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मानवाधिकारों की लड़ाई को वैश्विक सम्मान, नावी पिल्लई को मिला 2026 का नोबेल शांति पुरस्कार

दक्षिण अफ्रीका की वरिष्ठ न्यायविद और संयुक्त राष्ट्र की पूर्व मानवाधिकार प्रमुख नावी पिल्लई को 2026 का नोबेल शांति पुरस्कार दिया गया है। उन्हें शांति और अंतरराष्ट्रीय कानून को बढ़ावा देने के प्रयासों के लिए चुना गया। भारतीय मूल के तमिल परिवार में जन्मीं पिल्लई ने रंगभेद के दौर में राजनीतिक बंदियों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का पक्ष रखा। उन्होंने रवांडा नरसंहार से जुड़े मामलों में न्यायिक भूमिका निभाई और 2008 से 2014 तक संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार उच्चायुक्त रहीं। इस साल चिकित्सा, भौतिकी, रसायन विज्ञान और साहित्य के नोबेल विजेताओं की भी घोषणा हो चुकी है, जबकि आर्थिक विज्ञान के पुरस्कार की घोषणा 12 अक्टूबर को होनी है।

sd09 अक्टू. 2026, 05:10 PM IST
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मानवाधिकारों की लड़ाई को वैश्विक सम्मान, नावी पिल्लई को मिला 2026 का नोबेल शांति पुरस्कार

               नई दिल्ली/ओस्लो, 9 अक्टूबर 2026। अंतरराष्ट्रीय न्याय और मानवाधिकारों की रक्षा के लिए लंबे समय से काम कर रहीं दक्षिण अफ्रीका की वरिष्ठ न्यायविद नवनेथम ‘नावी’ पिल्लई को 2026 का नोबेल शांति पुरस्कार दिया गया है। नॉर्वेजियन नोबेल समिति ने उन्हें शांति और अंतरराष्ट्रीय कानून को बढ़ावा देने में उनके योगदान के लिए चुना है। इस घोषणा के साथ ही उन अटकलों पर विराम लग गया, जिनमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को इस साल के पुरस्कार का संभावित दावेदार माना जा रहा था। नोबेल समिति ने पिल्लई के लंबे कानूनी और सार्वजनिक जीवन को रेखांकित करते हुए बताया कि उनका योगदान रंगभेद के खिलाफ संघर्ष में राजनीतिक बंदियों का बचाव करने से लेकर अंतरराष्ट्रीय न्यायिक संस्थानों में गंभीर अपराधों की जवाबदेही तय करने तक फैला है। उनका चयन ऐसे समय में हुआ है, जब दुनिया के कई हिस्सों में युद्ध, मानवाधिकार उल्लंघन और अंतरराष्ट्रीय कानून के पालन को लेकर बहस जारी है।

भारतीय मूल की हैं नावी पिल्लई

नावी पिल्लई का पूरा नाम नवनेथम पिल्लई है। उनका जन्म 23 सितंबर 1941 को दक्षिण अफ्रीका के डरबन में भारतीय मूल के तमिल परिवार में हुआ था। वह दक्षिण अफ्रीका की नागरिक हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मानवाधिकारों की प्रमुख आवाजों में गिनी जाती हैं। पिल्लई ने ऐसे समय में अपना कानूनी करियर शुरू किया, जब दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद की व्यवस्था के तहत नस्ल के आधार पर लोगों के अधिकार और अवसर तय किए जाते थे। सामाजिक भेदभाव और असमानता के इस माहौल में उन्होंने कानून को न्याय और समानता की लड़ाई का माध्यम बनाया। वर्ष 1967 में वकालत शुरू करने के बाद उन्होंने राजनीतिक बंदियों और रंगभेद विरोधी कार्यकर्ताओं का पक्ष रखा। उनका काम केवल कानूनी प्रतिनिधित्व तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने इस विचार को भी मजबूती दी कि न्याय व्यवस्था का उद्देश्य कमजोर और वंचित लोगों के अधिकारों की रक्षा करना होना चाहिए।

 कौन हैं नावी पिल्लई?

