health

डेंगू पर Climate Change का असर, केरल में बढ़ते मामलों ने बढ़ाई चिंता

केरल में डेंगू के बढ़ते मामलों को लेकर एक नए अध्ययन में Climate Change, तापमान, नमी और बारिश के बीच संबंध सामने आया है। शोध के अनुसार लंबे समय तक गर्म और नम मौसम डेंगू फैलाने वाले मच्छरों के लिए अनुकूल स्थिति बना सकता है। El Niño जैसी मौसमी घटनाएं भी इस खतरे को प्रभावित कर सकती हैं।

Neha Sharma17 सित. 2026, 06:06 PM IST
खबर शेयर करें:
डेंगू पर Climate Change का असर, केरल में बढ़ते मामलों ने बढ़ाई चिंता

केरल: केरल में डेंगू के बढ़ते खतरे और मौसम में हो रहे बदलाव के बीच संबंध सामने आया है। भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM) और अन्य संस्थानों के शोधकर्ताओं के अध्ययन के मुताबिक तापमान, नमी, बारिश और El Niño जैसी जलवायु परिस्थितियां केरल में डेंगू के फैलने के जोखिम को प्रभावित कर सकती हैं।


अध्ययन के अनुसार, जलवायु में बदलाव के कारण लंबे समय तक गर्म और नम परिस्थितियां बनी रहती हैं तो डेंगू फैलाने वाले Aedes मच्छरों के लिए वातावरण अधिक अनुकूल हो सकता है। हालांकि डेंगू के मामलों पर सिर्फ जलवायु का असर नहीं होता; मच्छरों की संख्या, पानी जमा होना, साफ-सफाई और स्थानीय परिस्थितियां भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

2026 में केरल में डेंगू के मामले बढ़े

अध्ययन में बताया गया है कि जून से अगस्त 2026 के बीच केरल में 7,188 पुष्ट डेंगू मामले दर्ज हुए। यह संख्या 2016 से 2025 के इसी अवधि के औसत से करीब 60 प्रतिशत अधिक थी और 2006-2015 के औसत से पांच गुना से ज्यादा रही। शोध के मुताबिक केरल में डेंगू के मामले आमतौर पर मई से बढ़ना शुरू होते हैं और जून-जुलाई में ज्यादा मामले सामने आते हैं। करीब 60 प्रतिशत रिपोर्टेड मामले दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान सामने आए।


तापमान, नमी और बारिश का क्या असर?

शोधकर्ताओं ने करीब 14 वर्षों के डेंगू और मौसम से जुड़े आंकड़ों का अध्ययन किया। इसमें पाया गया कि मानसून से पहले का तापमान और नमी, उसके बाद होने वाली बारिश और El Niño की स्थिति डेंगू के जोखिम का संकेत दे सकती है।


अध्ययन के मुताबिक मानसून से पहले करीब 30.5 से 32.5 डिग्री सेल्सियस तापमान, 66 से 79 प्रतिशत के बीच नमी और इसके बाद मध्यम से ज्यादा बारिश वाली परिस्थितियां डेंगू के ज्यादा मामलों से जुड़ी पाई गईं। हालांकि बहुत ज्यादा बारिश का असर हर स्थिति में एक जैसा नहीं होता। शोध में कहा गया है कि अत्यधिक बारिश कुछ समय के लिए मच्छरों के अंडों और लार्वा को बहा सकती है, जिससे संक्रमण का फैलाव अस्थायी रूप से कम हो सकता है।


El Niño से क्यों बढ़ सकता है खतरा?

El Niño प्रशांत महासागर के पानी के असामान्य रूप से गर्म होने की स्थिति है। अध्ययन के अनुसार El Niño के दौरान केरल में मानसून से पहले गर्म परिस्थितियां बन सकती हैं, जो डेंगू फैलने के लिए अनुकूल माहौल तैयार कर सकती हैं।

शोधकर्ताओं के मुताबिक मौसम से जुड़े संकेतों की मदद से डेंगू के मामलों में बढ़ोतरी का अनुमान कुछ महीने पहले लगाया जा सकता है। अध्ययन में विकसित मशीन-लर्निंग मॉडल ने डेंगू मामलों में बदलाव का करीब 72 प्रतिशत हिस्सा समझाने की क्षमता दिखाई।


Climate Change से आगे क्या असर पड़ सकता है?

शोध में चेतावनी दी गई है कि लगातार बढ़ता तापमान और बदलता मौसम भविष्य में डेंगू के जोखिम को बढ़ा सकता है। एक अलग रिपोर्ट में इसी अध्ययन के आधार पर 2040 तक केरल में डेंगू की घटनाओं में करीब 16-20 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान बताया गया है। हालांकि यह एक मॉडल आधारित अनुमान है, निश्चित भविष्यवाणी नहीं। इसका मतलब यह नहीं है कि हर साल डेंगू के मामले इसी दर से बढ़ेंगे। डेंगू का फैलाव मौसम के अलावा मच्छरों की संख्या, पानी जमा होने की स्थिति, शहरीकरण, लोगों की आवाजाही और स्वास्थ्य व्यवस्था जैसे कई दूसरे कारणों पर भी निर्भर करता है।


पहले से चेतावनी मिलने पर तैयारी आसान

शोधकर्ताओं का कहना है कि केवल डेंगू के मरीजों की संख्या पर नजर रखने के बजाय मौसम और जलवायु के संकेतों को भी स्वास्थ्य निगरानी में शामिल किया जाना चाहिए। इससे संभावित जोखिम वाले समय का पहले से अनुमान लगाकर रोकथाम और स्वास्थ्य व्यवस्था की तैयारी बेहतर की जा सकती है।


केरल के मामले में यह अध्ययन इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि राज्य में डेंगू का मौसम और जलवायु परिस्थितियों के बीच संबंध को लंबे समय के आंकड़ों के आधार पर समझने की कोशिश की गई है। शोधकर्ताओं के अनुसार इसी तरह के मॉडल को दूसरे क्षेत्रों में भी इस्तेमाल किया जा सकता है, हालांकि हर क्षेत्र में मौसम और डेंगू के बीच संबंध अलग हो सकते हैं।