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म्यांमार में हथियार-ड्रोन ट्रेनिंग के आरोप में गिरफ्तार अमेरिकी नागरिक को डिफॉल्ट बेल, NIA की जांच जारी l

दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट ने म्यांमार में जातीय सशस्त्र समूहों को हथियार और ड्रोन संचालन की ट्रेनिंग देने के आरोप में गिरफ्तार अमेरिकी नागरिक मैथ्यू वैनडाइक को डिफॉल्ट जमानत दे दी है। NIA ने मार्च 2026 में वैनडाइक समेत सात विदेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया था। कोर्ट ने एक लाख रुपये के बेल बॉन्ड और इतनी ही राशि की श्योरिटी पर जमानत मंजूर की। हालांकि, जमानत मिलने के बावजूद म्यांमार में सशस्त्र समूहों से कथित संपर्क और आतंकी गतिविधियों से जुड़े पहलुओं की NIA जांच जारी रहेगी।

Kashish Rai19 सित. 2026, 06:36 PM IST
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म्यांमार में हथियार-ड्रोन ट्रेनिंग के आरोप में गिरफ्तार अमेरिकी नागरिक को डिफॉल्ट बेल, NIA की जांच जारी l

दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट ने म्यांमार में जातीय सशस्त्र समूहों को हथियार चलाने और ड्रोन संचालन की ट्रेनिंग देने के आरोप में गिरफ्तार अमेरिकी नागरिक मैथ्यू वैनडाइक को डिफॉल्ट जमानत दे दी है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी NIA ने मार्च 2026 में वैनडाइक समेत सात विदेशी नागरिकों को इस मामले में गिरफ्तार किया था। कोर्ट ने वैनडाइक को एक लाख रुपये के बेल बॉन्ड और इतनी ही राशि की श्योरिटी पर जमानत दी है। जमानत की शर्तों के तहत वैनडाइक को दिल्ली में ही रहना होगा और जांच एजेंसी के बुलाने पर पूछताछ या जांच में शामिल होना होगा। कोर्ट में वैनडाइक की ओर से दलील दी गई कि मामले की जांच निर्धारित कानूनी अवधि के भीतर पूरी नहीं की गई और चार्जशीट दाखिल करने में देरी हुई। इसी आधार पर उन्होंने डिफॉल्ट बेल की मांग की थी।


कोर्ट ने माना कि जांच में देरी के आधार पर मामले में गिरफ्तार छह यूक्रेनी नागरिक भी डिफॉल्ट जमानत के हकदार हैं। इससे मामले में अन्य आरोपियों के लिए भी जमानत का रास्ता खुल सकता है। हालांकि, डिफॉल्ट जमानत का मतलब यह नहीं है कि अदालत ने आरोपों को सही या गलत ठहरा दिया है। मामले की जांच और आरोपों से जुड़े कानूनी पहलुओं पर आगे की कार्रवाई जारी रहेगी।

मार्च में गिरफ्तार किए गए थे सात विदेशी नागरिक

NIA ने मार्च 2026 में मैथ्यू वैनडाइक और छह यूक्रेनी नागरिकों को गिरफ्तार किया था। वैनडाइक को 13 मार्च को कोलकाता एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया गया था। वहीं यूक्रेन के छह नागरिकों पेट्रो हुर्बा, तारास स्लिवियाक, इवान सुखमानोव्स्की, मारियन स्टेफांकीव, मैक्सिम गोंचारुक और विक्टर कामिन्स्की को दिल्ली और लखनऊ के एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया गया था। NIA के आरोप के मुताबिक, यह समूह म्यांमार गया था और वहां सक्रिय जातीय सशस्त्र समूहों को हथियारों के इस्तेमाल और ड्रोन संचालन की ट्रेनिंग देने में शामिल था। जांच एजेंसी का दावा है कि आरोपियों ने जरूरी परमिट के बिना मिजोरम में प्रवेश किया और वहां से कथित तौर पर अवैध तरीके से म्यांमार में दाखिल हुए। NIA के अनुसार, म्यांमार पहुंचने के बाद आरोपियों का संपर्क वहां सक्रिय जातीय सशस्त्र समूहों से हुआ। एजेंसी का आरोप है कि इन समूहों को हथियारों के इस्तेमाल और ड्रोन युद्ध से जुड़ी ट्रेनिंग दी गई। जांच एजेंसी ने यह भी दावा किया था कि प्रशिक्षण के लिए यूरोप से ड्रोन मंगाए गए थे।