Navanethem "Navi" Pillay | Institute for African Women in Law

पूरा नाम: नवनेथम ‘नावी’ पिल्लई

जन्म: 23 सितंबर 1941

जन्मस्थान: डरबन, दक्षिण अफ्रीका

पहचान: न्यायविद, मानवाधिकार विशेषज्ञ और संयुक्त राष्ट्र की पूर्व मानवाधिकार प्रमुख

पृष्ठभूमि: भारतीय मूल के तमिल परिवार से संबंध; राष्ट्रीयता दक्षिण अफ्रीकी।


नावी पिल्लई के करियर का एक महत्वपूर्ण पड़ाव रवांडा के नरसंहार से जुड़े मामलों की सुनवाई रहा। वह रवांडा के लिए गठित अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायाधिकरण में न्यायाधीश रहीं। इस न्यायाधिकरण का उद्देश्य 1994 के नरसंहार और अन्य गंभीर अपराधों के लिए जिम्मेदार लोगों को न्याय के सामने लाना था। वर्ष 1998 में रवांडा के पूर्व मेयर जीन-पॉल अकायेसू से जुड़े मामले में पिल्लई न्यायिक पीठ का हिस्सा थीं। इस ऐतिहासिक फैसले ने अंतरराष्ट्रीय कानून में यह स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई कि किसी संरक्षित समूह को नष्ट करने के इरादे से किया गया यौन हिंसा का अपराध नरसंहार का हिस्सा हो सकता है। इस फैसले को अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्याय के विकास में महत्वपूर्ण माना जाता है। इससे युद्ध और सामूहिक हिंसा के दौरान महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों को कानूनी रूप से समझने और उन पर जवाबदेही तय करने के प्रयासों को मजबूती मिली।

संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार प्रमुख के रूप में भूमिका

नावी पिल्लई ने 2008 से 2014 तक संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार उच्चायुक्त के रूप में कार्य किया। इस पद पर रहते हुए उन्होंने दुनिया के विभिन्न हिस्सों में मानवाधिकार उल्लंघन, नस्लीय भेदभाव, नागरिक स्वतंत्रता और संघर्षों से प्रभावित लोगों के अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर काम किया। संयुक्त राष्ट्र में उनकी भूमिका ने उन्हें वैश्विक मानवाधिकार विमर्श के केंद्र में ला दिया। उन्होंने इस सिद्धांत पर जोर दिया कि गंभीर अपराधों और मानवाधिकार उल्लंघनों के मामलों में जवाबदेही तय होनी चाहिए, चाहे संबंधित पक्ष कितना ही शक्तिशाली क्यों न हो। उनके करियर का एक अन्य महत्वपूर्ण पक्ष अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय सहित प्रमुख न्यायिक संस्थानों से जुड़ा रहा है। इन संस्थानों में उनका काम अंतरराष्ट्रीय कानून और न्यायिक जवाबदेही को मजबूत करने के व्यापक प्रयासों का हिस्सा रहा।

गाजा से जुड़े विवादित मुद्दों पर भी रही भूमिका

नावी पिल्लई ने इजरायल और फिलिस्तीनी क्षेत्रों से संबंधित मानवाधिकार मुद्दों पर संयुक्त राष्ट्र की जांच व्यवस्था में भी भूमिका निभाई। वह कब्जे वाले फिलिस्तीनी क्षेत्र और इजरायल से संबंधित संयुक्त राष्ट्र जांच आयोग की अध्यक्ष रहीं। इस आयोग ने 2025 में गाजा में नरसंहार को लेकर निष्कर्ष प्रस्तुत किए थे। इजरायल ने इन आरोपों को खारिज किया था। यह मुद्दा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विवाद का विषय बना हुआ है। इसलिए इस मामले का उल्लेख करते समय आयोग के निष्कर्षों और संबंधित पक्षों की प्रतिक्रियाओं के बीच स्पष्ट अंतर रखना जरूरी है। यह भूमिका बताती है कि पिल्लई का काम केवल सैद्धांतिक मानवाधिकार विमर्श तक सीमित नहीं रहा, बल्कि वह ऐसे अंतरराष्ट्रीय मामलों से भी जुड़ी रही हैं, जिनके कानूनी, राजनीतिक और मानवीय प्रभाव व्यापक हैं।

नोबेल शांति पुरस्कार का क्या है महत्व?

