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दिल्ली-NCR में महिला सुरक्षा पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, पेट्रोलिंग से लेकर कैब-बस ड्राइवरों के वेरिफिकेशन तक के निर्देश
दिल्ली-NCR में महिलाओं के खिलाफ यौन अपराधों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, पुलिस को पेट्रोलिंग बढ़ाने, कैब-बस ड्राइवरों का सत्यापन करने और अवैध शराब ठिकानों पर कार्रवाई के निर्देश दिए। कोर्ट ने कहा कि सुरक्षा व्यवस्था का असर जमीन पर दिखना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने संवेदनशील इलाकों, स्कूल-कॉलेजों और उन क्षेत्रों में जहां छात्राओं और युवतियों की आवाजाही अधिक है, पुलिस की संयुक्त पेट्रोलिंग मजबूत करने को कहा है। CCTV कैमरों की रियल-टाइम निगरानी और पुलिस पेट्रोलिंग पर नजर रखने के लिए कंट्रोल रूम या ‘वार रूम’ जैसी व्यवस्था को प्रभावी बनाने पर भी जोर दिया गया। अदालत ने पुलिसकर्मियों को निवारक पुलिसिंग (Preventive Policing) की ट्रेनिंग देने और वरिष्ठ अधिकारियों से बीट पेट्रोलिंग की नियमित समीक्षा कराने की बात कही। सार्वजनिक परिवहन को लेकर भी कोर्ट ने सख्ती दिखाई। कैब, टैक्सी, ऑटो तथा सरकारी और निजी बसों के ड्राइवरों और सहायकों का सत्यापन अनिवार्य करने के निर्देश दिए गए हैं। केवल सत्यापित व्यक्ति ही वाहन चला सकें, जबकि ड्राइवर और सहायक का नाम और फोटो यात्रियों को दिखाई देने वाली जगह पर होना चाहिए। बिना सत्यापन किसी व्यक्ति को वाहन सौंपने और अनधिकृत तरीके से वाहन सब-लेट करने पर भी रोक लगाने को कहा गया है। इसके लिए नियमित और अचानक जांच की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं। कोर्ट ने सार्वजनिक जगहों पर मौजूद छोटी लेकिन गंभीर सुरक्षा कमियों को भी नजरअंदाज नहीं करने को कहा। खराब स्ट्रीट लाइट, बंद CCTV, अंधेरे रास्ते, भारी वाहनों की अवैध पार्किंग और शिकायतों पर कार्रवाई न होना अपराध के लिए अनुकूल माहौल बना सकता है। अदालत ने ‘Broken Windows Theory’ का उल्लेख करते हुए ऐसी कमियों को अपराध होने का इंतजार किए बिना दूर करने पर जोर दिया। अवैध शराब की दुकानों और गैरकानूनी तरीके से शराब परोसने वाले ठिकानों पर कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए हैं। शराब की दुकानों के आसपास अनावश्यक भीड़ या जमावड़े को हटाने और संवेदनशील स्थानों की निगरानी बढ़ाने को कहा गया है। SOS व्यवस्था को लेकर कोर्ट ने कहा कि सिर्फ SOS बटन उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं है। यह स्पष्ट होना चाहिए कि अलर्ट मिलने के बाद सूचना किस अधिकारी तक जाएगी और कितनी तेजी से पुलिस प्रतिक्रिया देगी। दिल्ली के पार्कों की सुरक्षा को लेकर सामने आई स्थिति ने भी चिंता बढ़ाई है। 736 DDA पार्कों के सुरक्षा ऑडिट में बताया गया कि केवल 16 पार्कों में CCTV कैमरे काम कर रहे थे, जबकि 520 पार्कों में अतिरिक्त रोशनी की जरूरत थी। इसके बाद DDA ने 245 प्रमुख पार्कों में रात की पेट्रोलिंग बढ़ाने की योजना बनाई है।
मामला क्या है?
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-NCR में महिलाओं और नाबालिगों के खिलाफ हाल की यौन अपराध की घटनाओं का स्वतः संज्ञान (Suo Motu Cognisance) लिया है। इनमें आस्था कुंज पार्क में 17 वर्षीय लड़की के कथित सामूहिक बलात्कार, स्वरूप नगर में किशोरी के कथित सामूहिक बलात्कार और हत्या तथा चलती स्लीपर बस में नाबालिग लड़की के कथित यौन उत्पीड़न का मामला शामिल है। स्लीपर बस ग्रेटर नोएडा से दिल्ली तक करीब 47 किलोमीटर चली, लेकिन उसे रास्ते में नहीं रोका गया। कोर्ट ने इन घटनाओं को केवल अलग-अलग अपराध के रूप में देखने के बजाय सार्वजनिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था की व्यवस्था में मौजूद कमियों के संदर्भ में देखा है। वरिष्ठ अधिवक्ता लिज मैथ्यू को एमिकस क्यूरी (Amicus Curiae) नियुक्त किया गया है। सुनवाई में उन्होंने 2020 की CAG रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि दिल्ली पुलिस में सक्रिय ड्यूटी से जुड़े कामों के लिए करीब 39 प्रतिशत स्टाफ की कमी सामने आई थी। उन्होंने पेट्रोलिंग की निगरानी के लिए QR कोड, टाइम-स्टैम्पिंग और जियो-मैपिंग जैसी तकनीक अपनाने का सुझाव भी दिया। केंद्र सरकार ने अदालत को बताया कि दिल्ली सरकार, दिल्ली पुलिस, DDA, MCD, NDMC और महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अधिकारी पहले के निर्देशों के अनुपालन के लिए संयुक्त रूप से काम कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसका उद्देश्य केवल नए नियम बनाना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि अपराध रोकने और आपात स्थिति में तुरंत प्रतिक्रिया देने वाली मौजूदा व्यवस्था वास्तव में जमीन पर काम कर रही है।
