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मुजफ्फरपुर: 4 साल बाद जिंदा मिला ‘मृतक’ सोनू l
बिहार के मुजफ्फरपुर में चार साल पुराने कथित हत्याकांड की जांच में नया मोड़ सामने आया है। जिस सोनू कुमार की हत्या की एफआईआर दर्ज हुई थी, वह 17 सितंबर 2026 को खुद देवरिया थाने पहुंच गया। पुलिस पूछताछ में उसने कथित तौर पर प्रेम प्रसंग के चलते अपनी मौत का झूठा नाटक रचने की बात बताई। उसके मोबाइल से परिवार को खून से सने सिर की तस्वीर और हत्या की कहानी वाला ऑडियो भेजा गया था, जिसके बाद पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज किया था।

बिहार के मुजफ्फरपुर में चार साल से पुलिस के लिए पहेली बने कथित हत्याकांड की कहानी अचानक पूरी तरह बदल गई। जिस युवक सोनू कुमार की हत्या को लेकर पुलिस जांच कर रही थी, वह 17 सितंबर 2026 को खुद देवरिया थाने पहुंच गया। पूछताछ में सामने आया कि सोनू ने कथित तौर पर अपनी मौत की झूठी कहानी तैयार की थी और परिवार तथा पुलिस को गुमराह करने के लिए हत्या का नाटक रचा था। मामला मुजफ्फरपुर के देवरिया थाना क्षेत्र से जुड़ा है। सोनू कुमार मूल रूप से गोपालगंज जिले के थावे थाना क्षेत्र का रहने वाला है। जानकारी के मुताबिक, वह 6 नवंबर 2022 को दुकान का सामान खरीदने के लिए करीब 50 हजार रुपये लेकर पटना जाने की बात कहकर घर से निकला था। इसके बाद वह अचानक लापता हो गया।
सोनू के घर नहीं लौटने पर उसके भाई धीरज प्रसाद श्रीवास्तव ने 9 नवंबर को थावे थाने में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई। इसी बीच परिवार के व्हाट्सऐप पर सोनू के मोबाइल नंबर से एक ऑडियो और सिर से खून निकलने की तस्वीर भेजी गई। ऑडियो में कथित तौर पर बताया गया कि कुछ लोगों ने उसके साथ मारपीट की, पैसे और बैग लूट लिए और उसकी हत्या कर दी। इस संदेश के बाद मामला सिर्फ गुमशुदगी तक सीमित नहीं रहा। मुजफ्फरपुर के देवरिया थाने में कांड संख्या 25/23 के तहत हत्या का मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने सोनू की तलाश और मामले की जांच के लिए विशेष टीम बनाई। कई स्तर पर जांच और संभावित ठिकानों पर तलाश के बावजूद सोनू का कोई ठोस सुराग नहीं मिला। करीब चार साल तक पुलिस के रिकॉर्ड में यह मामला एक कथित हत्या के रूप में बना रहा।
प्रेम प्रसंग से जुड़ी जांच में खुली कहानी
मामले की जांच के दौरान सोनू के निजी जीवन से जुड़ा एक दूसरा मामला सामने आया। थावे थाने में एक युवती की मां ने उसके अपहरण की शिकायत दर्ज कराई थी। इस मामले में कांड संख्या 324/22 दर्ज की गई थी। पुलिस ने दोनों मामलों के बीच संभावित संबंध को ध्यान में रखते हुए जांच आगे बढ़ाई। जांच में कथित तौर पर पता चला कि सोनू उस युवती को लेकर दूसरे राज्य चला गया था। इसके बाद पुलिस को शक हुआ कि उसकी गुमशुदगी और कथित हत्या की कहानी के पीछे कोई साजिश हो सकती है। पुलिस के अनुसार, जांच आगे बढ़ने और लगातार दबिश दिए जाने के बीच सोनू आखिरकार 17 सितंबर को खुद देवरिया थाने पहुंच गया। इसके बाद उससे पूछताछ की गई और उसकी गुमशुदगी से लेकर कथित हत्या तक की पूरी कहानी सामने आई।
परिवार को भेजी थी खून से सनी तस्वीर
एसडीपीओ सरैया अभिजीत कौर के मुताबिक, सोनू के लापता होने के बाद उसके मोबाइल से परिवार को एक ऑडियो और खून से सनी तस्वीर भेजी गई थी। इन्हीं संदेशों के आधार पर हत्या का मामला दर्ज किया गया था। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि तस्वीर और ऑडियो कैसे तैयार किए गए और इसमें किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका थी या नहीं। पूछताछ में सोनू ने कथित तौर पर बताया कि वह अपने प्रेम प्रसंग को परिवार से छिपाना चाहता था और उनसे दूर रहना चाहता था। इसी वजह से उसने अपनी हत्या की झूठी कहानी तैयार करने की साजिश रची। उसने ऐसा माहौल बनाया जिससे परिवार को विश्वास हो जाए कि उसके साथ लूटपाट के बाद हत्या कर दी गई है। अब पुलिस इस मामले में सोनू की ओर से कथित तौर पर झूठी हत्या की कहानी तैयार करने, पुलिस को गुमराह करने और पहले दर्ज मामले से जुड़े कानूनी पहलुओं की जांच कर रही है। पुलिस यह भी जांच करेगी कि इस पूरी साजिश में सोनू के अलावा किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका थी या नहीं। चार साल तक जिस मामले में पुलिस एक कथित मृतक की तलाश करती रही, उसी युवक के अचानक थाने पहुंचने से जांच की पूरी दिशा बदल गई है। अब पुलिस पुराने हत्या मामले और गुमशुदगी से जुड़े सभी रिकॉर्ड की दोबारा समीक्षा कर रही है।
