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राजपाल यादव को सुप्रीम कोर्ट की कड़ी फटकार, कहा- “आपकी जगह जेल में है”, मंगलवार तक भुगतान का आदेश

चेक बाउंस मामले में बॉलीवुड एक्टर राजपाल यादव को सुप्रीम कोर्ट से एक बार फिर कड़ी फटकार लगी है। अदालत ने पाया कि पहले दी गई दो हफ्ते की मोहलत खत्म होने के बावजूद राजपाल यादव की ओर से तय भुगतान नहीं किया गया। सुनवाई के दौरान उनके वकील ने 50 लाख रुपये के डिमांड ड्राफ्ट की जानकारी दी, लेकिन कोर्ट ने इसकी वास्तविकता और बैंक प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए। अदालत ने अब राजपाल यादव को मंगलवार तक भुगतान करने का निर्देश दिया है और मामले की अगली सुनवाई बुधवार को तय की है। मामला मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े सात चेक बाउंस मामलों का है। कंपनी के मुताबिक, राजपाल यादव ने 2010 में अपनी फिल्म बनाने के लिए 5 करोड़ रुपये की आर्थिक मदद ली थी। बाद में रकम लौटाने के लिए जारी किए गए चेक बाउंस हो गए। दिल्ली हाई कोर्ट ने जुलाई 2026 में उनकी दोषसिद्धि बरकरार रखते हुए तीन महीने की सजा सुनाई थी।

Kashish Rai06 अक्टू. 2026, 07:24 PM IST
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राजपाल यादव को सुप्रीम कोर्ट की कड़ी फटकार, कहा- “आपकी जगह जेल में है”, मंगलवार तक भुगतान का आदेश

बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। चेक बाउंस से जुड़े पुराने मामले में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने अभिनेता को कड़ी फटकार लगाई और अदालत के निर्देशों का पालन नहीं करने पर नाराजगी जताई। सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि राजपाल यादव को भुगतान के लिए जो समय दिया गया था, वह खत्म हो चुका है, लेकिन तय समय के भीतर भुगतान नहीं किया गया। इसके बाद अदालत ने उन्हें मंगलवार तक भुगतान करने का निर्देश दिया है।


यह मामला मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड की ओर से दायर सात चेक बाउंस मामलों से जुड़ा है। शिकायतकर्ता कंपनी का आरोप है कि साल 2010 में राजपाल यादव ने अपनी फिल्म ‘अता पता लापता’ बनाने के लिए उससे 5 करोड़ रुपये की आर्थिक मदद ली थी। फिल्म के निर्माण के बाद रकम लौटाने को लेकर विवाद शुरू हुआ और बाद में भुगतान के लिए जारी किए गए सात चेक कथित तौर पर बाउंस हो गए। सुनवाई के दौरान राजपाल यादव के वकील ने अदालत को बताया कि 50 लाख रुपये का डिमांड ड्राफ्ट तैयार किया गया है और वह बैंक में जमा है, जिसकी प्रक्रिया चल रही है। 


हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस पर सवाल उठाते हुए कहा कि उसे यह नहीं पता कि डिमांड ड्राफ्ट वास्तव में वैध है या नहीं। कोर्ट ने भुगतान को लेकर पहले दिए गए निर्देशों का पालन नहीं होने पर भी नाराजगी जताई। सुनवाई के दौरान राजपाल यादव के वकील की ओर से शिकायतकर्ता कंपनी की आर्थिक स्थिति का जिक्र किया गया। इस पर जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने तीखी टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि शिकायतकर्ता कंपनी उनसे ज्यादा अमीर हो सकती है, लेकिन जिस रकम का भुगतान किया जाना है, उसके लिहाज से वह नुकसान में है। कोर्ट ने राजपाल यादव के वकील को अदालत में बोलते समय सावधानी बरतने की भी नसीहत दी और अभिनेता के व्यवहार पर कड़ी टिप्पणी की।


