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गणेशोत्सव में DJ और लाउडस्पीकर के शोर पर बॉम्बे हाईकोर्ट में PIL, 2016 के आदेश लागू न होने का आरोप
गणेशोत्सव के दौरान DJ, लाउडस्पीकर और ढोल-ताशों से होने वाले ध्वनि प्रदूषण को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि 2016 में हाईकोर्ट द्वारा ध्वनि प्रदूषण को लेकर जारी किए गए अनिवार्य निर्देशों का प्रभावी तरीके से पालन नहीं हो रहा है। खासकर पुणे जिले में धार्मिक मंडलों और नागरिक समूहों के बीच बढ़ते विवाद का हवाला देते हुए निर्देशों के सख्त अनुपालन की मांग की गई है।

गणेश चतुर्थी के दौरान DJ, लाउडस्पीकर और ढोल से होने वाले ध्वनि प्रदूषण को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए हाईकोर्ट द्वारा 2016 में दिए गए निर्देशों का महाराष्ट्र में प्रभावी तरीके से पालन नहीं हो रहा है, खासकर पुणे जिले में।
याचिका में कहा गया है कि धार्मिक मंडलों और नागरिक समूहों के बीच ध्वनि प्रदूषण को लेकर विवाद की स्थिति बन रही है। याचिकाकर्ता ने राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों को 2016 के फैसले के निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने की मांग की है। मुख्य न्यायाधीश महेश चंद्र त्रिपाठी और न्यायमूर्ति अद्वैत सेठना की खंडपीठ ने इस PIL को 5 अक्टूबर 2026 को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई है। वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल साखरे ने 18 सितंबर को मामले की तत्काल सुनवाई की मांग करते हुए इसे पीठ के समक्ष रखा था।
याचिका में 2016 के Mahesh Vijay Bedekar बनाम State of Maharashtra मामले में दिए गए निर्देशों का हवाला दिया गया है। उस मामले में अदालत ने धार्मिक और अन्य प्रमुख आयोजनों के दौरान ध्वनि प्रदूषण की रोकथाम, निगरानी और शिकायतों पर कार्रवाई से संबंधित कई निर्देश दिए थे। PIL में दावा किया गया है कि कई वर्षों के बाद भी आवासीय, वाणिज्यिक, औद्योगिक और साइलेंस जोन में ध्वनि स्तर की प्रभावी निगरानी नहीं हो रही है और पर्याप्त कैलिब्रेटेड साउंड-लेवल मीटर तथा अन्य उपकरणों की उपलब्धता और तैनाती में कमी है। याचिका में 3 सितंबर को पुणे में ध्वनि प्रदूषण के खिलाफ आवाज उठाने वाले कार्यकर्ता विद्यानंद बापट के साथ कथित मारपीट की घटना का भी उल्लेख किया गया है। याचिकाकर्ता के अनुसार, ध्वनि प्रदूषण को लेकर नागरिक समूहों और धार्मिक मंडलों के बीच बढ़ता विवाद कानून-व्यवस्था की स्थिति पैदा कर सकता है। अब इस मामले में 5 अक्टूबर को हाईकोर्ट में सुनवाई होगी।
