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नाबालिग बेटे को रिक्शा चलाने देने पर पिता को 7 हजार रुपये जुर्माना, भिवंडी कोर्ट में आरोपी ने कबूला गुनाह
भिवंडी में नाबालिग बेटे को ऑटो रिक्शा चलाने देना पिता को भारी पड़ गया। पाडघा इलाके में हुई इस कार्रवाई के मामले में 9वीं न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी अदालत ने आरोपी पिता को दोषी ठहराते हुए कुल 7 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। आरोपी ने अदालत में अपना अपराध स्वीकार किया था। कोर्ट ने बिना लाइसेंस वाहन चलाने और रिक्शा में क्षमता से अधिक यात्रियों को बैठाने से जुड़े उल्लंघनों पर भी सजा सुनाई।

भिवंडी की 9वीं न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी अदालत ने नाबालिग बेटे को रिक्शा चलाने देने के मामले में पिता को दोषी ठहराते हुए कुल 7 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। आरोपी ने अदालत में अपना अपराध स्वेच्छा से स्वीकार किया था और न्यूनतम जुर्माना लगाने की मांग की थी। अदालत ने मामले की परिस्थितियों और अपराध की प्रकृति को देखते हुए यह आदेश पारित किया। मामला Padgha Police Station से जुड़ा है। अदालत के रिकॉर्ड के अनुसार आरोपी फिरोज अब्दुल अंसारी, उम्र 45 वर्ष, पेशे से ड्राइवर है और भिवंडी के शांतिनगर इलाके में रहता है। घटना 7 सितंबर 2026 की शाम करीब 7 बजे मुंबई-नासिक हाईवे पर पाडघा स्थित शिवधारा होटल के सामने हुई थी। पुलिस के अनुसार आरोपी ने अपना ऑटो रिक्शा क्रमांक MH-04-JH-7635 अपने बेटे निजाम फिरोज अंसारी को चलाने के लिए दिया था। बेटा 18 वर्ष से कम उम्र का था। इसके अलावा उसके पास प्रभावी ड्राइविंग लाइसेंस भी नहीं था। पुलिस ने यह भी आरोप लगाया कि रिक्शा में निर्धारित क्षमता से अधिक यात्रियों को बैठाया गया था।
इन आरोपों के आधार पर आरोपी के खिलाफ मोटर वाहन अधिनियम की धारा 4 के उल्लंघन के लिए धारा 181, धारा 5 के उल्लंघन के लिए धारा 180 और धारा 66 के उल्लंघन के लिए धारा 192 के तहत कार्रवाई की गई।
17 सितंबर 2026 को मामले की सुनवाई भिवंडी की 9वीं न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी अदालत में हुई। अदालत ने आरोपी को आरोपों का विवरण स्थानीय भाषा में पढ़कर समझाया। आरोपी ने बताया कि उसे पुलिस कागजात की प्रतियां मिल चुकी हैं और वह आरोपों को समझता है। इसके बाद उसने अदालत के समक्ष स्वेच्छा से अपना अपराध स्वीकार कर लिया। आरोपी ने अदालत से न्यूनतम जुर्माना लगाने का अनुरोध भी किया। न्यायिक मजिस्ट्रेट एस.एम. सुतार ने आरोपी की दोष स्वीकारोक्ति को स्वैच्छिक मानते हुए स्वीकार किया और मामले की परिस्थितियों तथा संबंधित अपराधों के लिए निर्धारित जुर्माने को ध्यान में रखते हुए सजा सुनाई। अदालत ने मोटर वाहन अधिनियम की धारा 4 के उल्लंघन पर धारा 181 के तहत 2,000 रुपये जुर्माना लगाया। जुर्माना अदा नहीं करने पर आरोपी को 5 दिन का साधारण कारावास भुगतना होगा। इसी तरह धारा 5 के उल्लंघन पर धारा 180 के तहत भी 2,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई। जुर्माना नहीं भरने पर 5 दिन का साधारण कारावास निर्धारित किया गया। वहीं, धारा 66 के उल्लंघन पर धारा 192 के तहत 3,000 रुपये जुर्माना लगाया गया। जुर्माना अदा नहीं करने की स्थिति में 7 दिन का साधारण कारावास भुगतना होगा। इस प्रकार तीनों अपराधों में आरोपी पर कुल 7,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया। अदालत ने यह आदेश 17 सितंबर 2026 को खुले न्यायालय में सुनाया।