नोबेल शांति पुरस्कार दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय सम्मानों में से एक है। इसे शांति, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और संघर्षों के शांतिपूर्ण समाधान को बढ़ावा देने वाले व्यक्तियों या संगठनों को दिया जाता है। नावी पिल्लई को मिला यह सम्मान इस विचार को सामने लाता है कि स्थायी शांति के लिए केवल युद्धविराम पर्याप्त नहीं है। इसके लिए न्यायिक संस्थाओं की मजबूती, गंभीर अपराधों की निष्पक्ष जांच, पीड़ितों को न्याय और मानवाधिकारों की रक्षा भी जरूरी है।

2026 के नोबेल शांति पुरस्कार की राशि 1.2 करोड़ स्वीडिश क्रोना है। पुरस्कार समारोह 10 दिसंबर को नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में आयोजित किया जाएगा।

नोबेल पुरस्कार 2026: अब तक घोषित विजेताओं की सूची

इस साल चिकित्सा, भौतिकी, रसायन विज्ञान, साहित्य और शांति के क्षेत्र में पुरस्कार विजेताओं की घोषणा हो चुकी है। आर्थिक विज्ञान के पुरस्कार की घोषणा 12 अक्टूबर 2026 को निर्धारित है।

  • चिकित्सा/फिजियोलॉजी: कार्ल डिसेरॉथ, पीटर हेगेमन और जॉर्ज नागेल — प्रकाश-संवेदनशील आयन चैनलों और ऑप्टोजेनेटिक्स से संबंधित खोजों के लिए।
  • भौतिकी: फ्रांसिस हल्जेन — आइसक्यूब न्यूट्रिनो वेधशाला में निर्णायक योगदान और खगोलीय स्रोतों से आने वाले उच्च-ऊर्जा न्यूट्रिनो की खोज के लिए।
  • रसायन विज्ञान: हेनरी बी. कागन और केन्सो सोई — असममित कार्बनिक संश्लेषण में गैर-रैखिक प्रभावों और ऑटोकैटालिसिस की खोजों के लिए।
  • साहित्य: ऐन कार्सन — अपने मौलिक और रचनात्मक साहित्यिक लेखन के लिए।
  • शांति: नावी पिल्लई — शांति और अंतरराष्ट्रीय कानून को बढ़ावा देने के प्रयासों के लिए।
  • आर्थिक विज्ञान: विजेता की घोषणा 12 अक्टूबर को होनी है

न्याय और मानवाधिकारों की वैश्विक बहस के बीच सम्मान

नावी पिल्लई का सफर रंगभेद के दौर में कानूनी संघर्ष से शुरू होकर अंतरराष्ट्रीय न्याय और संयुक्त राष्ट्र तक पहुंचा है। उनका करियर इस बात का उदाहरण है कि कानून और न्यायिक संस्थाएं भेदभाव, हिंसा और गंभीर अपराधों के खिलाफ किस तरह भूमिका निभा सकती हैं। 2026 का नोबेल शांति पुरस्कार उनके इसी लंबे योगदान को मान्यता देता है। साथ ही यह सम्मान अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने एक व्यापक सवाल भी रखता है—क्या वैश्विक शांति को मजबूत करने के लिए न्याय, जवाबदेही और मानवाधिकारों की रक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है? पिल्लई की उपलब्धियां इस बहस को फिर से केंद्र में ले आई हैं।