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NEET-UG 2026: चार मेडिकल कॉलेजों में बढ़े आरक्षण पर हाईकोर्ट की रोक, कहा- प्रथम दृष्टया अवमानना का मामला
NEET-UG 2026 में उत्तर प्रदेश के चार मेडिकल कॉलेजों में बढ़े SC आरक्षण पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। कोर्ट ने 85 में से 62 सीटें SC के लिए आरक्षित करने के आदेश को प्रथम दृष्टया अपने पुराने निर्देशों के खिलाफ माना और सरकार से जवाब मांगा है।

प्रयागराज।
NEET-UG 2026 के तहत उत्तर प्रदेश के चार सरकारी मेडिकल कॉलेजों में अनुसूचित जाति (SC) के लिए बढ़ाए गए आरक्षण को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को बड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने राज्य सरकार के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसके तहत चार मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की 85-85 सीटों में से 62 सीटें अनुसूचित जाति के उम्मीदवारों के लिए आरक्षित की गई थीं। अदालत ने प्रथम दृष्टया माना कि राज्य सरकार का यह कदम उसके पहले के निर्देशों और अदालत के समक्ष दिए गए आश्वासन के विपरीत है और इससे अवमानना का मामला बन सकता है। न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति अमिताभ कुमार राय की खंडपीठ ने यह आदेश NEET-UG 2026 में सामान्य और ईडब्ल्यूएस श्रेणी के अभ्यर्थियों की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। याचिका में उत्तर प्रदेश सरकार के 1 सितंबर 2026 के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसके तहत अंबेडकर नगर, कन्नौज, जालौन और सहारनपुर स्थित चार सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सीटों के आरक्षण का नया ढांचा लागू किया गया था।
85 सीटों में 62 SC के लिए आरक्षित
विवादित सीट मैट्रिक्स के अनुसार प्रत्येक मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की कुल 85 सीटों में से 62 सीटें अनुसूचित जाति, 5 सीटें अनुसूचित जनजाति और 11 सीटें अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए निर्धारित की गई थीं। इसके बाद केवल 7 सीटें अनारक्षित श्रेणी के लिए बचती थीं। चारों मेडिकल कॉलेजों को मिलाकर कुल 340 सीटों में 248 सीटें SC, 20 सीटें ST, 44 सीटें OBC और 28 सीटें अनारक्षित श्रेणी में रखी गई थीं।
हाईकोर्ट ने पुराने आदेशों का भी दिया हवाला
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत के सामने पहले के न्यायिक आदेशों और राज्य सरकार की ओर से दिए गए आश्वासन का भी उल्लेख हुआ। अदालत के अनुसार, संबंधित मेडिकल कॉलेजों में आरक्षण को लेकर पहले भी विवाद सामने आया था। राज्य सरकार ने अदालत के समक्ष यह आश्वासन दिया था कि शैक्षणिक सत्र 2026-27 से प्रवेश प्रक्रिया उत्तर प्रदेश के 2006 के आरक्षण कानून के अनुरूप की जाएगी। उत्तर प्रदेश के 2006 के कानून में अनुसूचित जाति के लिए 21 प्रतिशत, अनुसूचित जनजाति के लिए 2 प्रतिशत और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान बताया गया है। हाईकोर्ट ने प्रथम दृष्टया पाया कि सरकार का नया आदेश इस व्यवस्था और पहले दिए गए आश्वासन से अलग दिखाई देता है।
सरकार से 10 दिन में मांगा हलफनामा
हाईकोर्ट ने विवादित सरकारी आदेश की संबंधित धारा पर रोक लगाते हुए निर्देश दिया कि चारों मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश प्रक्रिया 2006 के आरक्षण कानून के अनुसार आगे बढ़ाई जाए। अदालत ने चिकित्सा शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव को 10 दिनों के भीतर व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत यह जानना चाहती है कि पहले दिए गए न्यायिक निर्देश और राज्य सरकार के आश्वासन के बावजूद विवादित सरकारी आदेश किस परिस्थिति में जारी किया गया। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि हलफनामे पर विचार करने के बाद यह तय किया जाएगा कि अदालत की अवमानना की कार्यवाही शुरू की जाए या नहीं। मामले की अगली सुनवाई
12 अक्टूबर 2026 को होगी।
इस आदेश का सीधा असर NEET-UG 2026 के तहत इन चार सरकारी मेडिकल कॉलेजों की एमबीबीएस सीटों की आरक्षण व्यवस्था पर पड़ेगा। फिलहाल अदालत ने संबंधित प्रावधान पर रोक लगाते हुए प्रवेश प्रक्रिया को 2006 के आरक्षण कानून के अनुरूप संचालित करने का निर्देश दिया है। अंतिम निर्णय आगे की सुनवाई में लिया जाएगा।
