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मक्का के पास ड्रोन, यमन में बढ़ता तनाव और अमेरिका-हूती बातचीत से नई हलचल
यमन में हूती और सऊदी अरब के बीच बढ़ते तनाव के बीच सऊदी अरब ने दावा किया है कि उसकी एयर डिफेंस ने मक्का के दक्षिण में एक ड्रोन को मार गिराया। सऊदी के मुताबिक ड्रोन प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने से पहले ही नष्ट कर दिया गया। वहीं हूती पक्ष ने मक्का को निशाना बनाने के आरोप को खारिज किया है। इसी दौरान अमेरिका और हूती प्रतिनिधियों के बीच ओमान में हुई गोपनीय बैठक की खबर सामने आई है, जिसमें हूतियों ने अमेरिकी और इजरायली जहाजों को निशाना न बनाने का आश्वासन दिया बताया गया है।

मक्का के पास ड्रोन को लेकर सऊदी का दावा
सऊदी नेतृत्व वाले यमन गठबंधन के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल-मलिकी के मुताबिक, 15 सितंबर की शाम करीब 6:50 बजे सऊदी एयर डिफेंस ने मक्का के दक्षिण में एक ड्रोन को रोका और नष्ट कर दिया। उनके अनुसार ड्रोन मक्का के प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र में प्रवेश नहीं कर पाया। अल-मलिकी ने कहा कि मक्का, वहां आने वाले लोगों और धार्मिक स्थलों की सुरक्षा सऊदी के लिए ‘रेड लाइन’ है और आगे ऐसे हमलों को रोकने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे। सऊदी पक्ष ने इस घटना को मक्का को निशाना बनाने की दूसरी कथित कोशिश बताया है।
हूतियों ने आरोप से किया इनकार
दूसरी तरफ हूती पक्ष ने मक्का को निशाना बनाने से इनकार किया है। हूती अधिकारियों ने सऊदी के आरोप को गलत बताया और कहा कि उनका दावा मक्का या अन्य पवित्र स्थलों को निशाना बनाने का नहीं है। इसलिए फिलहाल ड्रोन के वास्तविक लक्ष्य को लेकर दोनों पक्षों के दावे अलग हैं।
सऊदी और हूतियों के बीच क्यों बढ़ रहा तनाव?
यमन में हाल के दिनों में हूतियों ने लाल सागर के तट पर अपनी स्थिति मजबूत की है। रिपोर्टों के मुताबिक समूह ने मोखा बंदरगाह और पेरिम द्वीप समेत रणनीतिक इलाकों पर कब्जा किया है। ये क्षेत्र बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य के करीब हैं, जो अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार के लिए महत्वपूर्ण मार्ग है।
इसके बाद सऊदी अरब और हूतियों के बीच हमले तेज हुए हैं। सऊदी विमानों ने यमन में हमले किए, जबकि हूतियों ने सऊदी क्षेत्र की ओर ड्रोन और मिसाइल हमलों का दावा किया है।
इसी बीच अमेरिका और हूतियों के बीच गुप्त बातचीत
इस पूरे घटनाक्रम के बीच Reuters ने पांच सूत्रों के हवाले से बताया कि अमेरिकी अधिकारियों और हूती प्रतिनिधियों के बीच ओमान की राजधानी मस्कट में गोपनीय बैठक हुई। रिपोर्ट के अनुसार बैठक में हूती प्रतिनिधियों ने अमेरिका के साथ 2025 के युद्धविराम से जुड़ी प्रतिबद्धताओं को बनाए रखने और अमेरिकी जहाजों को निशाना न बनाने की बात कही। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि अमेरिकी अधिकारियों को इजरायली जहाजों को निशाना न बनाने का आश्वासन दिया गया। अमेरिका ने इस बैठक की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। इसलिए इसे फिलहाल गोपनीय बातचीत और कथित आपसी आश्वासनों के रूप में देखना ज्यादा सही है, न कि सार्वजनिक रूप से घोषित औपचारिक समझौते के रूप में।
सऊदी को अमेरिका से क्या उम्मीद थी?
रिपोर्टों के मुताबिक हूतियों की हालिया सैन्य बढ़त के बाद सऊदी अरब ने अमेरिका से मदद मांगी थी। लेकिन वॉशिंगटन ने फिलहाल हूतियों के खिलाफ सीधे सैन्य हस्तक्षेप से दूरी बनाए रखी है। इसके बावजूद अमेरिका और सऊदी के बीच सुरक्षा सहयोग तथा खुफिया और लक्ष्य संबंधी सहायता को लेकर रिपोर्टें सामने आई हैं।
लाल सागर और तेल आपूर्ति पर भी असर
इस संघर्ष का असर सिर्फ यमन और सऊदी अरब तक सीमित नहीं है। हूतियों का लाल सागर के रणनीतिक इलाकों में बढ़ता नियंत्रण बाब-अल-मंदेब के आसपास जहाजों की आवाजाही को लेकर चिंता बढ़ा रहा है। सऊदी अरब ने हाल में अपने तेल निर्यात के वैकल्पिक रास्तों पर भी दबाव महसूस किया है। क्षेत्र में समुद्री यातायात पहले से प्रभावित है और ऊर्जा ढांचे की सुरक्षा भी चिंता का विषय बनी हुई है।
अब सबसे बड़ा सवाल क्या है?
मक्का के पास ड्रोन घटना को लेकर फिलहाल दो अलग दावे सामने हैं। सऊदी अरब का कहना है कि हूती ड्रोन को मक्का के प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने से पहले मार गिराया गया, जबकि हूती पक्ष ने मक्का को निशाना बनाने से इनकार किया है। स्वतंत्र रूप से ड्रोन के लक्ष्य की पुष्टि अभी स्पष्ट नहीं है। वहीं अमेरिका और हूतियों के बीच हुई कथित गोपनीय बातचीत यह संकेत देती है कि क्षेत्रीय संघर्ष के बीच सैन्य तनाव को सीमित करने के लिए कूटनीतिक संपर्क भी चल रहे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सऊदी-हूती संघर्ष और अमेरिका की भूमिका किस दिशा में जाती है।
