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16 साल की नाबालिग का रास्ता रोककर हाथ पकड़ा, शारीरिक रूप से करीब आया; ठाणे POCSO कोर्ट ने दी 3 साल की सजा
ठाणे में 16 वर्षीय नाबालिग लड़की का रास्ता रोककर उसका हाथ पकड़ने और शारीरिक रूप से करीब आने के मामले में विशेष POCSO अदालत ने आरोपी को 3 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने आरोपी को POCSO एक्ट की धारा 7 के तहत यौन हमला करने का दोषी मानते हुए धारा 8 के तहत सजा दी।

ठाणे में 16 वर्षीय नाबालिग लड़की को सड़क पर रोककर उसका हाथ पकड़ने और शारीरिक रूप से करीब आने के मामले में विशेष POCSO अदालत ने आरोपी को तीन साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने आरोपी को POCSO Act की धारा 7 के तहत यौन हमला करने का दोषी मानते हुए धारा 8 के तहत तीन साल की सजा और ₹3,000 जुर्माने का आदेश दिया। इसके साथ ही गलत तरीके से रोकने के अपराध में एक महीने की साधारण कैद और ₹500 जुर्माना भी लगाया गया है। दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी। यह फैसला ठाणे के विशेष POCSO न्यायाधीश एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश-4 प्रेमल एस. विठलानी ने 16 सितंबर 2026 को सुनाया। मामला वर्तकनगर पुलिस स्टेशन में दर्ज वर्ष 2019 के अपराध से संबंधित था। अभियोजन के अनुसार 17 फरवरी 2019 को 16 वर्षीय पीड़िता शाम करीब 5 बजे लोकमान्यनगर पाड़ा नंबर 4 में अपनी कजिन बहन के घर जा रही थी। गणपति मंदिर और डॉ. खटाल के क्लिनिक के पास एक युवक एक्टिवा से आया और उसका रास्ता रोक दिया। कुछ समय बाद जब पीड़िता अपनी कजिन के घर से वापस लौट रही थी, तो वही युवक फिर उसके पास आया। आरोप था कि आरोपी ने एक्टिवा से उतरकर पीड़िता का हाथ पकड़ लिया और उसके साथ अभद्र व्यवहार करते हुए शारीरिक रूप से करीब आने लगा। पीड़िता के शोर मचाने पर आसपास के लोग पहुंचे, जिसके बाद आरोपी मोटरसाइकिल से वहां से भाग गया। पीड़िता ने फोन कर अपने पिता को घटना की जानकारी दी और बाद में पुलिस स्टेशन पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई।
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन ने पीड़िता, उसके पिता और दो प्रत्यक्षदर्शियों सहित पांच गवाहों की गवाही कराई। पीड़िता ने अदालत में आरोपी की पहचान की और घटना का विस्तृत बयान दिया। दोनों प्रत्यक्षदर्शियों ने भी आरोपी द्वारा पीड़िता को परेशान करने और उसका हाथ पकड़ने की घटना की पुष्टि की। आरोपी की ओर से तर्क दिया गया कि वह केवल एक्टिवा से पीड़िता को तेज तरीके से ओवरटेक कर गया था, जिसके बाद विवाद हुआ और उसे झूठा फंसाया गया। बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि आरोपी और गवाह पीड़िता को पहले से नहीं जानते थे, इसलिए टेस्ट आइडेंटिफिकेशन परेड नहीं कराई गई थी। अदालत ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने कहा कि टेस्ट आइडेंटिफिकेशन परेड स्वयं में ठोस साक्ष्य नहीं है और यदि अदालत में की गई पहचान विश्वसनीय है, तो केवल पहचान परेड नहीं होने के आधार पर अभियोजन के मामले को खारिज नहीं किया जा सकता। अदालत ने माना कि पीड़िता ने आरोपी को नजदीक से देखने का पर्याप्त अवसर पाया था और उसकी गवाही विश्वसनीय एवं सुसंगत है।
POCSO अदालत ने यह भी माना कि घटना के समय पीड़िता की उम्र 16 वर्ष 8 महीने थी। जन्म प्रमाणपत्र से उसकी उम्र साबित हुई और आरोपी की ओर से भी उम्र को चुनौती नहीं दी गई। अदालत ने पाया कि आरोपी ने पीड़िता का हाथ पकड़ा और उसके शारीरिक रूप से करीब आया, जिससे POCSO Act की धारा 7 के तहत यौन हमला साबित होता है। हालांकि, अदालत ने IPC की धारा 504 और POCSO Act की धारा 11 सहपठित धारा 12 के आरोप में आरोपी को बरी कर दिया। कोर्ट ने कहा कि जिस कृत्य में शारीरिक संपर्क साबित हुआ, वह यौन हमला है और उसी कृत्य के लिए अलग से यौन उत्पीड़न की सजा देना उचित नहीं होगा। सजा तय करते समय अदालत ने आरोपी की कम उम्र, पहली बार अपराध में शामिल होना और उसके परिवार की जिम्मेदारियों को ध्यान में रखा। हालांकि, POCSO की धारा 8 में न्यूनतम तीन साल की सजा निर्धारित होने के कारण अदालत ने न्यूनतम सजा ही दी और परिवीक्षा का लाभ देने से इनकार कर दिया। आरोपी को 17 फरवरी 2019 से 9 अप्रैल 2019 तक हिरासत में रहने की अवधि का सेट-ऑफ भी दिया गया है। अदालत ने जुर्माने की राशि पीड़िता को मुआवजे के रूप में देने तथा पीड़िता को मुआवजा दिलाने के लिए मामले को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, ठाणे के पास भेजने की भी सिफारिश की है।
