहकों को ज्यादा पैसे देने पर राइड मिलने की संभावना बढ़ने जैसे संदेश दिखाने पर केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने कंपनी पर ₹10 लाख का जुर्माना लगाया है। CCPA ने इसे ‘डार्क पैटर्न’ मानते हुए कहा कि ऐप का डिजाइन ग्राहक को ज्यादा भुगतान करने की तरफ धकेल रहा था। अथॉरिटी ने राइड शुरू होने से पहले टिप मांगने और किराया बढ़ाने वाले विकल्पों पर भी आपत्ति जताई है।

रैपिडो पर कार्रवाई क्यों हुई?
CCPA ने देश में कैब और बाइक-टैक्सी कंपनियों की बुकिंग प्रक्रिया की जांच की थी। इसमें रैपिडो के ऐप पर ऐसे संदेश पाए गए, जो राइड बुक होने के दौरान ग्राहक को ज्यादा पैसे देने के लिए प्रेरित करते थे। उदाहरण के तौर पर ऐप पर यह बताया जाता था कि ज्यादा कीमत देने पर राइड मिलने की संभावना ज्यादा है। कुछ मामलों में ग्राहक को यह संदेश भी दिखाया गया कि ड्राइवर मौजूदा किराया स्वीकार नहीं कर रहे हैं और ₹10, ₹20 या ₹30 और जोड़ने की कोशिश करें। CCPA के मुताबिक इससे ग्राहक के मन में यह धारणा बन सकती थी कि अगर वह ज्यादा पैसे नहीं देगा तो उसे जल्दी राइड नहीं मिलेगी या उसकी बुकिंग छूट सकती है। खासकर उस समय जब ग्राहक पहले ही राइड बुक कर चुका होता है और उसे वाहन मिलने का इंतजार रहता है।
इसे ‘डार्क पैटर्न’ क्यों माना गया?
CCPA ने इस तरीके को ‘कन्फर्म शेमिंग’ (Confirm Shaming) नाम के डार्क पैटर्न से जोड़ा। आसान भाषा में इसका मतलब है कि ऐप का संदेश या तरीका ग्राहक पर ऐसा दबाव बनाए कि वह अपनी इच्छा के बजाय डर या जल्दबाजी में कोई अतिरिक्त भुगतान कर दे। अथॉरिटी के अनुसार राइड बुक करने के बाद ज्यादा पैसे देने का विकल्प दिखाने से ग्राहक को लग सकता था कि अतिरिक्त रकम दिए बिना राइड मिलना मुश्किल है। CCPA ने इसे 2023 की डार्क पैटर्न गाइडलाइंस के तहत अनुचित तरीका माना।
‘Set Your Price’ फीचर में भी मिली गड़बड़ी
CCPA ने रैपिडो के ‘Set Your Price’ स्लाइडर की भी जांच की। अथॉरिटी के मुताबिक इसमें किराया बढ़ाने और घटाने के विकल्पों को एक समान तरीके से पेश नहीं किया गया था। किराया बढ़ाने पर हरे रंग में ‘Higher chance of getting a ride’ जैसा संदेश दिखाई देता था। वहीं किराया कम करने पर लाल या नारंगी रंग की चेतावनी दिखाई जाती थी। CCPA ने यह भी कहा कि स्लाइडर में किराया बढ़ाने के लिए ज्यादा जगह थी, जबकि कम करने का विकल्प अपेक्षाकृत सीमित था। अथॉरिटी ने इसे ‘Interface Interference’ यानी ऐसा डिजाइन माना, जिसमें ऐप का इंटरफेस ही ग्राहक के फैसले को एक खास दिशा में प्रभावित करता है।
राइड शुरू होने से पहले टिप मांगने पर भी सवाल
CCPA ने राइड शुरू होने से पहले अतिरिक्त रकम को ‘टिप’ के तौर पर लेने के तरीके पर भी सवाल उठाया। अथॉरिटी के अनुसार बुकिंग के समय दिखाया जाने वाला किराया पहले से ही दूरी, समय, ट्रैफिक, टोल और ड्राइवर को मिलने वाली रकम जैसे कारकों को ध्यान में रखता है। ऐसे में राइड शुरू होने से पहले उसी यात्रा के लिए अतिरिक्त रकम को ‘टिप’ के रूप में मांगना उचित नहीं माना गया। CCPA ने 2025 के Motor Vehicle Aggregator Guidelines का हवाला देते हुए कहा कि टिप स्वैच्छिक होनी चाहिए और इसे सेवा मिलने की शर्त नहीं बनाया जाना चाहिए।
रैपिडो ने अपनी सफाई में क्या कहा?
रैपिडो की ओर से CCPA के सामने कहा गया कि ऐप पर टिप देना ग्राहक की इच्छा पर निर्भर करता है। कंपनी ने यह भी तर्क दिया कि ग्राहक अतिरिक्त रकम दे या नहीं दे, उसका मैचिंग सिस्टम उसी तरह काम करता है। कंपनी ने इन संदेशों को ड्राइवर और यात्री के बीच होने वाली सामान्य बातचीत या मोलभाव जैसा भी बताया। हालांकि CCPA ने इन तर्कों को स्वीकार नहीं किया। अथॉरिटी ने कहा कि कंपनी यह साबित करने वाला डेटा नहीं दे सकी कि अतिरिक्त पैसे देने से वास्तव में राइड मिलने की संभावना बढ़ती है।
Uber और Ola पर भी नजर
रैपिडो के खिलाफ यह कार्रवाई अकेली नहीं है। CCPA ने कैब और बाइक-टैक्सी कंपनियों की ऐसी प्रथाओं की व्यापक जांच शुरू की है। Uber और Ola से जुड़े मामलों की जांच अभी जारी है। CCPA ने पहले कई एग्रीगेटर कंपनियों को डार्क पैटर्न से जुड़े नियमों का पालन करने और अपनी प्रक्रियाओं के बारे में जानकारी देने को कहा था।
ग्राहकों के लिए इसका मतलब क्या है?
सीधी बात यह है कि राइड पाने के लिए ग्राहक पर अतिरिक्त रकम देने का दबाव नहीं होना चाहिए। CCPA की कार्रवाई का मुख्य मुद्दा यह है कि ऐप का डिजाइन और संदेश ग्राहक को यह महसूस न कराएं कि ज्यादा पैसे दिए बिना राइड मिलने की संभावना कम है।
CCPA ने रैपिडो को ऐसे भ्रामक प्रॉम्प्ट और डिजाइन को बंद करने का निर्देश दिया है। कंपनी को आदेश के अनुपालन की रिपोर्ट भी जमा करनी होगी।
