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मरीजों के इलाज का हवाला देकर कोर्ट के आदेश की अवहेलना नहीं कर सकते डॉक्टर, बॉम्बे हाईकोर्ट ने माना गंभीर अवमानना

बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा है कि डॉक्टर मरीजों के इलाज की जरूरत का हवाला देकर सुरक्षित संपत्ति खाली करने के अदालत के स्पष्ट आदेश की अवहेलना नहीं कर सकते। कोर्ट ने कहा कि आदेश के बावजूद अस्पताल में मरीजों को भर्ती करना जानबूझकर की गई अवहेलना को और गंभीर बनाता है। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति श्रीराम वी. शिरसाट और न्यायमूर्ति मनीष की खंडपीठ ने की।

Sonali20 सित. 2026, 06:06 PM IST
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मरीजों के इलाज का हवाला देकर कोर्ट के आदेश की अवहेलना नहीं कर सकते डॉक्टर, बॉम्बे हाईकोर्ट ने माना गंभीर अवमानना

बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में स्पष्ट किया है कि डॉक्टर केवल इस आधार पर अदालत के आदेश का पालन करने से बच नहीं सकते कि अस्पताल में मरीजों का इलाज चल रहा है। अदालत ने कहा कि यदि किसी सुरक्षित संपत्ति (secured property) को खाली करने का स्पष्ट न्यायिक आदेश दिया गया है, तो मरीजों को अस्पताल में भर्ती करके उस आदेश की अवहेलना करना गंभीर अवमानना माना जा सकता है। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति श्रीराम वी. शिरसाट और न्यायमूर्ति मनीष की खंडपीठ ने की। कोर्ट के समक्ष मामला उस संपत्ति से जुड़ा था, जिसे सुरक्षित संपत्ति के रूप में लेकर उसे खाली करने का निर्देश दिया गया था।

कोर्ट के आदेश के बावजूद अस्पताल में मरीज भर्ती

मामले में अदालत के पूर्व आदेश के तहत संबंधित डॉक्टरों को संपत्ति खाली करनी थी। हालांकि, डॉक्टरों की ओर से मरीजों के इलाज की जरूरत का हवाला देते हुए आदेश का पालन न करने का प्रयास किया गया। अदालत ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। पीठ ने कहा कि किसी व्यक्ति का डॉक्टर होना उसे न्यायालय के आदेश का पालन करने से छूट नहीं देता। यदि अदालत ने किसी संपत्ति को खाली करने का स्पष्ट निर्देश दिया है, तो संबंधित पक्ष को उसका पालन करना होगा।

मरीजों को भर्ती करना भी आदेश की अवहेलना

हाईकोर्ट ने विशेष रूप से इस बात पर गौर किया कि अदालत के निर्देश के बावजूद अस्पताल में मरीजों को भर्ती किया गया। कोर्ट ने इसे केवल तकनीकी उल्लंघन नहीं माना, बल्कि न्यायिक आदेश की जानबूझकर अवहेलना के रूप में देखा। पीठ ने टिप्पणी की कि अदालत के स्पष्ट निर्देश के बावजूद मरीजों को अस्पताल में भर्ती करना अवमानना को और गंभीर बनाता है। डॉक्टर होने या मरीजों के इलाज की जिम्मेदारी को अदालत के आदेश की अवहेलना का आधार नहीं बनाया जा सकता।

पेशेवर जिम्मेदारी से न्यायिक आदेश ऊपर नहीं

अदालत के रुख का मुख्य आधार यह रहा कि पेशेवर जिम्मेदारियां महत्वपूर्ण हो सकती हैं, लेकिन वे किसी पक्ष को बाध्यकारी न्यायिक आदेश की अनदेखी करने का अधिकार नहीं देतीं। यदि आदेश के अनुपालन में व्यावहारिक कठिनाई थी, तो संबंधित पक्ष को अदालत के समक्ष राहत या समय मांगना चाहिए था, न कि आदेश की अवहेलना करनी चाहिए थी। हाईकोर्ट ने इस मामले में न्यायालय के आदेशों के पालन की आवश्यकता पर जोर दिया और डॉक्टरों द्वारा मरीजों के इलाज की आड़ में संपत्ति खाली करने के आदेश की अवहेलना को गंभीरता से लिया।

कोर्ट के आदेश का पालन जरूरी

बॉम्बे हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि न्यायिक आदेश सभी संबंधित पक्षों के लिए बाध्यकारी होते हैं। किसी मानवीय या पेशेवर आवश्यकता का हवाला देकर आदेश की जानबूझकर अवहेलना नहीं की जा सकती। अदालत ने डॉक्टरों की ओर से मरीजों को भर्ती करने की कार्रवाई को आदेश की अवहेलना को और गंभीर बनाने वाला आचरण माना।