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ई-फाइलिंग पोर्टल की तकनीकी खराबी से हुई देरी का खामियाजा पक्षकार को नहीं भुगतना होगा, सुप्रीम कोर्ट ने NCLAT अपील बहाल की

ई-फाइलिंग पोर्टल की तकनीकी खराबी के कारण अपील एक दिन देर से दाखिल हुई तो सुप्रीम कोर्ट ने पक्षकार को राहत दी। कोर्ट ने कहा कि ट्रिब्यूनल के सिस्टम की गलती का खामियाजा पक्षकार को नहीं भुगतना चाहिए और NCLAT की खारिज अपील बहाल कर दी।

Sonali17 सित. 2026, 04:10 PM IST
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ई-फाइलिंग पोर्टल की तकनीकी खराबी से हुई देरी का खामियाजा पक्षकार को नहीं भुगतना होगा, सुप्रीम कोर्ट ने NCLAT अपील बहाल की

नई दिल्ली: 

सुप्रीम कोर्ट ने ई-फाइलिंग में तकनीकी खराबी से हुई देरी को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि किसी पक्षकार को ऐसी गलती का नुकसान नहीं भुगतना चाहिए, जो उसकी वजह से नहीं हुई हो। अदालत ने नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) द्वारा समय-सीमा के आधार पर खारिज की गई एक अपील को बहाल कर दिया। मामले में अपील निर्धारित अधिकतम अवधि से केवल एक दिन देर से दाखिल हुई थी और देरी NCLAT के ई-फाइलिंग पोर्टल में तकनीकी समस्या के कारण हुई थी। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ ने कहा कि मौजूदा मामले में देरी पक्षकार की लापरवाही, अज्ञानता या निष्क्रियता के कारण नहीं हुई थी। रिकॉर्ड से यह सामने आया कि अपीलकर्ता ने समय रहते अपील दाखिल करने के लिए वास्तविक और लगातार प्रयास किए थे, लेकिन पोर्टल की तकनीकी समस्या के कारण वह ऐसा नहीं कर सका।

क्या है मामला?

विवाद नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT), मुंबई द्वारा 15 दिसंबर 2025 को मंजूर किए गए एक रिजॉल्यूशन प्लान से जुड़ा था। इस आदेश से असंतुष्ट क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त-II ने NCLAT में अपील दाखिल करने का फैसला किया। IBC की धारा 61(2) के अनुसार NCLT के आदेश के खिलाफ अपील 30 दिनों के भीतर दाखिल की जानी होती है। पर्याप्त कारण होने पर अधिकतम 15 दिन की अतिरिक्त देरी माफ की जा सकती है। इस तरह कुल अधिकतम अवधि 45 दिन है। इस मामले में यह अवधि 29 जनवरी 2026 को समाप्त हो रही थी। अपीलकर्ता का कहना था कि उसने 28 जनवरी को ही NCLAT पोर्टल पर अपील ई-फाइल करने का प्रयास किया, लेकिन तकनीकी समस्या के कारण फाइलिंग पूरी नहीं हो सकी। 29 जनवरी को अंतिम अवसर वाले दिन भी दोबारा प्रयास किया गया। इस दौरान रजिस्ट्री ने बताया कि पोर्टल के बैकएंड में तकनीकी समस्या थी और उसे ठीक किया जा रहा था। अंततः अपील 30 जनवरी 2026 को ई-फाइल हो सकी।

NCLAT ने क्यों खारिज की अपील?

NCLAT ने देरी माफ करने की अर्जी खारिज करते हुए अपील को समय-सीमा से बाहर माना। ट्रिब्यूनल ने सुप्रीम कोर्ट के कई पुराने फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि IBC की धारा 61(2) के तहत 30 दिनों की मूल अवधि के बाद अधिकतम 15 दिन की देरी ही माफ की जा सकती है। इसके आगे देरी को माफ करने का अधिकार उपलब्ध नहीं है। इसके बाद अपीलकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।

सुप्रीम कोर्ट ने NCLAT का आदेश पलटा

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि NCLAT द्वारा जिन पुराने फैसलों पर भरोसा किया गया, उनके तथ्य मौजूदा मामले से अलग थे। अदालत ने कहा कि किसी मामले में एक अतिरिक्त या अलग तथ्य निष्कर्ष को बदल सकता है। पीठ ने NCLAT रजिस्ट्री की रिपोर्ट को भी महत्वपूर्ण माना। रिपोर्ट में पुष्टि हुई कि अपीलकर्ता ने 28 जनवरी से ही ई-फाइलिंग की कोशिश की थी, लेकिन पोर्टल पर OTP डिलीवरी में तकनीकी समस्या के कारण अपील दाखिल नहीं हो सकी। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस मामले में देरी किसी तरह की लापरवाही या जानबूझकर की गई चूक के कारण नहीं हुई, बल्कि पूरी तरह NCLAT के ई-फाइलिंग सिस्टम में आई तकनीकी खराबी से हुई थी। सुप्रीम कोर्ट ने इसी आधार पर NCLAT का आदेश रद्द कर दिया और अपील को बहाल कर दिया। फैसले से यह स्पष्ट होता है कि डिजिटल न्यायिक व्यवस्था में तकनीकी खामी के कारण हुई वास्तविक देरी और पक्षकार की लापरवाही को एक जैसा नहीं माना जा सकता।