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महाराष्ट्र के 265 तालुके सूखा प्रभावित, फसल मुआवजे पर विपक्ष का सरकार से सवाल
महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के 358 में से 265 तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित किया है। यह राज्य के करीब 74% तालुकों के बराबर है। सरकार ने कर्ज पुनर्गठन, बिजली बिल और भूमि राजस्व में राहत समेत कई उपायों का ऐलान किया है, लेकिन फसल नुकसान के लिए तत्काल नकद मुआवजे की राशि अभी घोषित नहीं की गई है। कांग्रेस और एनसीपी (एसपी) ने इसी मुद्दे पर सरकार से किसानों के खातों में तुरंत आर्थिक सहायता देने की मांग की है।

मुंबई: महाराष्ट्र में लंबे समय से जारी बारिश की कमी और सूखे के हालात के बीच राज्य सरकार ने 358 में से 265 तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित किया है। इन तालुकों में राज्य के करीब 74 प्रतिशत प्रशासनिक क्षेत्र शामिल हैं। सरकार का यह फैसला 2026 के खरीफ सीजन में फसलों पर पड़े असर और लंबे समय तक चले बारिश के अंतराल के आकलन के बाद लिया गया है।
सरकार की ओर से जारी राहत उपायों में फसल ऋण का पुनर्गठन, कृषि ऋण की वसूली स्थगित करना, भूमि राजस्व में रियायत और कृषि पंपों के बिजली बिल में राहत शामिल है। इसके अलावा सूखा प्रभावित क्षेत्रों में पेयजल, पशुओं के लिए चारा और पानी, खाद्यान्न तथा जरूरत के मुताबिक पानी के टैंकर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत अतिरिक्त काम उपलब्ध कराने और स्कूल-कॉलेज के छात्रों की परीक्षा फीस में राहत का भी प्रावधान किया गया है।
हालांकि, फसल नुकसान के लिए सीधे किसानों के खातों में कितनी वित्तीय सहायता दी जाएगी, इसका फैसला अभी नहीं हुआ है। सरकार ने जिला कलेक्टरों को प्रभावित क्षेत्रों में फसल नुकसान का पंचनामा और विस्तृत आकलन शुरू करने के निर्देश दिए हैं। रिपोर्ट मिलने के बाद फसल नुकसान पर वित्तीय सहायता के लिए अलग शासन निर्णय जारी किया जाएगा।
इसी बिंदु को लेकर विपक्ष ने फडणवीस सरकार पर निशाना साधा है। महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने मांग की है कि नुकसान का विस्तृत कागजी आकलन पूरा होने का इंतजार किए बिना किसानों के खातों में प्रति हेक्टेयर 1 लाख रुपये की तत्काल सहायता जमा की जाए। उन्होंने सरकार के घोषित उपायों को किसानों की मौजूदा जरूरतों की तुलना में अपर्याप्त बताया है। यह विपक्ष की राजनीतिक मांग और सरकार की आलोचना है, न कि सरकार द्वारा स्वीकृत मुआवजे की राशि।
एनसीपी (शरद पवार) गुट ने भी सवाल उठाया है कि सरकार द्वारा घोषित राहत में तत्काल नकद फसल मुआवजा शामिल नहीं है और पूछा है कि नुकसान का आकलन पूरा होने के बाद किसानों तक आर्थिक सहायता कब पहुंचेगी।
सरकार का पक्ष क्या है?
सरकार का तर्क है कि फसल नुकसान की वास्तविक मात्रा तय करने के लिए मैदानी पंचनामा और सत्यापन जरूरी है। महाराष्ट्र के राहत एवं पुनर्वसन विभाग की निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार अधिकारियों द्वारा नुकसान का पंचनामा किया जाता है, प्रस्ताव जिला और संभागीय स्तर से सरकार को भेजे जाते हैं और मंजूरी के बाद पात्र किसानों को DBT के जरिए सहायता दी जाती है।
इसलिए मौजूदा स्थिति को इस तरह समझना अधिक सटीक है कि सरकार ने सूखा राहत के कई तत्काल उपाय घोषित किए हैं, लेकिन इस सूखा घोषणा के तहत फसल नुकसान के लिए अतिरिक्त नकद सहायता की राशि अभी तय नहीं की है। विपक्ष इसी देरी को किसानों के लिए बड़ी चिंता बताते हुए तत्काल भुगतान की मांग कर रहा है।
राज्य में सूखे का असर खास तौर पर मराठवाड़ा समेत कई क्षेत्रों में देखा जा रहा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार प्रभावित 265 तालुकों में छत्रपति संभाजीनगर संभाग के 74, अमरावती के 56, नासिक के 49, नागपुर के 39, पुणे के 35 और कोंकण के 12 तालुके शामिल हैं।
