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धार्मिक जुलूसों में पटाखे, लेजर लाइट और तेज संगीत पर बॉम्बे हाईकोर्ट सख्त, पूरे महाराष्ट्र में लगाया प्रतिबंध

बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र में धार्मिक जुलूसों के दौरान पटाखों, लेजर लाइट, तेज संगीत और शोर पैदा करने वाले वाद्य यंत्रों के इस्तेमाल पर सख्ती दिखाई है। कोर्ट ने धर्म और त्योहार की परवाह किए बिना सभी धार्मिक जुलूसों में इन पर प्रतिबंध लगाने का निर्देश दिया है। उल्लंघन पर ₹1 लाख जमा कराने और अभियोजन की कार्रवाई के भी निर्देश दिए गए हैं।

Sonali25 सित. 2026, 06:04 PM IST
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धार्मिक जुलूसों में पटाखे, लेजर लाइट और तेज संगीत पर बॉम्बे हाईकोर्ट सख्त, पूरे महाराष्ट्र में लगाया प्रतिबंध

मुंबई। 

बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र में धार्मिक जुलूसों के दौरान ध्वनि और वायु प्रदूषण को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए पटाखों, लेजर लाइट, तेज संगीत और ऐसे वाद्य यंत्रों के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगा दिया है, जिनसे शोर प्रदूषण होता है। अदालत ने कहा कि राज्य में त्योहार और धार्मिक आयोजनों को अब अधिक ‘सभ्य’ तरीके से मनाया जाना चाहिए।

न्यायालय ने यह निर्देश धर्म या त्योहार के आधार पर किसी भेदभाव के बिना सभी धार्मिक जुलूसों पर लागू किया है। यह मामला अदालत द्वारा स्वत: संज्ञान लेकर शुरू की गई कार्यवाही से संबंधित है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि धार्मिक आस्था और त्योहार मनाने का अधिकार महत्वपूर्ण है, लेकिन इसका प्रयोग इस तरह नहीं किया जा सकता जिससे दूसरे लोगों को अत्यधिक शोर, प्रकाश या अन्य प्रकार के प्रदूषण का सामना करना पड़े। अदालत ने धार्मिक जुलूसों के दौरान पटाखों के इस्तेमाल पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया है। इसके साथ ही लेजर लाइट और तेज आवाज में बजने वाले संगीत पर भी रोक लगाई गई है। ऐसे किसी भी संगीत वाद्य यंत्र के इस्तेमाल की अनुमति नहीं होगी, जिससे निर्धारित सीमा से अधिक ध्वनि प्रदूषण होता हो। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ये निर्देश किसी एक धर्म या समुदाय तक सीमित नहीं हैं। महाराष्ट्र में आयोजित होने वाले सभी धार्मिक जुलूसों और सभी त्योहारों के दौरान इनका पालन करना होगा। अदालत ने उल्लंघन की स्थिति में सख्त कार्रवाई का भी संकेत दिया है। निर्देशों के अनुसार नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई और अभियोजन की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। अदालत ने संबंधित मामलों में ₹1 लाख की राशि जमा कराने का भी निर्देश दिया है।


हाईकोर्ट ने प्रशासन और पुलिस को यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी है कि धार्मिक जुलूसों के दौरान अदालत के निर्देशों का पालन हो। अधिकारियों को ध्वनि प्रदूषण और अन्य प्रतिबंधित गतिविधियों पर निगरानी रखने तथा उल्लंघन होने पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। अदालत का यह आदेश ऐसे समय आया है जब महाराष्ट्र में विभिन्न धार्मिक त्योहारों और जुलूसों के दौरान तेज संगीत, पटाखों और लेजर लाइट के इस्तेमाल को लेकर पर्यावरण एवं सार्वजनिक स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं सामने आती रही हैं। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में इस बात पर जोर दिया कि धार्मिक उत्सव मनाते समय दूसरों के अधिकारों और सार्वजनिक व्यवस्था का भी ध्यान रखा जाना चाहिए। अदालत के अनुसार, त्योहारों की खुशी दूसरों के लिए परेशानी या प्रदूषण का कारण नहीं बननी चाहिए। इस आदेश के बाद महाराष्ट्र में धार्मिक जुलूसों के दौरान पटाखे, लेजर लाइट, तेज संगीत और शोर पैदा करने वाले वाद्य यंत्रों के इस्तेमाल को लेकर प्रशासन की जिम्मेदारी बढ़ गई है। अब पुलिस और स्थानीय प्रशासन को इन निर्देशों के अनुपालन पर विशेष निगरानी रखनी होगी।