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34 बिलों का भुगतान हुआ, ब्याज नहीं दिया, उल्हासनगर कोर्ट ने कंपनी के पक्ष में सुनाया फैसला; 3.20 लाख रुपये देने का आदेश

उल्हासनगर सिविल कोर्ट ने बकाया ब्याज की वसूली से जुड़े मामले में रीजेंसी इस्पात प्राइवेट लिमिटेड के पक्ष में फैसला सुनाते हुए धीरज एंटरप्राइजेज को 3,20,453 रुपये चुकाने का आदेश दिया है। अदालत ने इस रकम पर मुकदमा दायर करने की तारीख से वास्तविक भुगतान तक 12 प्रतिशत सालाना ब्याज देने का भी निर्देश दिया। कोर्ट ने 24 प्रतिशत संविदात्मक ब्याज की मांग के बजाय 12 प्रतिशत ब्याज को उचित माना।

Sonali21 सित. 2026, 09:56 PM IST
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34 बिलों का भुगतान हुआ, ब्याज नहीं दिया, उल्हासनगर कोर्ट ने कंपनी के पक्ष में सुनाया फैसला; 3.20 लाख रुपये देने का आदेश

उल्हासनगर के सिविल जज जूनियर डिवीजन कोर्ट ने बकाया ब्याज की वसूली से जुड़े एक मामले में कंपनी के पक्ष में फैसला सुनाते हुए प्रतिवादी को 3,20,453 रुपये अदा करने का आदेश दिया है। अदालत ने इस रकम पर मुकदमा दायर करने की तारीख से वास्तविक भुगतान तक 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने का भी निर्देश दिया है। यह फैसला सिविल जज जूनियर डिवीजन रोहिणी ए. जाधव ने 19 सितंबर 2026 को सुनाया। मामला रीजेंसी इस्पात प्राइवेट लिमिटेड और धीरज एंटरप्राइजेज के बीच था। कंपनी की ओर से अधिकृत प्रतिनिधि किशोर सुरेशलाल लुंड ने वसूली का मुकदमा दाखिल किया था। कंपनी का कहना था कि उसने प्रतिवादी को अलग-अलग समय पर विभिन्न बिलों के जरिए सामान बेचा और सप्लाई किया था। कंपनी के अनुसार, मई 2018 से नवंबर 2020 के बीच जारी 34 बिलों की कुल मूल राशि 2,39,08,979 रुपये थी। प्रतिवादी ने इन बिलों की मूल रकम का भुगतान कर दिया, लेकिन भुगतान में देरी की अवधि का ब्याज नहीं चुकाया। कंपनी ने बताया कि बिलों की शर्तों के अनुसार विलंबित भुगतान पर 24 प्रतिशत सालाना ब्याज निर्धारित था। इसी आधार पर कंपनी ने 1 अप्रैल 2021 को सात डेबिट नोट जारी किए, जिनमें कुल 3,20,453 रुपये ब्याज के रूप में मांगे गए थे। इसके बाद कंपनी ने 28 मार्च 2022 को आरपीएडी के माध्यम से कानूनी नोटिस भेजकर बकाया ब्याज और आगे का ब्याज चुकाने की मांग की। नोटिस प्राप्त होने के बावजूद प्रतिवादी ने रकम का भुगतान नहीं किया। इसके बाद कंपनी ने 3,20,453 रुपये की वसूली और मुकदमा दायर करने की तारीख से 24 प्रतिशत वार्षिक ब्याज की मांग करते हुए अदालत में मुकदमा दाखिल किया। अदालत के रिकॉर्ड के अनुसार, प्रतिवादी को 30 दिसंबर 2024 को समन प्राप्त हुआ, लेकिन वह अदालत में उपस्थित नहीं हुआ। इसके बाद 8 जनवरी 2025 को अदालत ने मामले को प्रतिवादी के खिलाफ एकतरफा चलाने का आदेश दिया।


सुनवाई के दौरान कंपनी ने अपने अधिकृत प्रतिनिधि किशोर सुरेशलाल लुंड की गवाही पेश की। कंपनी की ओर से 34 टैक्स इनवॉयस, सात डेबिट नोट, लेजर अकाउंट, कानूनी नोटिस, डाक रसीद और अन्य दस्तावेज अदालत में पेश किए गए। प्रतिवादी की ओर से कोई प्रतिवाद नहीं होने के कारण कंपनी की मौखिक और दस्तावेजी गवाही को चुनौती नहीं दी गई। अदालत ने माना कि इनवॉयस में 24 प्रतिशत सालाना ब्याज की शर्त स्पष्ट रूप से दर्ज थी और प्रतिवादी ने सामान स्वीकार करते समय इन शर्तों पर कोई आपत्ति नहीं जताई थी। हालांकि, अदालत ने मुकदमा दायर होने के बाद 24 प्रतिशत ब्याज को उचित नहीं माना। कोर्ट ने सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 34 के तहत ब्याज निर्धारित करने के न्यायिक विवेक का इस्तेमाल करते हुए 24 प्रतिशत की जगह 12 प्रतिशत सालाना ब्याज को उचित माना। अदालत ने कहा कि मुकदमा दायर होने के बाद 24 प्रतिशत ब्याज जारी रखना अधिक बोझिल होगा और मौजूदा व्यावसायिक परिस्थितियों को देखते हुए 12 प्रतिशत ब्याज न्यायसंगत रहेगा। अदालत ने मुकदमा लागत सहित आंशिक रूप से मंजूर करते हुए धीरज एंटरप्राइजेज को रीजेंसी इस्पात प्राइवेट लिमिटेड को 3,20,453 रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया। इस राशि पर मुकदमा दायर करने की तारीख से वास्तविक भुगतान तक 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा। कोर्ट ने इसी के अनुसार डिक्री तैयार करने का निर्देश दिया।