women-safety

शादी का झांसा देकर दुष्कर्म के आरोप में सूरत के वकील ने गुजरात हाईकोर्ट से याचिका वापस ली, हाईकोर्ट ने कहा- मामले के गुण-दोष पर नहीं की कोई टिप्पणी

गुजरात हाईकोर्ट ने शादी का कथित झांसा देकर महिला अधिवक्ता से दुष्कर्म के मामले में आरोपी सूरत के अधिवक्ता को अपनी एफआईआर रद्द करने की याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी। न्यायमूर्ति एमके ठक्कर ने 17 सितंबर 2026 को याचिका निस्तारित करते हुए स्पष्ट किया कि कोर्ट ने मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं की है।

Sonali21 सित. 2026, 09:54 PM IST
खबर शेयर करें:
शादी का झांसा देकर दुष्कर्म के आरोप में सूरत के वकील ने गुजरात हाईकोर्ट से याचिका वापस ली, हाईकोर्ट ने कहा- मामले के गुण-दोष पर नहीं की कोई टिप्पणी


अहमदाबाद:

 गुजरात हाईकोर्ट ने 17 सितंबर 2026 को सूरत के एक अधिवक्ता के खिलाफ दर्ज दुष्कर्म के मामले को रद्द करने की मांग वाली याचिका को वापस लेने की अनुमति दे दी। न्यायमूर्ति एमके ठक्कर की पीठ ने याचिका वापस लिए जाने के बाद उसे निस्तारित कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसने मामले के गुण-दोष पर कोई विचार नहीं किया है।

आरोप है कि आरोपी अधिवक्ता ने एक महिला अधिवक्ता के साथ शादी का वादा कर शारीरिक संबंध बनाए। दोनों के बीच वर्ष 2018 से संबंध होने की बात सामने आई है। महिला अधिवक्ता के अनुसार, यह संबंध करीब आठ वर्षों तक चला और मार्च 2026 में उसे पता चला कि आरोपी ने किसी दूसरी महिला से शादी कर ली है। आरोपी अधिवक्ता ने गुजरात हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर उसके खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने की मांग की थी। उसने मामले में गिरफ्तारी से पहले जमानत के लिए ट्रायल कोर्ट का भी रुख किया था, लेकिन यह आवेदन खारिज कर दिया गया था।


शिकायतकर्ता महिला अधिवक्ता ने आरोपी के इस दावे का विरोध किया कि दोनों के बीच संबंध पूरी तरह सहमति से थे। उसने आरोप लगाया कि आरोपी ने वर्ष 2018 में उससे मुलाकात के समय अपनी मुस्लिम पहचान छिपाई और अपना नाम 'रोहन' बताया था। महिला अधिवक्ता ने यह भी आरोप लगाया कि अगस्त 2018 में आरोपी ने उसके कार्यालय में सिंदूर लगाने और मंगलसूत्र पहनाने के जरिए उसके साथ एक तरह का 'प्रतीकात्मक विवाह' किया था। इसके बाद आरोपी ने कथित तौर पर उससे शादी करने का भरोसा देते हुए कई वर्षों तक उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। शिकायतकर्ता के अनुसार, आरोपी ने अपनी धार्मिक पहचान सामने आने के बाद भी उससे शादी करने का आश्वासन जारी रखा। उसने कथित तौर पर कहा था कि वह हिंदू धर्म अपना लेगा, अपना नाम बदल लेगा और उससे शादी करेगा।


महिला ने आरोप लगाया कि बाद में उसे पता चला कि आरोपी ने 1 मार्च 2026 को किसी दूसरी महिला से शादी कर ली है। शिकायतकर्ता के मुताबिक, आरोपी ने पहले उस महिला का परिचय अपनी बहन के तौर पर कराया था। हाईकोर्ट के समक्ष शिकायतकर्ता की ओर से यह भी दलील दी गई कि मामले की जांच के चरण में एफआईआर को रद्द नहीं किया जाना चाहिए, खासकर तब जब दोनों पक्षों की ओर से रिश्ते को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हों। आरोपी ने शिकायतकर्ता द्वारा बताए गए घटनाक्रम और रिश्ते के स्वरूप पर विवाद किया। हालांकि, याचिका वापस लिए जाने के बाद हाईकोर्ट ने मामले के आरोपों की सत्यता या एफआईआर के गुण-दोष पर कोई निष्कर्ष नहीं दिया।

न्यायमूर्ति एमके ठक्कर ने याचिका वापस लेने की अनुमति देते हुए स्पष्ट किया कि अदालत ने मामले के गुण-दोष पर विचार नहीं किया है।