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एसटी बस की टक्कर से युवक की मौत, ठाणे MACT ने माता-पिता को ₹31.08 लाख मुआवजे का आदेश दिया
कल्याण-मुरबाड रोड पर एसटी बस की टक्कर में 25 वर्षीय युवक की मौत के मामले में ठाणे मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल ने बड़ा आदेश दिया है। ट्रिब्यूनल ने बस चालक की लापरवाही मानते हुए मृतक के माता-पिता को कुल ₹31.08 लाख मुआवजा 9% सालाना ब्याज के साथ देने का निर्देश दिया है।

ठाणे:
सड़क हादसे में 25 वर्षीय युवक की मौत के मामले में ठाणे मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल (MACT) ने मृतक के माता-पिता के पक्ष में फैसला सुनाते हुए ₹31,08,700 मुआवजा देने का आदेश दिया है। अदालत ने महाराष्ट्र राज्य सड़क परिवहन निगम (MSRTC) को इस राशि पर याचिका दायर करने की तारीख से जमा होने तक 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने का भी निर्देश दिया है। यह फैसला MACT ठाणे के सदस्य आर. वी. मोहिते ने Motor Accident Claim Petition No.35/2020 में 17 सितंबर 2026 को सुनाया।
कैसे हुआ था हादसा?
मामला 29 अक्टूबर 2019 की रात करीब 8:15 बजे का है। मृतक सूरज एकनाथ चौधरी मोटरसाइकिल से अपने घर जा रहे थे। जब वह कल्याण-मुरबाड रोड पर किशोरगांव के पास निसर्ग ढाबा/होटल के सामने पहुंचे, तभी मुरबाड से कल्याण की ओर जा रही एसटी बस क्रमांक MH-20-BL-1041 ने उन्हें टक्कर मार दी। परिजनों का आरोप था कि बस तेज और लापरवाही से चलाई जा रही थी और ओवरटेक करते समय चालक बस पर नियंत्रण नहीं रख सका। हादसे में सूरज की मौके पर ही मौत हो गई।
पुलिस ने बस चालक के खिलाफ की थी कार्रवाई
हादसे के बाद मुरबाड पुलिस ने बस चालक के खिलाफ IPC की धारा 279, 337, 338 और 304-A तथा मोटर वाहन अधिनियम की धारा 184 और 187 के तहत मामला दर्ज किया था। पुलिस ने जांच के बाद चालक के खिलाफ आरोपपत्र भी दाखिल किया था। हालांकि, MSRTC की ओर से दावा किया गया कि हादसा मृतक की अपनी लापरवाही के कारण हुआ। निगम ने तर्क दिया कि मोटरसाइकिल चालक तेज गति से सामने से आया और बस से टकरा गया। उसने मृतक पर 50 प्रतिशत तक सहायक लापरवाही का आरोप लगाया।
कोर्ट ने क्यों मानी बस चालक की गलती?
ट्रिब्यूनल ने दोनों पक्षों के साक्ष्यों की जांच की। अदालत ने पाया कि MSRTC के चालक और डिपो मैनेजर के बयानों में आपस में विरोधाभास था। निगम हादसे के किसी प्रत्यक्षदर्शी या बस में मौजूद यात्री को भी गवाह के तौर पर पेश नहीं कर सका। स्पॉट पंचनामा भी अदालत के सामने महत्वपूर्ण रहा। इसमें मोटरसाइकिल का दायां शीशा और बंपर गार्ड टूटा हुआ पाया गया था, जबकि बस के पिछले दाहिने पहिये पर खून के निशान मिले थे। सड़क पर बस के ब्रेक के निशान और खून के निशान भी दर्ज किए गए थे।
अदालत ने कहा कि निगम मृतक की सहायक लापरवाही साबित करने में विफल रहा। ट्रिब्यूनल ने निष्कर्ष निकाला कि हादसा एसटी बस चालक की तेज और लापरवाही से ड्राइविंग के कारण हुआ।
क्रिमिनल केस में बरी होने से मुआवजे का दावा खत्म नहीं होता
फैसले में यह भी स्पष्ट किया गया कि बस चालक को आपराधिक मामले में बरी किए जाने का असर मोटर दुर्घटना मुआवजा मामले पर अपने आप नहीं पड़ता। अदालत ने कहा कि आपराधिक मुकदमे और मोटर दुर्घटना दावा कार्यवाही अलग कानूनी आधार पर चलती हैं। आपराधिक मामले में दोष सिद्ध करने के लिए संदेह से परे प्रमाण की जरूरत होती है, जबकि MACT मामले में संभावनाओं की प्रबलता के आधार पर साक्ष्यों का मूल्यांकन किया जाता है।
मृतक की आय ₹20 हजार प्रति माह मानी
मृतक के परिवार ने बताया था कि सूरज शुंभांगी ऑप्टिक्स, बदलापुर में नौकरी करते थे और इसके अलावा चीनी फूड का ठेला भी चलाते थे। परिवार ने उनकी कुल मासिक आय ₹42 हजार बताई थी। हालांकि, नौकरी से ₹12 हजार वेतन मिलने और चीनी फूड व्यवसाय से ₹30 हजार मासिक आय के दावे को साबित करने के लिए पर्याप्त दस्तावेज नहीं पेश किए गए। बैंक रिकॉर्ड, आयकर रिटर्न और अन्य ठोस दस्तावेजों की कमी को देखते हुए ट्रिब्यूनल ने मृतक की अनुमानित आय ₹20 हजार प्रति माह तय की।
₹31.08 लाख का मुआवजा
अदालत ने 25 वर्ष की उम्र को देखते हुए 18 का गुणक लागू किया और व्यक्तिगत खर्च के लिए 50 प्रतिशत आय घटाई। इसके बाद भविष्य की आय के नुकसान के लिए ₹21.60 लाख और भविष्य की संभावनाओं के लिए ₹8.64 लाख निर्धारित किए गए। इसके अलावा वसीयत? नहीं—मुआवजे में वैवाहिक/पारिवारिक सहारा खत्म होने, संपत्ति के नुकसान और अंतिम संस्कार के खर्च के मद में कुल ₹84,700 जोड़े गए। इस तरह कुल मुआवजा ₹31,08,700 तय हुआ।
माता-पिता को अलग-अलग मिलेगी राशि
ट्रिब्यूनल ने कुल मुआवजे में से ₹15 लाख मृतक के पिता एकनाथ नामदेव चौधरी और ₹16,08,700 उनकी मां मनीषा एकनाथ चौधरी को देने का आदेश दिया है। दोनों को मिलने वाली राशि पर अनुपातिक ब्याज भी दिया जाएगा। इसके अलावा दोनों के हिस्से में से ₹4-4 लाख तीन साल के लिए किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में सावधि जमा करने का निर्देश दिया गया है।
MSRTC को एक महीने में रकम जमा करने का आदेश
ठाणे MACT ने MSRTC को आदेश दिया है कि वह ₹31,08,700 की पूरी राशि पर 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित रकम फैसले की तारीख से एक महीने के भीतर ट्रिब्यूनल के खाते में जमा करे। इसके बाद निर्धारित हिस्से के अनुसार मुआवजे की राशि मृतक के माता-पिता को दी जाएगी। फैसला 17 सितंबर 2026 को ठाणे मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल के सदस्य आर. वी. मोहिते ने सुनाया।
