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अमेरिका का भारतीय IT कंपनियों पर बड़ा एक्शन! Infosys, TCS, Wipro समेत कई कंपनियां Green Card प्रोग्राम से सस्पेंड
अमेरिकी श्रम विभाग ने कथित तौर पर ग्रीन कार्ड से जुड़े PERM कार्यक्रम से कई बड़ी IT कंपनियों को सस्पेंड किया है। इनमें Cognizant, Infosys, Tata, Wipro, HCL, Capgemini, Microsoft और Adobe के नाम शामिल हैं। अमेरिकी अधिकारियों ने कार्यक्रम के कथित दुरुपयोग के आरोप लगाए हैं। इस कार्रवाई से इन कंपनियों के जरिए अमेरिका में ग्रीन कार्ड पाने की प्रक्रिया में जुटे विदेशी कर्मचारियों, खासकर भारतीय IT प्रोफेशनल्स के लिए देरी और अनिश्चितता बढ़ सकती है

अमेरिका में काम करने वाले भारतीय IT कर्मचारियों और ग्रीन कार्ड पाने की तैयारी कर रहे प्रोफेशनल्स के लिए बड़ी खबर सामने आई है। अमेरिकी श्रम विभाग ने कई बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों को स्थायी श्रम प्रमाणन कार्यक्रम यानी PERM से सस्पेंड करने की कार्रवाई की है। रिपोर्ट में Cognizant, Infosys, Tata, Wipro, HCL, Capgemini, Microsoft और Adobe जैसी कंपनियों के नाम शामिल हैं। अमेरिकी अधिकारियों का आरोप है कि इन कंपनियों ने ग्रीन कार्ड से जुड़ी व्यवस्था का दुरुपयोग किया है।
क्या है PERM प्रोग्राम?
PERM यानी Permanent Labor Certification अमेरिका में रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण चरण है। इसके तहत नियोक्ता को अमेरिकी श्रम विभाग के सामने यह साबित करना होता है कि संबंधित नौकरी के लिए पर्याप्त योग्य और उपलब्ध अमेरिकी कर्मचारी नहीं मिले हैं और विदेशी कर्मचारी को नियुक्त करने से अमेरिकी कर्मचारियों की मजदूरी तथा कामकाजी परिस्थितियों पर प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा। इस प्रमाणन के बाद कंपनी पात्र विदेशी कर्मचारी के लिए रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड की अगली प्रक्रिया आगे बढ़ा सकती है।
अमेरिकी श्रम मंत्री ने क्या कहा?
अमेरिकी श्रम मंत्री कीथ सोंडरलिंग ने कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की जानकारी दी। उनके अनुसार, इन कंपनियों पर PERM व्यवस्था का दुरुपयोग करने के आरोप हैं। Microsoft को लेकर उन्होंने विशेष रूप से कड़ी टिप्पणी की और आरोप लगाया कि कंपनी ने इस व्यवस्था का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग किया है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी Microsoft की भर्ती और छंटनी की नीतियों पर सवाल उठाए। उनके दावों के मुताबिक, कंपनी ने 2025 में करीब 6,000 अमेरिकी कर्मचारियों को नौकरी से निकाला, जबकि उसी दौरान विदेशी कर्मचारियों के लिए H-1B वीजा और ग्रीन कार्ड से जुड़े आवेदन भी किए गए।
वेंस ने दावा किया कि कंपनी के 3,682 ग्रीन कार्ड आवेदनों में से करीब 1,000 उन पदों से जुड़े थे, जिनसे अमेरिकी कर्मचारियों को हटाया गया था। इन आरोपों का मूल सवाल यह है कि क्या कंपनियां वास्तव में उन पदों के लिए विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त कर रही हैं, जिन्हें भरने के लिए योग्य अमेरिकी कर्मचारी उपलब्ध नहीं हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी श्रम विभाग ने हार्वर्ड, येल और स्टैनफोर्ड सहित नौ विश्वविद्यालयों को भी जांच के दायरे में लिया है। अधिकारियों को संदेह है कि कुछ संस्थानों ने अमेरिकी कर्मचारियों की तुलना में कम लागत वाले अंतरराष्ट्रीय कर्मचारियों को प्राथमिकता दी हो सकती है। इन मामलों में संबंधित संस्थानों को समन भेजे जाने की जानकारी भी दी गई है।
भारतीय IT कर्मचारियों पर क्या असर पड़ेगा?
इस कार्रवाई का सबसे बड़ा असर उन भारतीय IT प्रोफेशनल्स पर पड़ सकता है, जो Cognizant, Infosys, TCS, Wipro, HCL या Capgemini जैसी कंपनियों के जरिए अमेरिका में स्थायी निवास यानी ग्रीन कार्ड पाने की प्रक्रिया में हैं।
ग्रीन कार्ड प्रक्रिया में देरी: प्रभावित कंपनियों के जरिए नए PERM आवेदन दाखिल करने या मौजूदा मामलों को आगे बढ़ाने में बाधा आ सकती है।
नौकरी बदलने की योजना पर असर: जिन कर्मचारियों की इमिग्रेशन प्रक्रिया कंपनी की स्पॉन्सरशिप पर निर्भर है, उन्हें अपनी भविष्य की योजनाओं पर दोबारा विचार करना पड़ सकता है।
H-1B वीजा और ग्रीन कार्ड अलग हैं: PERM पर कार्रवाई का मतलब अपने आप H-1B वीजा रद्द होना नहीं है। दोनों की कानूनी प्रक्रियाएं अलग हैं।
पहले से मंजूर ग्रीन कार्ड स्वतः रद्द नहीं होते: केवल PERM कार्यक्रम से सस्पेंड होने के कारण पहले से जारी ग्रीन कार्ड अपने आप रद्द नहीं हो जाते। वास्तविक असर संबंधित कंपनी के खिलाफ आदेश और कर्मचारी की आवेदन स्थिति पर निर्भर करेगा।
फिलहाल इस मामले में कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की सटीक कानूनी स्थिति और प्रत्येक कंपनी पर लागू प्रतिबंधों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है। यदि कार्रवाई की पुष्टि होती है, तो अमेरिका में ग्रीन कार्ड की प्रतीक्षा कर रहे भारतीय कर्मचारियों के लिए यह महत्वपूर्ण घटनाक्रम होगा।
