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‘ये कागज मेरा नंबर है’ कहकर महिला को परेशान करने का आरोप, 5 साल बाद भिवंडी कोर्ट ने आरोपी को किया बरी

महिला को इशारे करने और कथित तौर पर ‘ये कागज मेरा नंबर है’ कहकर परेशान करने के 5 साल पुराने मामले में भिवंडी कोर्ट ने आरोपी को बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने के लिए पर्याप्त और विश्वसनीय साक्ष्य पेश नहीं कर सका।

Sonali17 सित. 2026, 04:11 PM IST
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‘ये कागज मेरा नंबर है’ कहकर महिला को परेशान करने का आरोप, 5 साल बाद भिवंडी कोर्ट ने आरोपी को किया बरी

मुख्य गवाह के बयान में विरोधाभास और अहम गवाहों की गवाही नहीं होने से अभियोजन आरोप साबित नहीं कर सका। भिवंडी के प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत ने आरोपी अमय प्रकाश गवणे को IPC की धारा 354A और 354D के आरोपों से बरी कर दिया। ठाणे जिले के भिवंडी में महिला के साथ कथित तौर पर आपत्तिजनक व्यवहार और उसका पीछा करने के आरोप से जुड़े करीब पांच साल पुराने मामले में अदालत ने आरोपी को दोषमुक्त कर दिया है। प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी एन. ए. रणदिवे की अदालत ने 16 सितंबर 2026 को फैसला सुनाते हुए अमय प्रकाश गवणे को भारतीय दंड संहिता की धारा 354A और 354D के तहत लगाए गए आरोपों से बरी कर दिया। 


यह मामला कोनगांव पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया था। अभियोजन के अनुसार घटना 29 जनवरी 2021 की दोपहर करीब 12 बजे की थी। शिकायतकर्ता अपनी मां को इलाज के लिए एक डॉक्टर के क्लीनिक में लेकर गई थी। मां को क्लीनिक में ड्रिप लगाए जाने के बाद शिकायतकर्ता उनके पास बैठी थी। इसी दौरान करीब 20 से 25 वर्ष का एक युवक क्लीनिक में आया और कथित तौर पर शिकायतकर्ता की ओर इशारे करने लगा। शिकायत के मुताबिक कुछ समय बाद आरोपी ने महिला की ओर देखकर फिर इशारे किए। शिकायतकर्ता के अनुसार वह घबरा गई और उसने घटना के बारे में अपनी मां को बताया। इसके बाद जब मां का उपचार पूरा हुआ और शिकायतकर्ता डॉक्टर को बिल देने के लिए जा रही थी, तब आरोपी कथित तौर पर उसके पास आया और कहा कि “ये कागज मेरा नंबर है।” शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि इस व्यवहार से उसे शर्मिंदगी और मानसिक परेशानी हुई। घटना के बाद शिकायतकर्ता ने अपने पिता को फोन कर जानकारी दी। इसके बाद पुलिस स्टेशन जाकर शिकायत दर्ज कराई गई। पुलिस ने जांच के बाद आरोपी के खिलाफ IPC की धारा 354A और 354D के तहत आरोपपत्र दाखिल किया। अदालत ने 4 जनवरी 2022 को आरोपी के खिलाफ आरोप तय किए और 29 जून 2022 से मामले में साक्ष्य शुरू हुए। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने शिकायतकर्ता समेत तीन गवाह पेश किए। इनमें शिकायतकर्ता, पंच गवाह उमेर हनान कुंगले और पंच गवाह कैलाश सुभाष पाटील शामिल थे। हालांकि, अदालत ने अभियोजन के साक्ष्यों का मूल्यांकन करते हुए पाया कि शिकायतकर्ता के FIR और अदालत में दिए गए बयान में महत्वपूर्ण अंतर था। अदालत ने यह भी नोट किया कि शिकायतकर्ता की मां और संबंधित डॉक्टर, जो घटना के समय क्लीनिक में मौजूद थे, उनकी गवाही अभियोजन पक्ष ने पेश नहीं की। अदालत के अनुसार इससे घटना के समय शिकायतकर्ता की मां के क्लीनिक में मौजूद होने और कथित घटना के संबंध में महत्वपूर्ण परिस्थितियों पर संदेह पैदा हुआ।


अदालत ने माना कि केवल शिकायतकर्ता की गवाही के आधार पर आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों को संदेह से परे साबित करने के लिए पर्याप्त विश्वसनीय साक्ष्य रिकॉर्ड पर नहीं आया। अभियोजन पक्ष कथित इशारे करने और महिला को आपत्तिजनक तरीके से परेशान करने के आरोपों को कानूनी मानक के अनुसार साबित नहीं कर सका। इसके बाद अदालत ने दोनों आरोपों का उत्तर नकारात्मक में देते हुए आरोपी अमय प्रकाश गवणे को आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 248(1) के तहत बरी कर दिया। अदालत ने आरोपी के जमानत बांड और बंधपत्र रद्द कर दिए तथा अपील की निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद जब्त मुद्देमाल को नियमानुसार नष्ट करने का आदेश दिया। इस तरह करीब 5 साल 5 महीने पुराने मामले में अभियोजन आरोप साबित करने में विफल रहा और आरोपी को अदालत से दोषमुक्ति मिल गई।