शिकायतकर्ता कंपनी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अजीत सिन्हा ने भी राजपाल यादव पर अदालत के आदेशों का बार-बार पालन नहीं करने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि कंपनी का उद्देश्य सिर्फ अपनी रकम वापस पाना है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अभिनेता ने पहले भी भुगतान को लेकर कई प्रतिबद्धताएं कीं, लेकिन उन्हें पूरा नहीं किया गया। सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल राजपाल यादव की अपील को खारिज करने से परहेज किया है। अदालत ने कहा कि अगर अपील खारिज कर दी जाती है, तो इससे शिकायतकर्ता कंपनी के पैसे वापस मिलने की संभावना प्रभावित हो सकती है। इसलिए कोर्ट फिलहाल भुगतान की दिशा में आगे बढ़ने का मौका दे रहा है। अब राजपाल यादव को मंगलवार तक भुगतान करना होगा और इसके बाद बुधवार को मामले की अगली सुनवाई होगी।

कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद?

इस मामले की शुरुआत साल 2010 में हुई थी, जब राजपाल यादव ने अपनी फिल्म ‘अता पता लापता’ के निर्माण के लिए मुरली प्रोजेक्ट्स से 5 करोड़ रुपये की आर्थिक मदद ली थी। शिकायतकर्ता के अनुसार, बाद में रकम वापस करने के लिए 2013 में सात चेक जारी किए गए, जिनमें प्रत्येक की राशि करीब 1.05 करोड़ रुपये थी। ये चेक बाउंस हो गए और इसके बाद मामला अदालत तक पहुंच गया। कंपनी का यह भी कहना है कि 2012 में दोनों पक्षों के बीच एक समझौता हुआ था, जिसमें राजपाल यादव, उनकी पत्नी और उनकी कंपनी ने ब्याज समेत करीब 11 करोड़ रुपये चुकाने पर सहमति जताई थी। लंबे समय तक भुगतान नहीं होने के कारण यह विवाद कई अदालतों तक पहुंचा और रकम तथा कानूनी कार्रवाई का सिलसिला आगे बढ़ता गया।

दिल्ली हाई कोर्ट ने सुनाई थी तीन महीने की सजा

जुलाई 2026 में दिल्ली हाई कोर्ट ने राजपाल यादव की दोषसिद्धि बरकरार रखते हुए सात चेक बाउंस मामलों में उन्हें तीन महीने की साधारण जेल की सजा सुनाई थी। अदालत ने प्रत्येक मामले में शिकायतकर्ता को 1.05 करोड़ रुपये का भुगतान करने का निर्देश भी दिया था। कोर्ट ने यह भी कहा था कि पहले जमा की गई रकम को देय राशि में समायोजित किया जाएगा। इससे पहले मामले में राजपाल यादव और उनकी पत्नी राधा यादव को निचली अदालत से भी सजा मिल चुकी थी। हाई कोर्ट ने उनके खिलाफ चल रहे मामलों में बार-बार किए गए भुगतान संबंधी वादों और उन्हें पूरा नहीं करने के मुद्दे पर भी गंभीर टिप्पणी की थी। बाद में राजपाल यादव ने हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।


सितंबर 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने राजपाल यादव को भुगतान के लिए अंतिम अवसर देते हुए दो सप्ताह का समय दिया था। उस समय कोर्ट ने 2 करोड़ रुपये जमा करने और भुगतान की ठोस योजना पेश करने को कहा था। साथ ही उनकी सरेंडर से जुड़ी राहत को आगे की सुनवाई तक बढ़ाया गया था। अब एक बार फिर भुगतान तय समय पर नहीं होने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने राजपाल यादव को मंगलवार तक भुगतान करने का निर्देश दिया है और बुधवार को मामले की अगली सुनवाई रखी है। ऐसे में अब सबकी नजर इस बात पर है कि अभिनेता की ओर से तय समय में भुगतान किया जाता है या नहीं और अगली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट इस मामले में क्या रुख अपनाता है।