चार्जशीट में नहीं लगाई गईं UAPA की धाराएं

मामले में शुरुआत में आरोपियों के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA की धाराएं भी लगाई गई थीं। इनमें कथित आतंकवादी गतिविधियों की साजिश से संबंधित प्रावधान शामिल थे। हालांकि, सितंबर की शुरुआत में दाखिल NIA की चार्जशीट में UAPA की धाराएं शामिल नहीं की गईं। चार्जशीट में आरोपियों के खिलाफ आप्रवासन और विदेशी अधिनियम से जुड़े प्रावधानों के तहत भारत में प्रवेश और ठहरने से संबंधित कथित उल्लंघनों के आरोप लगाए गए। हालांकि, NIA ने यह स्पष्ट किया कि चार्जशीट दाखिल होने का मतलब यह नहीं है कि मामले में कथित आतंकी एंगल की जांच पूरी हो गई है। एजेंसी ने कहा है कि जांच के दौरान नए सबूत सामने आने पर आगे सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की जा सकती है।

म्यांमार में कथित संपर्क की जांच जारी

NIA अभी भी आरोपियों और म्यांमार में सक्रिय सशस्त्र समूहों के बीच कथित संपर्क की जांच कर रही है। एजेंसी इस पहलू की भी जांच कर रही है कि क्या यह समूह म्यांमार में किसी नागरिक विमान पर हुए कथित ड्रोन हमले से जुड़ा था। हालांकि, इस संबंध में जांच एजेंसी की ओर से जिस विशेष घटना का उल्लेख किया गया, उसकी पूरी जानकारी तत्काल स्पष्ट नहीं हुई है। इसलिए मैथ्यू वैनडाइक को डिफॉल्ट जमानत मिलने के बावजूद मामले की जांच खत्म नहीं हुई है। अगर जांच में कथित आतंकी गतिविधियों या अन्य गंभीर अपराधों से जुड़े नए सबूत सामने आते हैं, तो NIA कानून के तहत आगे की कार्रवाई कर सकती है।

अमेरिका में भी उठा था गिरफ्तारी का मामला

मैथ्यू वैनडाइक की गिरफ्तारी का मामला अमेरिका में भी चर्चा में रहा। उनके परिवार की ओर से अमेरिकी प्रशासन से मामले में हस्तक्षेप की अपील किए जाने की जानकारी सामने आई थी। अमेरिकी अधिकारियों ने सामान्य कांसुलर प्रक्रिया के तहत भारतीय अधिकारियों के सामने यह मामला उठाया था। हालांकि, वैनडाइक के खिलाफ भारतीय एजेंसियों की जांच अपनी कानूनी प्रक्रिया के तहत जारी है।

कौन हैं मैथ्यू वैनडाइक?

मैथ्यू वैनडाइक अमेरिकी नागरिक हैं और अलग-अलग देशों में सशस्त्र संघर्षों से जुड़े रहे हैं। उन्हें 2011 में लीबिया के गृहयुद्ध के दौरान पहचान मिली थी। वह तत्कालीन मुअम्मर गद्दाफी सरकार के खिलाफ लड़ने वाली ताकतों से जुड़े थे। संघर्ष के दौरान उन्हें गद्दाफी की सेना ने पकड़ लिया था और बाद में युद्धबंदी के रूप में रखा गया था। गद्दाफी शासन के पतन के बाद उन्हें रिहा किया गया। इसके बाद वैनडाइक ने इराक में इस्लामिक स्टेट के खिलाफ लड़ाई में शामिल होने की बात भी कही थी। रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद 2022 में उनके यूक्रेनी नागरिकों और सैन्य कर्मियों को प्रशिक्षण देने से जुड़े होने की जानकारी सामने आई। वैनडाइक Sons of Liberty International नाम के संगठन के संस्थापक भी हैं, जो खुद को सुरक्षा और सैन्य प्रशिक्षण उपलब्ध कराने वाला संगठन बताता है।


