government
सरकारी जमीन से कमाई की तैयारी, ₹5,000 करोड़ के प्रस्ताव आगे बढ़े
नई दिल्ली: केंद्र सरकार की अतिरिक्त और कम इस्तेमाल हो रही जमीन-बिल्डिंग को आर्थिक रूप से उपयोगी बनाने की तैयारी तेज हो गई है। NLMC ने ₹5,000 करोड़ से ज्यादा मूल्य की सरकारी परिसंपत्तियों के मॉनेटाइजेशन से जुड़े प्रस्तावों की सिफारिश की है। इसमें केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और अन्य सरकारी संस्थाओं की अतिरिक्त संपत्तियां शामिल हैं।

नई दिल्ली: केंद्र सरकार की खाली और कम इस्तेमाल हो रही जमीन-बिल्डिंग से आर्थिक मूल्य हासिल करने की प्रक्रिया को तेज किया जा रहा है। National Land Monetization Corporation (NLMC) ने 5,000 करोड़ रुपये से ज्यादा मूल्य की सरकारी परिसंपत्तियों के मॉनेटाइजेशन से जुड़े प्रस्तावों की सिफारिश की है। इसमें केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (CPSEs) और अन्य सरकारी संस्थाओं की अतिरिक्त जमीन और इमारतें शामिल हैं। यह फैसला NLMC की 18 सितंबर 2026 को हुई 21वीं बोर्ड बैठक में लिया गया।
₹5,000 करोड़ का मतलब क्या है?
यह समझना जरूरी है कि ₹5,000 करोड़ से ज्यादा वह अनुमानित परिसंपत्ति मूल्य है, जिनके मॉनेटाइजेशन के प्रस्ताव आगे बढ़ाए गए हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि सरकार को अभी या तुरंत ₹5,000 करोड़ की आय हो गई है।
मॉनेटाइजेशन का उद्देश्य ऐसी जमीन और इमारतों की आर्थिक क्षमता का इस्तेमाल करना है, जो वर्तमान में अतिरिक्त हैं या पूरी तरह उपयोग में नहीं आ रही हैं। NLMC इन परिसंपत्तियों को चिन्हित करने, उनकी जांच, मूल्यांकन और मॉनेटाइजेशन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में संबंधित सरकारी संस्थाओं के साथ काम करता है।
NLMC क्या करता है?
NLMC यानी National Land Monetization Corporation भारत सरकार की पूर्ण स्वामित्व वाली कंपनी है। यह वित्त मंत्रालय के Department of Public Enterprises (DPE) के प्रशासनिक नियंत्रण में काम करती है। इसकी मुख्य जिम्मेदारी केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और अन्य सरकारी संस्थाओं की अतिरिक्त जमीन और गैर-जरूरी या कम इस्तेमाल वाली संपत्तियों के मॉनेटाइजेशन में मदद करना है। इसका मतलब केवल जमीन बेचना नहीं है, बल्कि परिसंपत्ति की स्थिति और संभावित उपयोग के आधार पर उचित और पारदर्शी तरीके से उसका आर्थिक मूल्य हासिल करना भी है।
पहले जमीन की जांच और वैल्यूएशन
NLMC के अनुसार, मॉनेटाइजेशन की प्रक्रिया में कई चरण होते हैं। संबंधित सरकारी संस्था के साथ मिलकर पहले उपयुक्त जमीन या भवन की पहचान की जाती है। इसके बाद जरूरी Due Diligence, यानी कानूनी और अन्य जरूरी जांच, कराई जाती है। इसके बाद परिसंपत्ति का मूल्यांकन किया जाता है और उसके लिए उपयुक्त मॉनेटाइजेशन प्रक्रिया तैयार की जाती है। बोर्ड ने इन प्रक्रियाओं को तेज करने और संबंधित संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय पर जोर दिया है।
सरकारी जमीन के बेहतर इस्तेमाल पर जोर
NLMC का कहना है कि ऐसी अतिरिक्त सरकारी जमीन और इमारतें, जो लंबे समय से कम इस्तेमाल हो रही हैं, उन्हें उचित प्रक्रिया के जरिए आर्थिक रूप से उपयोगी बनाया जा सकता है। इससे सार्वजनिक परिसंपत्तियों का बेहतर इस्तेमाल करने और उनकी वैल्यू को अनलॉक करने का रास्ता खुलता है।
बोर्ड ने मॉनेटाइजेशन की प्रक्रिया में पारदर्शिता, दक्षता और उचित मूल्य प्राप्त करने पर जोर दिया है। साथ ही संबंधित मंत्रालयों, विभागों, CPSEs और सरकारी संस्थाओं के साथ समन्वय बढ़ाने की बात कही गई है।
NLMC की RINL जमीन पर भी बड़ी कार्रवाई
NLMC की जमीन मॉनेटाइजेशन प्रक्रिया का एक उदाहरण Rashtriya Ispat Nigam Limited (RINL) की जमीन से जुड़ा है। विशाखापत्तनम स्टील प्लांट की 459 जमीनों की ई-नीलामी की तैयारी की जा रही है। इन प्लॉट्स का कुल क्षेत्रफल 93,572.21 वर्ग गज है।
इस ई-ऑक्शन से पहले 23 सितंबर को विशाखापत्तनम, 24 सितंबर को विजयवाड़ा और 25 सितंबर को हैदराबाद में निवेशक बैठकें आयोजित की जानी हैं। इन बैठकों में संभावित बोलीदाताओं को जमीन, नीलामी प्रक्रिया और पात्रता से जुड़ी जानकारी दी जाएगी।
आगे क्या होगा?
₹5,000 करोड़ से ज्यादा मूल्य वाली परिसंपत्तियों के प्रस्ताव अब मॉनेटाइजेशन प्रक्रिया के अगले चरणों में जाएंगे। इसके लिए संबंधित संपत्तियों की जांच, वैल्यूएशन और उचित प्रक्रिया तय की जाएगी। NLMC का बोर्ड इन प्रक्रियाओं को तेजी से आगे बढ़ाने और संबंधित सरकारी संस्थाओं के साथ समन्वय मजबूत करने पर जोर दे चुका है। NLMC ने अपनी वित्त वर्ष 2025-26 की Annual Financial Statements और Directors’ Report को भी बोर्ड बैठक में मंजूरी दी है।
