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बिना शपथपत्र शिकायत पर IAS अधिकारी के खिलाफ विजिलेंस जांच नहीं, राज्य विजिलेंस समिति की मंजूरी भी जरूरी: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि किसी आईएएस अधिकारी के खिलाफ केवल ऐसी शिकायत के आधार पर विजिलेंस जांच शुरू नहीं की जा सकती, जो निर्धारित शपथपत्र के साथ दाखिल न की गई हो। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि शिकायत पर आगे बढ़ने से पहले राज्य विजिलेंस समिति की मंजूरी भी आवश्यक है। कोर्ट का यह फैसला सरकारी अधिकारियों के खिलाफ शिकायत और विजिलेंस जांच की प्रक्रिया के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

Sonali21 सित. 2026, 09:55 PM IST
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बिना शपथपत्र शिकायत पर IAS अधिकारी के खिलाफ विजिलेंस जांच नहीं, राज्य विजिलेंस समिति की मंजूरी भी जरूरी: इलाहाबाद हाईकोर्ट


प्रयागराज।

 इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के एक IAS अधिकारी के खिलाफ शुरू की गई विजिलेंस जांच को रद्द करते हुए महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि राज्य के क्लास-I या ग्रुप-A अधिकारी के खिलाफ ऐसी शिकायत, जो निर्धारित शपथपत्र के साथ दाखिल नहीं की गई है, अपने आप में विजिलेंस जांच शुरू करने का आधार नहीं बन सकती। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि संबंधित मामले को राज्य विजिलेंस समिति के समक्ष रखकर आवश्यक मंजूरी की प्रक्रिया का पालन किया जाना जरूरी है।

न्यायालय ने यह फैसला उस याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया, जिसमें याचिकाकर्ता ने अपने खिलाफ शुरू की गई विजिलेंस जांच को चुनौती दी थी। याचिकाकर्ता का पक्ष था कि शिकायत निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप नहीं थी और इसके बावजूद उसके आधार पर विजिलेंस जांच शुरू कर दी गई। मामले में यह भी सवाल उठा कि क्या राज्य सरकार द्वारा ग्रुप-A अधिकारियों के खिलाफ शिकायतों से संबंधित शासनादेशों में तय प्रक्रिया का पालन किया गया था।


ग्रुप-A अधिकारियों के खिलाफ शिकायत की प्रक्रिया

हाईकोर्ट ने संबंधित शासनादेशों का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य के ग्रुप-A अधिकारियों के खिलाफ शिकायतों के मामले में एक निर्धारित प्रक्रिया लागू होती है। ऐसी शिकायत के साथ आवश्यक शपथपत्र होना जरूरी है। इसके अलावा, शिकायत पर विजिलेंस जांच आगे बढ़ाने से पहले राज्य विजिलेंस समिति की भूमिका भी महत्वपूर्ण है।

अदालत ने पाया कि जिस शिकायत के आधार पर संबंधित अधिकारी के खिलाफ विजिलेंस जांच शुरू की गई, वह निर्धारित शपथपत्र के साथ समर्थित नहीं थी। इसके अलावा, मामले को राज्य विजिलेंस समिति के समक्ष मंजूरी के लिए रखे जाने की आवश्यक प्रक्रिया का भी पालन नहीं किया गया था।


सिर्फ शिकायत के आधार पर जांच नहीं

हाईकोर्ट ने कहा कि किसी वरिष्ठ सरकारी अधिकारी के खिलाफ शिकायत प्राप्त होना अपने आप में विजिलेंस जांच शुरू करने के लिए पर्याप्त आधार नहीं है। जब सरकार ने इस तरह की शिकायतों के लिए विशेष प्रक्रिया निर्धारित की है, तो संबंधित अधिकारियों को उसी प्रक्रिया का पालन करना होगा। अदालत ने यह भी माना कि निर्धारित प्रक्रिया का उद्देश्य अधिकारियों के खिलाफ की जाने वाली शिकायतों की प्रारंभिक जांच और कार्रवाई को एक निश्चित व्यवस्था के तहत रखना है। इसलिए बिना आवश्यक शपथपत्र और निर्धारित मंजूरी प्रक्रिया के किसी शिकायत को विजिलेंस जांच का आधार नहीं बनाया जा सकता।


विजिलेंस जांच की कार्रवाई रद्द

मामले में हाईकोर्ट ने संबंधित अधिकारी के खिलाफ शुरू की गई विजिलेंस जांच को रद्द कर दिया। अदालत के इस आदेश का आधार यह रहा कि शिकायत निर्धारित आवश्यकताओं को पूरा नहीं करती थी और राज्य विजिलेंस समिति की मंजूरी से संबंधित प्रक्रिया का भी पालन नहीं किया गया था। कोर्ट के फैसले से यह स्पष्ट होता है कि उत्तर प्रदेश में ग्रुप-A या क्लास-I अधिकारियों के खिलाफ विजिलेंस शिकायतों पर कार्रवाई करते समय सरकार को संबंधित शासनादेशों में निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होगा। शिकायतकर्ता को आवश्यक शपथपत्र देना होगा और जहां नियमों के तहत राज्य विजिलेंस समिति की मंजूरी आवश्यक है, वहां उस प्रक्रिया को भी पूरा करना होगा। हाईकोर्ट का यह फैसला सरकारी अधिकारियों के खिलाफ विजिलेंस कार्रवाई में प्रक्रियात्मक नियमों के महत्व को रेखांकित करता है। अदालत ने शिकायत की सत्यता पर कोई व्यापक निष्कर्ष देने के बजाय इस बात पर जोर दिया कि जांच शुरू करने से पहले निर्धारित कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया का पालन किया जाना आवश्यक है।