फिलहाल अदालत के आदेश के बाद वैनडाइक को डिफॉल्ट जमानत मिल गई है, लेकिन म्यांमार में कथित सशस्त्र समूहों से संपर्क, ट्रेनिंग और ड्रोन से जुड़े आरोपों की जांच NIA द्वारा जारी है।दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट ने म्यांमार में जातीय सशस्त्र समूहों को हथियार चलाने और ड्रोन संचालन की ट्रेनिंग देने के आरोप में गिरफ्तार अमेरिकी नागरिक मैथ्यू वैनडाइक को डिफॉल्ट जमानत दे दी है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी NIA ने मार्च 2026 में वैनडाइक समेत सात विदेशी नागरिकों को इस मामले में गिरफ्तार किया था। कोर्ट ने वैनडाइक को एक लाख रुपये के बेल बॉन्ड और इतनी ही राशि की श्योरिटी पर जमानत दी है।


जमानत की शर्तों के तहत वैनडाइक को दिल्ली में ही रहना होगा और जांच एजेंसी के बुलाने पर पूछताछ या जांच में शामिल होना होगा। कोर्ट में वैनडाइक की ओर से दलील दी गई कि मामले की जांच निर्धारित कानूनी अवधि के भीतर पूरी नहीं की गई और चार्जशीट दाखिल करने में देरी हुई। इसी आधार पर उन्होंने डिफॉल्ट बेल की मांग की थी। कोर्ट ने माना कि जांच में देरी के आधार पर मामले में गिरफ्तार छह यूक्रेनी नागरिक भी डिफॉल्ट जमानत के हकदार हैं। इससे मामले में अन्य आरोपियों के लिए भी जमानत का रास्ता खुल सकता है। हालांकि, डिफॉल्ट जमानत का मतलब यह नहीं है कि अदालत ने आरोपों को सही या गलत ठहरा दिया है। मामले की जांच और आरोपों से जुड़े कानूनी पहलुओं पर आगे की कार्रवाई जारी रहेगी।

मार्च में गिरफ्तार किए गए थे सात विदेशी नागरिक

NIA ने मार्च 2026 में मैथ्यू वैनडाइक और छह यूक्रेनी नागरिकों को गिरफ्तार किया था। वैनडाइक को 13 मार्च को कोलकाता एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया गया था। वहीं यूक्रेन के छह नागरिकों पेट्रो हुर्बा, तारास स्लिवियाक, इवान सुखमानोव्स्की, मारियन स्टेफांकीव, मैक्सिम गोंचारुक और विक्टर कामिन्स्की को दिल्ली और लखनऊ के एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया गया था। NIA के आरोप के मुताबिक, यह समूह म्यांमार गया था और वहां सक्रिय जातीय सशस्त्र समूहों को हथियारों के इस्तेमाल और ड्रोन संचालन की ट्रेनिंग देने में शामिल था। जांच एजेंसी का दावा है कि आरोपियों ने जरूरी परमिट के बिना मिजोरम में प्रवेश किया और वहां से कथित तौर पर अवैध तरीके से म्यांमार में दाखिल हुए। NIA के अनुसार, म्यांमार पहुंचने के बाद आरोपियों का संपर्क वहां सक्रिय जातीय सशस्त्र समूहों से हुआ। एजेंसी का आरोप है कि इन समूहों को हथियारों के इस्तेमाल और ड्रोन युद्ध से जुड़ी ट्रेनिंग दी गई। जांच एजेंसी ने यह भी दावा किया था कि प्रशिक्षण के लिए यूरोप से ड्रोन मंगाए गए थे।

