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यवतमाल-चंद्रपुर को बड़ी सौगात, मुकुटबन-गडचांदूर रेल लाइन का रास्ता साफ
महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में रेल कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए मुकुटबन (अदिलाबाद)-गडचांदूर के बीच 38.21 किलोमीटर लंबी नई रेल लाइन परियोजना को आगे बढ़ाया गया है। करीब ₹493 करोड़ की लागत वाली इस परियोजना से यवतमाल और चंद्रपुर क्षेत्र में रेल नेटवर्क के विस्तार की उम्मीद है। परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई गई है।

चंद्रपुर/यवतमाल: महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में रेल कनेक्टिविटी को मजबूत करने की दिशा में मुकुटबन से गडचांदूर के बीच नई रेल लाइन परियोजना को आगे बढ़ाया गया है। 38.21 किलोमीटर लंबी इस नई रेल लाइन की अनुमानित लागत करीब ₹493.4 करोड़ दर्ज की गई है। यह परियोजना साउथ सेंट्रल रेलवे के तहत आती है और इसका असर महाराष्ट्र के यवतमाल और चंद्रपुर जिलों से जुड़ा है। रेलवे बोर्ड के जून 2026 के दस्तावेज में “New Line between Mukutban-Gadchandur” को 38.21 किलोमीटर लंबी परियोजना के रूप में सूचीबद्ध किया गया था। इसमें परियोजना की अनुमानित लागत ₹493.4 करोड़ बताई गई थी और उस समय DPR/FIRR से जुड़े दस्तावेजों की प्रक्रिया जारी थी।
38.21 किलोमीटर की नई ब्रॉडगेज लाइन
परियोजना के तहत मुकुटबन क्षेत्र को गडचांदूर से जोड़ने के लिए नई रेल लाइन विकसित की जानी है। जुलाई 2026 में केंद्र सरकार ने इस परियोजना को Special Railway Project के रूप में अधिसूचित किया। अधिसूचना के मुताबिक 38.21 किलोमीटर लंबी लाइन के लिए महाराष्ट्र के चंद्रपुर और यवतमाल जिलों में भूमि अधिग्रहण किया जाना है।
रेलवे अधिसूचना में कहा गया है कि परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण सार्वजनिक उद्देश्य और राष्ट्रीय बुनियादी ढांचे के विकास के लिए किया जाएगा। यह अधिसूचना Railways Act, 1989 की धारा 37A के तहत जारी की गई थी।
विदर्भ के लिए क्यों महत्वपूर्ण है परियोजना?
मुकुटबन-गडचांदूर क्षेत्र खनिज और औद्योगिक गतिविधियों वाले विदर्भ के हिस्से में आता है। रेलवे के आधिकारिक परियोजना विवरण के अनुसार गडचांदूर-अदिलाबाद नई ब्रॉडगेज लाइन को इस क्षेत्र के विकास और माल परिवहन की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए महत्वपूर्ण रेल कॉरिडोर के रूप में देखा गया है। इस रेल कनेक्शन से क्षेत्र में आने-जाने के लिए रेल परिवहन का विकल्प मजबूत हो सकता है। नई लाइन तैयार होने के बाद स्थानीय यात्रियों के साथ-साथ माल परिवहन के लिए भी रेल नेटवर्क की क्षमता बढ़ाने की संभावना है।
माल परिवहन के लिए भी अहम
महाराष्ट्र के इस क्षेत्र में कोयला और अन्य खनिज आधारित गतिविधियां महत्वपूर्ण हैं। महाराष्ट्र रेल इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड यानी MRIDC के अनुसार गडचांदूर-अदिलाबाद कॉरिडोर को पर्याप्त माल यातायात की संभावना वाले मार्ग के रूप में पहचाना गया है। परियोजना का एक उद्देश्य कोयला परिवहन के लिए महत्वपूर्ण रेल लाइनों के बीच बेहतर कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना भी है। MRIDC के परियोजना विवरण के अनुसार यह लाइन मौजूदा रेल नेटवर्क के अलग-अलग हिस्सों को जोड़ने में मदद करेगी और क्षेत्र के अपेक्षाकृत पिछड़े इलाकों में रेल सुविधा पहुंचाने में योगदान दे सकती है।
भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ी
परियोजना के लिए जुलाई 2026 में जारी रेलवे अधिसूचना महत्वपूर्ण कदम है। इसमें मुकुटबन (अदिलाबाद)-गडचांदूर के बीच 38.21 किमी नई लाइन को Special Railway Project घोषित किया गया और चंद्रपुर तथा यवतमाल जिलों में भूमि अधिग्रहण का प्रावधान किया गया। इसका मतलब है कि परियोजना अब केवल प्रस्ताव के स्तर पर नहीं है, बल्कि जमीन से जुड़े वैधानिक कदम भी आगे बढ़ाए जा रहे हैं। हालांकि परियोजना के निर्माण की अंतिम समयसीमा, चरणबद्ध निर्माण कार्यक्रम और ट्रेन सेवाओं की संख्या के बारे में उपलब्ध रिकॉर्ड में स्पष्ट अंतिम विवरण नहीं दिया गया है।
गडचांदूर-अदिलाबाद रेल कॉरिडोर से जुड़ाव
महाराष्ट्र रेल इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन के अनुसार प्रस्तावित गडचांदूर-अदिलाबाद नई ब्रॉडगेज लाइन गडचांदूर स्टेशन से शुरू होकर अदिलाबाद स्टेशन तक जाने की योजना का हिस्सा है। इसे सिकंदराबाद और नांदेड डिवीजन से जुड़े रेल नेटवर्क के संदर्भ में विकसित किया जा रहा है। इस कॉरिडोर का रणनीतिक महत्व इसलिए भी बताया गया है क्योंकि यह दक्षिण भारत और उत्तर भारत के बीच मौजूद रेल मार्गों को जोड़ने तथा विशेष रूप से माल ढुलाई की क्षमता बढ़ाने में मदद कर सकता है।
क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को मिल सकता है फायदा
नई रेल लाइन बनने के बाद यवतमाल और चंद्रपुर के संबंधित क्षेत्रों में रेल नेटवर्क का विस्तार होगा। इससे सड़क परिवहन पर निर्भरता कम करने और लंबी दूरी के यात्री व माल परिवहन के लिए वैकल्पिक रेल कनेक्टिविटी विकसित करने में मदद मिल सकती है। फिलहाल परियोजना से जुड़े अगले महत्वपूर्ण चरणों में भूमि अधिग्रहण, विस्तृत परियोजना रिपोर्ट से संबंधित प्रक्रियाएं और निर्माण से पहले की तकनीकी मंजूरियां शामिल हैं। उपलब्ध जून 2026 के रेलवे रिकॉर्ड में DPR/FIRR दस्तावेजों की स्थिति लंबित बताई गई थी।
