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VIP Industries में बड़ा फंडरेज, ₹500 करोड़ जुटाने की तैयारी

VIP Industries ने वित्त वर्ष 2026-27 में ₹500 करोड़ तक की पूंजी जुटाने की योजना को मंजूरी दी है। कंपनी इक्विटी, डेट या कन्वर्टिबल सिक्योरिटीज जैसे विकल्पों के जरिए रकम जुटा सकती है। प्रस्तावित फंड का इस्तेमाल कारोबार की ग्रोथ, वर्किंग कैपिटल और कंपनी की जरूरतों को पूरा करने में किया जा सकता है।

Neha Sharma21 सित. 2026, 09:56 PM IST
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VIP Industries में बड़ा फंडरेज, ₹500 करोड़ जुटाने की तैयारी

मुंबई: लगेज और ट्रैवल बैग बनाने वाली कंपनी VIP Industries ने वित्त वर्ष 2026-27 में ₹500 करोड़ तक की पूंजी जुटाने की योजना को मंजूरी दी है। कंपनी के बोर्ड ने 18 सितंबर 2026 को हुई बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी। कंपनी यह रकम एक या एक से ज्यादा चरणों में जुटा सकती है।


शेयर, डेट और कन्वर्टिबल सिक्योरिटीज से जुटाई जा सकती है रकम

कंपनी के मुताबिक ₹500 करोड़ तक की राशि जुटाने के लिए अलग-अलग विकल्पों का इस्तेमाल किया जा सकता है। इनमें इक्विटी शेयर, डेट सिक्योरिटीज, कन्वर्टिबल सिक्योरिटीज, डिपॉजिटरी रिसीट्स, विदेशी मुद्रा परिवर्तनीय बॉन्ड, वारंट और प्रेफरेंस शेयर शामिल हैं। फंड जुटाने का तरीका कंपनी की आगे की मंजूरियों और बाजार की परिस्थितियों के आधार पर तय किया जाएगा।


VIP Industries पब्लिक इश्यू, राइट्स इश्यू, क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट (QIP), प्रेफरेंशियल इश्यू या डेट इश्यू जैसे विकल्पों पर भी जा सकती है। हालांकि, अभी फंड जुटाने की अंतिम प्रक्रिया, कीमत और समयसीमा तय नहीं की गई है।


ग्रोथ और वर्किंग कैपिटल के लिए इस्तेमाल होगी रकम

कंपनी ने कहा है कि प्रस्तावित फंड का इस्तेमाल चल रही ग्रोथ योजनाओं को आगे बढ़ाने, वर्किंग कैपिटल की जरूरत पूरी करने और अपनी क्षमताओं को मजबूत करने में किया जाएगा। VIP Industries का कहना है कि वह लगेज और ट्रैवल से जुड़े बाजार में उभरते अवसरों का फायदा उठाने के लिए अपनी कारोबारी क्षमता बढ़ाना चाहती है।


कंपनी के लिए क्यों अहम है यह फंडरेज

VIP Industries ने कई चुनौतीपूर्ण तिमाहियों के बाद अपने कारोबार को फिर से ग्रोथ की दिशा में ले जाने की बात कही है। ऐसे में ₹500 करोड़ तक की नई पूंजी कंपनी को कारोबार के लिए जरूरी फंड उपलब्ध कराने और विस्तार से जुड़ी योजनाओं को आगे बढ़ाने में मदद कर सकती है। कंपनी के बोर्ड की मंजूरी के बाद अब फंड जुटाने की वास्तविक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। किस माध्यम से कितनी रकम जुटाई जाएगी, इसका अंतिम फैसला आने वाले समय में संबंधित मंजूरियों और कंपनी के निर्णय के बाद स्पष्ट होगा।