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आरक्षण नियमों की अनदेखी कर शिक्षक नियुक्ति को Deemed Approval से नहीं बनाया जा सकता वैध, इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शिक्षक नियुक्ति से जुड़े मामले में स्पष्ट किया है कि अनिवार्य आरक्षण शर्तों का पालन किए बिना की गई नियुक्ति को ‘Deemed Approval’ के आधार पर वैध नहीं ठहराया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त बेसिक स्कूल (जूनियर हाई स्कूल) नियमावली, 1978 के नियम 10(5)(iii) का इस्तेमाल नियुक्ति में हुई अनिवार्य आरक्षण संबंधी कमी को दूर करने के लिए नहीं किया जा सकता।

Sonali20 सित. 2026, 06:06 PM IST
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आरक्षण नियमों की अनदेखी कर शिक्षक नियुक्ति को Deemed Approval से नहीं बनाया जा सकता वैध, इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शिक्षक नियुक्ति से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि किसी पद के लिए निर्धारित अनिवार्य आरक्षण शर्तों का पालन किए बिना की गई नियुक्ति को ‘Deemed Approval’ यानी मानी गई स्वीकृति के आधार पर वैध नहीं ठहराया जा सकता। न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान की पीठ ने स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त बेसिक स्कूल (जूनियर हाई स्कूल) (शिक्षकों की भर्ती एवं सेवा शर्तें) नियमावली, 1978 के नियम 10(5)(iii) में मौजूद Deemed Approval का प्रावधान नियुक्ति प्रक्रिया में अनिवार्य आरक्षण नियमों की अनदेखी को ठीक नहीं कर सकता।

आरक्षण की अनिवार्य शर्तों का पालन जरूरी

कोर्ट के समक्ष विवाद एक शिक्षक की नियुक्ति से संबंधित था। नियुक्ति प्रक्रिया में संबंधित पद के लिए लागू आरक्षण संबंधी अनिवार्य शर्तों का पालन नहीं किया गया था। इसके बावजूद नियुक्ति को Deemed Approval के आधार पर वैध मानने का दावा किया गया। हाईकोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने कहा कि नियुक्ति के लिए लागू मूल वैधानिक शर्तों का पालन करना जरूरी है। यदि नियुक्ति ही अनिवार्य आरक्षण प्रावधानों के विपरीत की गई है, तो बाद में लागू होने वाली Deemed Approval की व्यवस्था उस मूल खामी को समाप्त नहीं कर सकती।

Deemed Approval का मतलब सभी कमियां माफ होना नहीं

अदालत ने नियम 10(5)(iii) के तहत Deemed Approval की प्रकृति पर भी विचार किया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी निर्धारित अवधि में सक्षम प्राधिकारी द्वारा निर्णय नहीं लिए जाने से उत्पन्न मानी गई स्वीकृति का अर्थ यह नहीं है कि नियुक्ति से जुड़ी सभी अनिवार्य वैधानिक शर्तें स्वतः पूरी हो गईं। पीठ ने माना कि Deemed Approval को ऐसी नियुक्ति को वैध बनाने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता, जो कानून में निर्धारित आरक्षण शर्तों का उल्लंघन करके की गई हो।

आरक्षण नियमों की अनदेखी नहीं हो सकती

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में नियुक्ति प्रक्रिया में वैधानिक नियमों के पालन को महत्वपूर्ण माना। अदालत के अनुसार, किसी शिक्षक की नियुक्ति केवल प्रशासनिक स्वीकृति या मानी गई स्वीकृति के आधार पर वैध नहीं हो जाती, यदि नियुक्ति के समय पद से जुड़ी अनिवार्य आरक्षण शर्तों का पालन ही नहीं किया गया हो। इस फैसले से यह स्पष्ट होता है कि मान्यता प्राप्त जूनियर हाई स्कूलों में शिक्षक नियुक्ति करते समय संबंधित आरक्षण प्रावधानों का पालन अनिवार्य है और Deemed Approval का प्रावधान इन अनिवार्य शर्तों का विकल्प नहीं हो सकता।