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महिलाओं की सुविधाओं से नेतृत्व तक: AAWI ने अध्यक्ष पद महिलाओं के लिए किया आरक्षित, अगला कार्यकाल महिला अधिवक्ता संभालेंगी
एडवोकेट्स एसोसिएशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया (AAWI) ने महिला अधिवक्ताओं के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने की दिशा में अहम कदम उठाया है। एसोसिएशन ने हर तीसरे कार्यकाल में अध्यक्ष पद महिला अधिवक्ता के लिए आरक्षित करने का फैसला किया है। खास बात यह है कि यह व्यवस्था आगामी चुनाव से ही लागू होगी।

मुंबई:
कभी बॉम्बे हाईकोर्ट के बार रूम में महिलाओं के लिए बुनियादी शौचालय की सुविधा की मांग करने वाली महिला अधिवक्ताओं के संघर्ष से लेकर अब शीर्ष नेतृत्व में प्रतिनिधित्व हासिल करने तक, महिलाओं के लिए एक महत्वपूर्ण बदलाव सामने आया है। एडवोकेट्स एसोसिएशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया (AAWI) ने अपने अध्यक्ष पद को महिलाओं के लिए आरक्षित करने का फैसला किया है। एसोसिएशन ने यह निर्णय स्वेच्छा से लिया है और इसे आगामी चुनाव से ही लागू करने का फैसला किया गया है। 20 अगस्त को हुई विशेष आम सभा की बैठक में AAWI ने हर तीसरे कार्यकाल में अध्यक्ष पद महिला अधिवक्ता के लिए आरक्षित करने का प्रस्ताव मंजूर किया। AAWI भारत की सबसे पुरानी पंजीकृत बार संस्थाओं में से एक है। इस फैसले के साथ एसोसिएशन ने बार में महिलाओं के नेतृत्व को संस्थागत रूप देने की दिशा में कदम उठाया है।
इस प्रस्ताव को वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल साखरे की ओर से 16 जुलाई को AAWI अध्यक्ष प्रशांत रेलेकर को दिए गए औपचारिक प्रतिनिधित्व के बाद गति मिली। साखरे ने सुप्रीम कोर्ट के डिक्शा एन. अमृतेश और SCBA बनाम बी.डी. कौशिक मामलों में दिए गए फैसलों का हवाला देते हुए AAWI से महिला प्रतिनिधित्व बढ़ाने की दिशा में उदाहरण पेश करने का आग्रह किया था। इसके बाद 21 जुलाई 2026 को अध्यक्ष प्रशांत रेलेकर की अध्यक्षता में नौ सदस्यीय विशेष संवैधानिक समिति का गठन किया गया। समिति ने महिला आरक्षण के विभिन्न विकल्पों पर विचार किया। वरिष्ठ अधिवक्ता नीता कर्णिक के अनुसार, शुरुआत में वैकल्पिक कार्यकाल में आरक्षण का विचार था, लेकिन 30 प्रतिशत प्रतिनिधित्व के लिहाज से हर तीसरे कार्यकाल में आरक्षण को व्यावहारिक विकल्प माना गया। समिति ने प्रस्ताव की भाषा पर भी विशेष ध्यान दिया। प्रारंभिक मसौदे में महिला के लिए आरक्षित कार्यकाल के अलावा अन्य कार्यकालों के लिए 'पुरुष' शब्द का इस्तेमाल किया गया था। समिति ने इसे बदलकर 'सामान्य' या 'ओपन' करने का सुझाव दिया, ताकि भविष्य में LGBTQ+ समुदाय के सदस्य भी चुनाव लड़ सकें। समिति में वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव पाटिल, संजीव गोर्वाडकर, अतुल दामले, अनीता अग्रवाल, सुरेल शाह, दीप चव्हाण और नीता कर्णिक के अलावा अधिवक्ता उदय वारुंजीकर और अनीता कास्टेलिनो शामिल थे। वारुंजीकर ने कार्य मसौदा तैयार किया, जबकि दीप चव्हाण ने उसमें सुधार किया।
समिति ने 100 प्रतिशत एकमुश्त आरक्षण और 30 प्रतिशत आरक्षण सहित कई सुझावों पर चर्चा की। कुछ सदस्यों ने कोषाध्यक्ष पद भी महिलाओं के लिए आरक्षित करने का सुझाव दिया। अंतिम रिपोर्ट में अध्यक्ष पद को हर तीसरे कार्यकाल में महिला के लिए आरक्षित करने और नौ सदस्यीय कार्यकारी समिति में महिलाओं के लिए चार सीटें रखने की सिफारिश की गई। विशेष आम सभा ने समिति की रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया और इसके कार्यान्वयन को तत्काल प्रभाव से आगे बढ़ाया। इसका मतलब है कि AAWI का अगला अध्यक्ष पद महिला अधिवक्ता के लिए आरक्षित रहेगा।
बैठक के दौरान महिला अध्यक्ष के सामने देर रात होने वाले कार्यक्रमों में भाग लेने जैसी व्यावहारिक चुनौतियों का मुद्दा भी उठाया गया। वरिष्ठ महिला अधिवक्ताओं ने इन चिंताओं को खारिज करते हुए कहा कि मुंबई में महिलाएं अपने पेशेवर जीवन के साथ रात में यात्रा और अन्य जिम्मेदारियां भी संभालती हैं। वरिष्ठ अधिवक्ता दीप चव्हाण ने इस बदलाव को महिला अधिवक्ताओं की कई पीढ़ियों के संघर्ष से जोड़ते हुए कहा कि जिन महिलाओं ने कभी बार रूम में बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष किया था, उनके लिए यह बदलाव एक बड़ी उपलब्धि है। AAWI अध्यक्ष प्रशांत रेलेकर ने कहा कि समय बदल चुका है और समान अवसर को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह फैसला सभी सदस्यों पर बाध्यकारी है और एसोसिएशन इसका पूरी तरह सम्मान करता है।
