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2019 के सड़क हादसे में घायल युवक को ₹20.17 लाख मुआवजा, ठाणे MACT ने 9% ब्याज के साथ राशि देने का आदेश
2019 के सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हुए 28 वर्षीय युवक को ठाणे MACT ने बड़ी राहत दी है। अधिकरण ने वाहन मालिक और बीमा कंपनी को संयुक्त रूप से ₹20.17 लाख मुआवजा देने का आदेश दिया है। राशि पर याचिका की तारीख से 9% वार्षिक ब्याज भी देना होगा।

ठाणे में 2019 के सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हुए युवक को मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (MACT) ने ₹20.17 लाख का मुआवजा देने का आदेश दिया है। ठाणे MACT के सदस्य आर. वी. मोहिते ने 16 सितंबर 2026 को दिए फैसले में वाहन मालिक और यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी को संयुक्त रूप से मुआवजा देने के लिए उत्तरदायी ठहराया। अधिकरण ने मुआवजे की राशि पर याचिका दायर करने की तारीख से जमा होने तक 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने का भी आदेश दिया। मामला 4 दिसंबर 2019 का है। याचिकाकर्ता राहुल दत्तात्रेय थोंबरे उस समय 28 वर्ष के थे और सर्कॉन ड्रग्स एंड फार्मास्यूटिकल्स प्राइवेट लिमिटेड में नौकरी करते थे। वह मोटरसाइकिल से बोइसर-नंदगांव रोड पर जा रहे थे। उनके साथ सिद्धार्थ खरदिकर भी मौजूद थे। बोइसर में आरती ड्रग्स के पास वह आगे चल रही एक रिक्शा को ओवरटेक कर रहे थे। इसी दौरान सामने से आ रही टाटा मैजिक तेज रफ्तार में आई और मोटरसाइकिल को टक्कर मार दी।
हादसे में राहुल को गंभीर चोटें आईं। उन्हें पहले थुंगा अस्पताल, बोइसर ले जाया गया और बाद में गंभीर स्थिति को देखते हुए मुलुंड स्थित राज अस्पताल में स्थानांतरित किया गया। रिकॉर्ड के अनुसार उनके इलाज पर लाखों रुपये खर्च हुए। हादसे के बाद बोइसर पुलिस ने टाटा मैजिक चालक के खिलाफ IPC की धारा 279, 337 और 338 तथा मोटर वाहन अधिनियम की धारा 184 के तहत मामला दर्ज कर चार्जशीट दाखिल की थी। इसके बाद घायल युवक ने मोटर वाहन अधिनियम की धारा 166 के तहत ₹25 लाख मुआवजे का दावा किया, जिसे बाद में ₹1 लाख तक सीमित बताया गया। वाहन मालिक और बीमा कंपनी ने दावे का विरोध करते हुए दुर्घटना के लिए घायल युवक को जिम्मेदार बताया। उनका आरोप था कि युवक बिना उचित सावधानी के ओवरटेक कर रहा था। बीमा कंपनी ने यह भी दावा किया कि टाटा मैजिक चालक के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस नहीं था। हालांकि, अधिकरण ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने कहा कि प्रतिवादियों ने यह साबित करने के लिए कोई ठोस साक्ष्य पेश नहीं किया कि दुर्घटना में घायल युवक की भी लापरवाही थी। वाहन मालिक/चालक ने भी गवाह के रूप में अदालत में आकर अपना पक्ष नहीं रखा। वहीं, रिकॉर्ड में मौजूद स्पॉट पंचनामा और पुलिस जांच से टाटा मैजिक की दुर्घटना में संलिप्तता सामने आई।
ड्राइविंग लाइसेंस को लेकर बीमा कंपनी की आपत्ति भी अधिकरण ने खारिज कर दी। रिकॉर्ड में पेश लाइसेंस के अनुसार चालक के पास दुर्घटना की तारीख 4 दिसंबर 2019 को वैध और प्रभावी ड्राइविंग लाइसेंस था। इसलिए बीमा पॉलिसी की शर्तों के उल्लंघन का दावा साबित नहीं हुआ।
दिव्यांगता के संबंध में अधिकरण ने घायल युवक द्वारा पेश किए गए डॉक्टर के प्रमाणपत्र और गवाही का परीक्षण किया। डॉक्टर ने उसे 10 प्रतिशत कार्यात्मक दिव्यांगता बताई थी। हालांकि, डॉक्टर ने युवक का इलाज नहीं किया था और कुछ महत्वपूर्ण चिकित्सकीय विवरण प्रमाणपत्र में दर्ज नहीं थे। इसके बावजूद रिकॉर्ड पर मौजूद चोटों और अन्य साक्ष्यों को देखते हुए अधिकरण ने 10 प्रतिशत कार्यात्मक दिव्यांगता को आधार माना।
आय के संबंध में अधिकरण ने माना कि हादसे के समय युवक की वार्षिक आय ₹4.70 लाख थी। उसकी उम्र 28 वर्ष होने के कारण सुप्रीम कोर्ट के सरला वर्मा सिद्धांत के अनुसार 17 का मल्टीप्लायर लागू किया गया। 10 प्रतिशत कार्यात्मक दिव्यांगता के आधार पर भविष्य की आय में नुकसान ₹7.99 लाख आंका गया।
अधिकरण ने यह भी ध्यान दिया कि युवक बाद में अहमदाबाद में दूसरी कंपनी में नौकरी करने लगा और ₹60 हजार मासिक वेतन प्राप्त कर रहा था। इसलिए भविष्य की आय में अतिरिक्त बढ़ोतरी यानी फ्यूचर प्रॉस्पेक्ट्स का लाभ नहीं दिया गया। मुआवजे में भविष्य की आय का नुकसान ₹7.99 लाख, अस्पताल खर्च ₹6.88 लाख, एक्स-रे व पैथोलॉजी खर्च ₹19,710, दवाओं का खर्च ₹3.29 लाख, दर्द एवं पीड़ा और जीवन के आनंद में कमी के लिए ₹1 लाख तथा विशेष आहार, आवागमन और अटेंडेंट के लिए अलग-अलग राशि शामिल की गई। कुल मुआवजा ₹20,17,320 तय किया गया। अधिकरण ने वाहन मालिक और बीमा कंपनी को संयुक्त रूप से यह राशि 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ एक महीने के भीतर जमा करने का आदेश दिया। साथ ही, मुआवजे में से ₹5 लाख तीन वर्ष के लिए राष्ट्रीयकृत बैंक में फिक्स्ड डिपॉजिट में रखने का निर्देश दिया।
