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TMC में दो गुट, दो नाम और दो चुनाव चिह्न: ममता गुट को ‘फुटबॉल खिलाड़ी’, बागी खेमे को ‘लिफाफा’

पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रहे विवाद के बीच निर्वाचन आयोग ने दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों के लिए नए नाम और चुनाव चिह्न आवंटित कर दिए हैं। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ चुनाव चिह्न मिला है। वहीं अरूप राय के नेतृत्व वाले दूसरे गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘लिफाफा’ चिह्न दिया गया है। यह व्यवस्था फिलहाल आगामी उपचुनावों के लिए अंतरिम तौर पर लागू की गई है।

sd18 सित. 2026, 06:28 PM IST
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TMC में दो गुट, दो नाम और दो चुनाव चिह्न: ममता गुट को ‘फुटबॉल खिलाड़ी’, बागी खेमे को ‘लिफाफा’

मूल नाम और ‘जोड़ाफूल’ चिह्न पर रोक

निर्वाचन आयोग ने 17 सितंबर को अंतरिम आदेश जारी कर दोनों गुटों को आगामी उपचुनावों में ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ (AITC) नाम और पार्टी के पारंपरिक ‘जोड़ाफूल’ यानी दो फूल और घास वाले चुनाव चिह्न का इस्तेमाल करने से रोक दिया था। आयोग के सामने दोनों पक्ष खुद को पार्टी का वैध प्रतिनिधि बता रहे थे। ऐसे में उपचुनाव में एक ही नाम और एक ही आरक्षित चुनाव चिह्न के इस्तेमाल को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं थी। आयोग ने दोनों पक्षों को शुक्रवार सुबह 11 बजे तक तीन-तीन वैकल्पिक नाम और उपलब्ध चुनाव चिह्नों में से पसंद के विकल्प देने को कहा था।

ममता गुट को क्या मिला?

ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम दिया गया है। इसके साथ ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ चुनाव चिह्न आवंटित किया गया है। रिपोर्टों के मुताबिक ममता गुट ने आयोग के सामने तीन नाम सुझाए थे—‘अखिल भारतीय तृणमूल ममता कांग्रेस’, ‘अखिल भारतीय ममता तृणमूल कांग्रेस’ और ‘ममता तृणमूल कांग्रेस’। चुनाव चिह्नों में क्रिकेट बैट और बिना गेंद वाला फुटबॉल खिलाड़ी भी विकल्प के तौर पर दिया गया था। अंततः आयोग ने ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और फुटबॉल खिलाड़ी चिह्न आवंटित किया।

बागी गुट को मिला ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’

दूसरे गुट, जिसका नेतृत्व अरूप राय कर रहे हैं और जिसमें ऋतब्रत बनर्जी प्रमुख नेता हैं, को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम मिला है। इस गुट को ‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न आवंटित किया गया है। चुनाव आयोग के अंतरिम आदेश के अनुसार इस गुट को पश्चिम बंगाल के साथ मेघालय और त्रिपुरा में भी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल के तौर पर माना जाएगा। इसी तरह ममता गुट को भी इन राज्यों में मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल के रूप में माना गया है।

दोनों नाम AITC से मिलते-जुलते क्यों हैं?

आयोग ने दोनों पक्षों को ऐसे नाम चुनने की अनुमति दी थी जो मूल AITC नाम से मिलते-जुलते हों। हालांकि, चुनाव चिह्न के लिए दोनों गुटों को उन प्रतीकों में से विकल्प चुनना था जो निर्दलीय उम्मीदवारों और पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के लिए उपलब्ध हैं। इस अंतरिम व्यवस्था का उद्देश्य उपचुनाव की प्रक्रिया को बिना रुकावट आगे बढ़ाना और दोनों पक्षों को अलग चुनावी पहचान देना है।

किन सीटों पर होना है उपचुनाव?

पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर 6 अक्टूबर 2026 को उपचुनाव होना है। इन चुनावों के लिए दोनों गुट अब अपने नए नाम और चुनाव चिह्न के साथ मैदान में उतरेंगे। मतगणना 9 अक्टूबर को होगी। इन उपचुनावों के लिए नए नाम और चिह्न देना इसलिए जरूरी था क्योंकि एक ही पार्टी के दो प्रतिद्वंद्वी गुटों द्वारा समान नाम और आरक्षित चिह्न इस्तेमाल करने की स्थिति में नामांकन और चुनावी प्रक्रिया को लेकर भ्रम पैदा हो सकता था।

चुनाव आयोग ने अंतरिम व्यवस्था क्यों की?

आयोग ने स्पष्ट किया है कि उसके पास चुनाव चिह्न (आरक्षण और आवंटन) आदेश, 1968 के पैराग्राफ 15 के तहत पार्टी के दावे पर पूरी प्रक्रिया पूरी करने के लिए पर्याप्त समय नहीं था। इसी वजह से आयोग ने फिलहाल अंतरिम व्यवस्था बनाई है। यह व्यवस्था आगामी उपचुनावों के लिए है और दोनों गुटों के बीच पार्टी के नाम, संगठन और चुनाव चिह्न को लेकर अंतिम विवाद निपटने तक लागू रहेगी। इसका मतलब यह है कि शुक्रवार को दिए गए नाम और चुनाव चिह्न को पार्टी की मूल पहचान पर आयोग का अंतिम फैसला नहीं माना जा सकता।

टीएमसी में विवाद की शुरुआत कैसे हुई?

यह पूरा विवाद मई 2026 के विधानसभा चुनाव के बाद तृणमूल कांग्रेस के भीतर शुरू हुए राजनीतिक टकराव की पृष्ठभूमि में सामने आया। इसके बाद पार्टी के अंदर बगावत बढ़ी और मामला पश्चिम बंगाल विधानसभा तक पहुंच गया। जून में बागी विधायकों ने ऋतब्रत बनर्जी को विधानसभा में विपक्ष का नेता चुना। विधानसभा अध्यक्ष की ओर से भी उन्हें मान्यता दी गई। इसके बाद पार्टी के नाम, नेतृत्व और चुनाव चिह्न को लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद और गहरा गया।

मामला अंततः निर्वाचन आयोग तक पहुंचा, जहां दोनों पक्षों ने पार्टी की राजनीतिक पहचान और चुनाव चिह्न पर अपना दावा रखा।

आगे क्या होगा?

फिलहाल दोनों गुट आगामी उपचुनाव नए नाम और चुनाव चिह्न के साथ लड़ेंगे। दूसरी ओर, मूल ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘जोड़ाफूल’ चिह्न पर विवाद का अंतिम निपटारा बाद की प्रक्रिया में होगा।

इस तरह 2026 के पश्चिम बंगाल उपचुनाव में मतदाताओं को तृणमूल से जुड़े दो अलग नाम और दो अलग चुनाव चिह्न दिखाई देंगे—ममता गुट के सामने फुटबॉल खिलाड़ी, जबकि दूसरे गुट के सामने लिफाफा होगा।