चार्जशीट में नहीं लगाई गईं UAPA की धाराएं

मामले में शुरुआत में आरोपियों के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA की धाराएं भी लगाई गई थीं। इनमें कथित आतंकवादी गतिविधियों की साजिश से संबंधित प्रावधान शामिल थे। हालांकि, सितंबर की शुरुआत में दाखिल NIA की चार्जशीट में UAPA की धाराएं शामिल नहीं की गईं। चार्जशीट में आरोपियों के खिलाफ आप्रवासन और विदेशी अधिनियम से जुड़े प्रावधानों के तहत भारत में प्रवेश और ठहरने से संबंधित कथित उल्लंघनों के आरोप लगाए गए। हालांकि, NIA ने यह स्पष्ट किया कि चार्जशीट दाखिल होने का मतलब यह नहीं है कि मामले में कथित आतंकी एंगल की जांच पूरी हो गई है। एजेंसी ने कहा है कि जांच के दौरान नए सबूत सामने आने पर आगे सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की जा सकती है।

म्यांमार में कथित संपर्क की जांच जारी

NIA अभी भी आरोपियों और म्यांमार में सक्रिय सशस्त्र समूहों के बीच कथित संपर्क की जांच कर रही है। एजेंसी इस पहलू की भी जांच कर रही है कि क्या यह समूह म्यांमार में किसी नागरिक विमान पर हुए कथित ड्रोन हमले से जुड़ा था। हालांकि, इस संबंध में जांच एजेंसी की ओर से जिस विशेष घटना का उल्लेख किया गया, उसकी पूरी जानकारी तत्काल स्पष्ट नहीं हुई है। इसलिए मैथ्यू वैनडाइक को डिफॉल्ट जमानत मिलने के बावजूद मामले की जांच खत्म नहीं हुई है। अगर जांच में कथित आतंकी गतिविधियों या अन्य गंभीर अपराधों से जुड़े नए सबूत सामने आते हैं, तो NIA कानून के तहत आगे की कार्रवाई कर सकती है।

अमेरिका में भी उठा था गिरफ्तारी का मामला

मैथ्यू वैनडाइक की गिरफ्तारी का मामला अमेरिका में भी चर्चा में रहा। उनके परिवार की ओर से अमेरिकी प्रशासन से मामले में हस्तक्षेप की अपील किए जाने की जानकारी सामने आई थी। अमेरिकी अधिकारियों ने सामान्य कांसुलर प्रक्रिया के तहत भारतीय अधिकारियों के सामने यह मामला उठाया था। हालांकि, वैनडाइक के खिलाफ भारतीय एजेंसियों की जांच अपनी कानूनी प्रक्रिया के तहत जारी है।

कौन हैं मैथ्यू वैनडाइक?

मैथ्यू वैनडाइक अमेरिकी नागरिक हैं और अलग-अलग देशों में सशस्त्र संघर्षों से जुड़े रहे हैं। उन्हें 2011 में लीबिया के गृहयुद्ध के दौरान पहचान मिली थी। वह तत्कालीन मुअम्मर गद्दाफी सरकार के खिलाफ लड़ने वाली ताकतों से जुड़े थे। संघर्ष के दौरान उन्हें गद्दाफी की सेना ने पकड़ लिया था और बाद में युद्धबंदी के रूप में रखा गया था। गद्दाफी शासन के पतन के बाद उन्हें रिहा किया गया। इसके बाद वैनडाइक ने इराक में इस्लामिक स्टेट के खिलाफ लड़ाई में शामिल होने की बात भी कही थी। रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद 2022 में उनके यूक्रेनी नागरिकों और सैन्य कर्मियों को प्रशिक्षण देने से जुड़े होने की जानकारी सामने आई। वैनडाइक Sons of Liberty International नाम के संगठन के संस्थापक भी हैं, जो खुद को सुरक्षा और सैन्य प्रशिक्षण उपलब्ध कराने वाला संगठन बताता है। फिलहाल अदालत के आदेश के बाद वैनडाइक को डिफॉल्ट जमानत मिल गई है, लेकिन म्यांमार में कथित सशस्त्र समूहों से संपर्क, ट्रेनिंग और ड्रोन से जुड़े आरोपों की जांच NIA द्वारा जारी है।