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सरकारी नौकरी का झांसा देकर 12 लाख की ठगी, दो लोगों पर केस

बदलापुर में सरकारी विभाग में कनिष्ठ लिपिक की नौकरी दिलाने का झांसा देकर 12 लाख रुपये लेने का मामला सामने आया है। शिकायत के मुताबिक, शशिकांत चांदणे और भूषण वध ने तीन युवकों को नौकरी दिलाने का भरोसा देकर रकम ली। मेडिकल जांच भी कराई गई, लेकिन नौकरी नहीं मिली और पैसे भी वापस नहीं किए गए।

Kashish Rai21 सित. 2026, 09:56 PM IST
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सरकारी नौकरी का झांसा देकर 12 लाख की ठगी, दो लोगों पर केस

बदलापुर में सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर कथित ठगी का मामला सामने आया है। पुलिस को दी गई शिकायत के मुताबिक, शशिकांत चांदणे और भूषण वध ने तीन युवकों को सरकारी विभाग में कनिष्ठ लिपिक के पद पर नौकरी दिलाने का भरोसा देकर कुल 12 लाख रुपये लिए। आरोप है कि रकम लेने के बाद युवकों की मेडिकल जांच तक कराई गई, लेकिन कई महीने बीतने के बावजूद नौकरी नहीं लगाई गई और पैसे भी वापस नहीं किए गए। मामला बदलापुर पूर्व पुलिस थाना क्षेत्र से जुड़ा है। 16 सितंबर 2026 को योगेश सुभाष बव, उम्र 38 वर्ष, ने पुलिस के सामने अपना बयान दर्ज कराया। शिकायतकर्ता के मुताबिक, उनके पिता सुभाष बव की शशिकांत चांदणे से कई वर्षों से पहचान थी। दोनों के बीच अक्सर मुलाकात होती थी और चांदणे का उनके घर भी आना-जाना था।


शिकायत के अनुसार, दिसंबर 2022 में शशिकांत चांदणे उनके घर आए और उन्होंने दावा किया कि उन्होंने पहले भी कई युवाओं को सरकारी विभाग में नौकरी लगवाई है। उन्होंने कहा कि यदि किसी युवक की सरकारी नौकरी के लिए परीक्षा आदि में पात्रता है तो उसे कनिष्ठ लिपिक के पद पर नौकरी दिलाई जा सकती है। इसके बाद शिकायतकर्ता के परिवार ने अपने रिश्तेदार पंकज बाळे की नौकरी के बारे में चांदणे से बात की। आरोप है कि चांदणे ने नौकरी दिलाने के लिए कुल 12 लाख रुपये की मांग की। इसमें 4 लाख रुपये पहले और बाकी 8 लाख रुपये नौकरी का आदेश जारी होने के बाद देने की बात कही गई।


शिकायत के मुताबिक, इसके बाद पंकज बाळे और उसके पिता महेश बाळे को पुणे स्थित सरकारी विभाग के कार्यालय में बुलाया गया। वहां शशिकांत चांदणे और भूषण वध मौजूद थे। आरोप है कि नौकरी के संबंध में बातचीत के बाद 4 लाख रुपये में से 2 लाख रुपये नकद और बाकी रकम चेक के जरिए दी गई। चांदणे ने कथित तौर पर दो लाख रुपये के दो चेक भी दिए थे। इसके कुछ समय बाद राज बव और विनाश पवार ने भी शिकायतकर्ता के परिवार से संपर्क किया। उन्होंने अपने बच्चों सिद्धांत बव और सिद्धेश बव के लिए सरकारी विभाग में नौकरी लगवाने की बात कही। शिकायत के मुताबिक, चांदणे और भूषण वध ने इन दोनों युवकों के लिए भी 12-12 लाख रुपये की मांग की।


आरोप है कि इस प्रक्रिया में राज बव ने अपने बेटे की नौकरी के लिए शिकायतकर्ता के पिता के बैंक खाते में 1.70 लाख रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर किए। इसके बाद शिकायतकर्ता के पिता ने यह रकम चांदणे के बैंक खाते में जमा कराई। वहीं, बाकी रकम में से 2 लाख रुपये नकद और चेक के माध्यम से दिए गए। बाद में चांदणे और भूषण वध ने कथित तौर पर राज बव और विनाश पवार से भी संपर्क कर रकम ली। शिकायतकर्ता के मुताबिक, तीनों युवकों की नौकरी के लिए आरोपियों को कुल 12 लाख रुपये दिए गए। पैसे लेने के बाद आरोपियों ने युवकों की मेडिकल जांच कराने की बात कही। करीब 10 से 15 दिन बाद उन्हें जे.जे. अस्पताल में मेडिकल जांच के लिए बुलाया गया। शिकायत के अनुसार, शिकायतकर्ता के पिता, दोनों आरोपी और तीनों युवक मेडिकल जांच के लिए अस्पताल पहुंचे।


मेडिकल जांच के बाद भी जब नौकरी का आदेश नहीं आया तो परिवार ने आरोपियों से संपर्क किया। शिकायत में कहा गया है कि आरोपियों ने बाद में फिर से 6 लाख रुपये की मांग की। इसके बाद संबंधित परिवारों से और रकम जुटाई गई और शिकायतकर्ता के पिता के जरिए आरोपियों तक पहुंचाई गई। समय बीतने के बावजूद तीनों युवकों को नौकरी नहीं मिली। आरोप है कि आरोपी लगातार नौकरी का आदेश जल्द आने की बात कहते रहे। कई महीने गुजरने के बाद जब परिवार ने पैसे वापस मांगने शुरू किए तो आरोपियों ने कथित तौर पर फोन उठाना भी कम कर दिया। शिकायतकर्ता ने बताया कि नौकरी नहीं मिलने के कारण संबंधित परिवारों ने उनसे भी पैसे वापस करने की मांग की, क्योंकि उन्होंने आरोपियों पर भरोसा करके रकम दी थी। इसके बाद उन्होंने लोन लेकर सिद्धेश बव और विनाश पवार को 2-2 लाख रुपये यानी कुल 4 लाख रुपये वापस किए।


शिकायत में आरोप लगाया गया है कि शशिकांत चांदणे और भूषण वध ने आपस में कथित मिलीभगत कर सरकारी नौकरी दिलाने का भरोसा दिया और 12 लाख रुपये लिए। नौकरी नहीं मिलने और रकम वापस नहीं किए जाने के बाद परिवार ने पुलिस से कार्रवाई की मांग की। बयान के मुताबिक, शिकायतकर्ता के पिता ने पहले पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद उनकी तबीयत खराब हो गई और उन्हें पैरालिसिस का अटैक आने के बाद बोलने और चलने में परेशानी होने लगी। इसी वजह से 16 सितंबर को उनका बेटा योगेश पुलिस थाने पहुंचा और पूरे मामले के संबंध में अपना बयान दर्ज कराया। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामले की जांच शुरू कर दी है। अब पुलिस बैंक लेनदेन, चेक, मेडिकल जांच और आरोपियों के साथ हुई बातचीत समेत अन्य दस्तावेजों की जांच कर रही है। नौकरी दिलाने के नाम पर रकम लेने के आरोपों की भी जांच की जा रही है।